September 19, 2009 by chanakyaworld
कहने के लिये कुछ भी उल्लेखनीय नहीं है इन १०० दिनों में सरकार का लेखा जोखा परखने का , सिवाय इसके कि इस देश की जनता का वाकई दिल गुर्दा इतना मजबूत है कि इसे जितना भी सताओ यह कुछ बोलने वाली नहीं । सभी तरफ़ लूट खसोट का बज़ार गरम है अखबार इनसे भरे पड़े हैं लेकिन इस देश की जनता मूक दर्शक बनी हुयी कान मे तेल दाले पड़ी हुयी बैठी है ।
यह बदलना भी नहीं चहती है । देश की जनता स्वयम चाहती है कि लूटने वाले उसे चाहे जितना लूटे वे आवाज़ तक नहीं उठायेंगे ।
नेता जानते हैं कि जनता दो तरीके से गरीब है एक सोचने का मद्दा नहीं है इसलिये दिमाग से गरीब है दूसरे इतना पैसा नहीं है कि आराम से खा पी सकें और सुकून से जीवन बिता सकें यानी पैसे और धन से भी गरीब हैं ।
फिर क्यों न इस देश के नेता इस कमजोरी का फायदा उठायें और जनता को हर जगह उल्लू बनायें ?
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May 3, 2009 by chanakyaworld
जरा नज़र डालिये पाकिस्तान की जन सन्ख्या पर, क्या कहता है अन्ग्रेजी भाषा का “विकीपीडिया इन्साइक्लोपीडिया” इस बारे में ।
पाकिस्तान की जन्सन्ख्या लगभग 17 करोड़ 28 लाख है । इस जन्सन्ख्या में 95% सुन्नी और शिया मुसलमान है, इसमें सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व ८५ प्रतिशत है । हिन्दुओं की सन्ख्या 32 लाख है , जो पाकिस्तान की आबादी का केवल 1.85% है । क्रिश्चियन्स की आबादी २८ लाख है जो केवल 1.6% है । सरदारों यानी सिखों की आबादी २० हजार है, जो पकिस्तान की कुल आबादी में 0.04% हैं ।
यानी हिन्दु जनता पाकिस्तान में प्रतिह्जार में लगभग १८ व्यक्ति, क्रिस्चियन्स १६ व्यक्ति और सरदार एक्दम नगण्य । यह है स्तिथि पाकिस्तान की , जो अपने यहां के अल्प सन्ख्यक आबादी को ढोना बोझ समझ रहा है । बीस हज़ार सिख भी उनके लिये बोझ बन गये हैं ? किसी भी सिख को वहा न तो नौकरी मिलती है और न वहां वे किसी आधिकारिक पद पर हैं । यही हाल सभी माइनारिटीज का है ।
विकीपीडिया में ऐसे बहुत से तथ्य दिये हुये है, जिन्हें देखकर और पढ्कर लगता है कि इलामावलम्बियों ने यह ठान लिया है कि वे इन सबका धर्म परिवर्तन करके अप्नी आबादी में शमिल करके शत प्रतिशत मुस्लिम आबादी मे तब्दील कर लेगा । हाल ही में पाकिस्तान के कई इलाकों में सिक्खों के ऊपर “जजिया कर” लगाने का क्या अर्थ निकाला जाय ? आज सिक्ख हैं, कल हिन्दू और क्रिष्चियन होंगे ? इस बात की क्या गारन्टी कि ऐसा नही होगा ?
सवाल यह है कि अल्प्सन्ख्यकों को देखने वाला य़ुनाइटेड नेशन्स का यह विभाग क्या कर रहा है ?
