यह तो तय है की त्रिशन्कु लोक सभा बनेगी, क्योंकि न तो काग्रेस को स्पस्ट बहुमत मिलेगा और न बीजॆपी को । दोनों ही दल बहुमत के आन्कड़े से नीचे ही रहेगे । सरकार तो बननी है, यह समवैधानिक मज्बूरी है । कैसे बनेगी, यह सभी राजनीतिक दलों की मजबूरी है कि वे किस तरह की सरकार बनाना चाहेन्गे । दो ध्रुव बने हैं । क्षेत्रीय दल अपना फाय्दा देखेन्गे । एक धर्म निर्पेक्षता को दुहाई लेकर लेकर और दूसरा साम्प्रदायिक तत्वों के खिलाफ, यह बहाना लेकर और अपना नफा नुकसान देखकर, जोड़बन्दी करेंगे कि कान्ग्रेस को सपोट किया