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April 25, 2009 by chanakyaworld
जैसा कि पहले आशन्का मैने जग जाहिर की थी कि नेताओं की नूरा कुश्ती में “हमाम में सब नन्गे हैं ” वाली मसल चरितार्थ होने जा रही है । सभी दलों को चुनाव में मिले वोटों के रुख को भाम्पकर यह आशन्का हो गयी है कि त्रिशन्कु लोक सभा का मैन्डेट देश की जनता ने जान्बूझकर दिया है । वोटों के दाम देने वाले मौजूद हैं, वोटों के खरीदार घात लगाये बैठे हैं, वोट देने वाला सोचता है, बटन दबाने के लिये पैसे मिल रहे हैं, भले ही एक दो दिन की दारू का खर्चा निकल आयेगा । ऊससे इस बात से क्या मतलब कि मुम्बई में कौन देश हमला कर रहा है, उससे इस बात का क्या सरोकार कि महगायी में कौन कितना पिस रहा है और इसका जिम्मेदार कौन है ? उसको सिर्फ़ अपने सेमतलब है कि नेता जी कुछ दे रहे है, ले लो, और बटन दबाओ । यह है देश के ऐसी सोच रखने वाले ३०% जनता, जिसे केवल प्याज से मतलब है और प्याज में ही उनकी सारी राजनीति समाई हुयी है । प्याज ही उनकी जान है और प्याज में ही उनके प्राण बसते हैं ।
य़ह भारतीय लोकतन्त्र का चेहरा है । क्षेत्रवाद ने तो और दुर्दशा करके रख दी है । अब यही तो फायदा है क्षेत्रीय दलों को कि उनको कितनी कीमत चुकाकर बहुमत लेना होगा ।
सरकार किसी की भी बने, मज्बूत और कमजोर तो लोकतन्त्र होगा । इस तरीके से बनायी गयी सरकारे इस देश की जनता की मानसिकता दर्शाती हैं । इसके अलावा कुछ नहीं ।
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April 21, 2009 by chanakyaworld
ताज्जुब की बात है, इस देश का मीडिया किसी नेता के छींक देने की स्टाइल को खबर बना देता है । एक दूसरा चैनेल तो इतना तेज़ है कि खबर आधी मिलते ही बाकी की आधी खबर खुद जोड़्कर प्रसारित कर देता है, इससे पहले की दूसरा चैनेल उस खबर को ब्राड्कास्ट करे । श्टिन्ग आप्रेशन करने वाले बड़े बड़े धाकडी पत्रकार पैदल हो गये । पर किसी भी चैनेल ने यह खबर नहीं प्रसारित की कि साध्वी प्रग्या पर साथ में बन्द एक मुसलमान कैदी द्वारा हमला करके उनकी मुह, औ चेहरे की अच्छी खासी धुनाई कर दी गयी ।
यह खबर मुझे आज के “MSN Internet news” द्वारा मालुम हुयी । आज किसी भी चैनेल ने यह खबर प्रसारित नहीं की । अब हमे लगने लगा है कि टी०वी० चैनेल विश्वास योग्य नही रह गये हैं ।
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April 18, 2009 by chanakyaworld
पहले चरण का मतदान सम्पन्न हो चुका है । जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था कि चुनाव शान्ति पूर्वक होन्गे, वह तो नही हुआ । नक्सलियों के हमले ने पुलिस बल पर हमला करके अपनी मन्शा जग जाहिर कर दी है । आशन्का की जा रही थी कि कि चुनाव में बिघ्न और बाधायें डाली जायेंगी , वैसा तो हुआ नहीं । मतदान का प्रतिशत कमोवेशी उतना ही रहा, जितना की होना चाहिये । फिर भी उस तरह का उत्साह मतदाताओं में नही देखने को मिला, जितना कि होना चाहिये था । यह लजिमी भी है । जब खाने पीने की चीजों के दाम लगातार हर दिन बढ रहे हों , तो लोग अपना पॆट देखेन्गे या चुनाव का बैलेट ।
गर्मी का मौसम, ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई का समय, परीक्षायें , यह सब कारण हैं, जिनसे कम मतदान हुआ । फिल्हाल किसे कितना वोट मिला, कौन पार्टी आगे है या पीछे, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन वोटों के बन्टवारे में कान्ग्रेस और बीजॆपी सबसे आगे हैं, बाकी सब पीछे ।
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April 16, 2009 by chanakyaworld
उत्तर प्रदेश की मुख्य मन्त्री मायावती का वरुण गान्धी के खिलाफ़ रासुका लगाये जाने से अन्दर ही अन्दर सवर्ण मतदाता बहुत नाराज है । जिसे आज सोसल एन्जीनियरिंग कहकर महिमा मन्डित किया जा रहा है, वह सोसल इन्जीनियरिंग इस लोक सभा के चुनाव में चलने वाली नहीं है । प्रदेश में विधान सभा के चुनाव का समिकरण कुछ दूसरा था, तब थोड़े समय के लिये यह युक्ती काम आ गयी । ळोक सभा के चुनाव में यह काम नही आ पायेगी, यह तो तय है ।
वरुण गान्धी पर रासुका लगाने से सभी सवर्ण बहुत आहत हुये हैं । झिस तरह से यह लगाया गया, इसके पीछे की मन्शा का भी पर्दाफास हो चुका है । सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि ज्यादती हुयी है ।
अब यही फैक्टर मायावती की लुटिया डुबो देगा । बहुजन समाज पार्टी बहुत बुरी तरह से हारेगी । इनका आन्कड़ा जितना सन २००४ के चुनाव में था, उतना ही बना रह पायेगा, इसमें भी सन्देह है ।
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April 16, 2009 by chanakyaworld
यह तो तय है की त्रिशन्कु लोक सभा बनेगी, क्योंकि न तो काग्रेस को स्पस्ट बहुमत मिलेगा और न बीजॆपी को । दोनों ही दल बहुमत के आन्कड़े से नीचे ही रहेगे । सरकार तो बननी है, यह समवैधानिक मज्बूरी है । कैसे बनेगी, यह सभी राजनीतिक दलों की मजबूरी है कि वे किस तरह की सरकार बनाना चाहेन्गे । दो ध्रुव बने हैं । क्षेत्रीय दल अपना फाय्दा देखेन्गे । एक धर्म निर्पेक्षता को दुहाई लेकर लेकर और दूसरा साम्प्रदायिक तत्वों के खिलाफ, यह बहाना लेकर और अपना नफा नुकसान देखकर, जोड़बन्दी करेंगे कि कान्ग्रेस को सपोट किया जाये या भाज्पा को । सभी दल अपना फायदा देखेंगे । यहां मूल्यों की राज्नीति होगी ।
इस देश की जनता को क्या मिलेगा ? मेरे खयाल से कुछ भी नहीं , शून्य मिलेगा । जनता केवल टैक्स भरे, गरीबी के नाम पर मुफ्त का पैसा लेने की होड़ में जुटे । अपनी मुसीबत में और अधिक इजाफा करे । कौन इस देश की सेवा करता है ? सब बकवास है । नेताओं के हलफ़्नामें देख लिजिये, करोड़ों के मालिक है फिर भी गरीब है ।
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April 12, 2009 by chanakyaworld
मै रोजाना मजे की तदाद में लोगो से मिलता हुं , उनसे बातें करता हू और अपने मतलब की जो भी बात होती है उसे निकाल लेता हुं । मुझे बाहर भी जाना पड़्ता है और दूर दराज के लोगों से बातें करने का मौका मिल जाता है, जिससे अपने काम की बात निकल आती है ।
मै यह बात तो दावे के साथ कह सकता हूं कि देश में इस चुनाव बाद त्रिशन्कु लोकसभा बनेन्गी ।
अब सवाल यह है कि सरकार कौन बनायेगा ? देश की मुख्य दो पर्टियों, कान्ग्रेस और बीजेपी में इस समय कान्टे की टक्कर है । कौन कितनी सीटें ले जायेगा, फिल्हाल यह कहना मुश्किल तो नहीं है, लेकिन सरकार बिना क्षेत्रीय पार्टियों के सहयोग के नहीं बन पायेगी ।
ऐसा लगता है कि कान्ग्रेस की सरकार बनने के ज्यादा अवसर बन रहे हैं । इसका कारण है NDA के घटक दल बिखर गये हैं । ये घटक दल बाजपेयी जी के जमाने में बहुत स्ट्रान्ग थे । अब इन्हीं दलों की इनके अपने ही राज्यों में मटिया पलीत है ।
एक तरह से यह अच्छा भी है । राजनीति एक “नूरा कुश्ती” का खेल है । एक दूसरे को खरी खोटी सुनाओ और अपनी राज्नीतिक दुकान चलाओ । अखबार वाले थोड़ा सा “Journalistic touch” देकर बेकार की खबरों में जान डाल देते है, जिससे महौल कुछ गरमाने लगता है । क्या कभी आपने देखा या सुना है, कि जो बातें चुनाव से पहले कही जाती हैं , वे कितनी पूरी हो पाती है ? इसे ही राजनीति कहते है ।
फिल्हाल चुनाव बाद भगवान सबकी खैर करे , क्योंकि आर्थिक मन्दी का असर तो अब पड़ेगा ।
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April 9, 2009 by chanakyaworld
बन्दे से बहुत बड़ी चूक हो गयी । काम जरूर बड़ी दिलेरी का किया । सही भी है , ऐसा काम तो सरदार के अलावा कोई कर भी नही सकता था । सरदारों के बारे में कहावत भी ठीक है ” सरदार पहले करते हैं और फिर बाद में सोचते हैं कि अच्छा किया या खराब किया” । जरनैल सिन्घ ने पहले कर डाला, जो भी करना था, वह आनन फानन में हुआ । जब समझ में आया तो पता चला कि अच्छा नही किया, इसलिये अपने काम की माफी भी मान्ग ली ।
एक बहुत बड़ी गलती सरदार जरनैल सिन्घ से हो गयी, इसलिये ये थोड़ा पीछे रह गये । ईराकी पत्रकार ने अपने दोनों जूते बुश की तरफ पेंके थे , जरनैल सिन्घ ने इसके मुकाबले आधा ही काम किया । यह बहुत बड़ी गलती सरदार से हो गयी ।
किसी जमाने में नेताओं को जूतों की माला पहनायी जाती थी । मैने अपने बचपन और किशोर अवस्था में बहुत से नेताओं को जूतों की माला पहनाते हुये देखा है । टमाटर, अन्डे, कीचड़, टट्टी, पाखाना, मूत्र आदि गलीज चीजें भी नेताओं पर फेंके जाते हुये देखा है । यह साठ और सत्तर के दशक की बात थी । लगता है, इतिहास अपने को फिर दोहराने जा रहा है ।
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April 7, 2009 by chanakyaworld
यह काम मेरे मन का हुआ है । कई बार अपने पत्रकारिता के जीवन में मुझे भी ऐसे अवसर आये जब मेंरी इच्छा होती थी की मै फ्लाने फ्लाने नेता को जूतों जूतों मारुं , जमीन में गिरा गिरा के, पटक पटक कर मारूं । लेकिन पत्रकारिता का धर्म सबसे पहले आ जाता , इसलिये मन में आक्रोष होते हुये भी अपने इस आक्रोष को दबा जाता. धीरे धीरे यह सब सहने की आदत पड़ गयी और मै लतिहड़ पत्रकार बन गया । जिसकी अपनी कोई इच्छा न हो और जो केवल एक मशीन की तरह काम करे ।
यही सभी पत्रकार करते है । एक बेजान मशीन की तरह, उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती । आन्ख के सामने अत्याचार हो रहा है, अनयाय्पूर्ण कार्य हो रहे हैं, लेकिन पत्रकार कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि वह एक आब्जर्वर की तरह है, केवल आब्जर्वर, इसके अलावा और कुछ नहीं ।
सरदार जरनैल सिन्घ पत्रकार ने माननीय चिदम्बरम की तरफ़ जूता फेंका, यह मैने पूरा घटना क्रम टी०वी० फूटेज में देखा । इस घटना की जिस तरह से लीपा पोती की गयी वह भी देखा । कुल मिलाकर मेरा निष्कर्ष यह है कि चिदम्बरम ने बहुत गैर जिम्मेदाराना तरीके से व्यव्हार किया, यह उनके पद के अनुरूप नहीं लगता ।
चिदम्बरम पर जूता फेंकने की घटना ने सिक्खों के अन्दर की बात बहुत गहरायी से कह डाली है ।
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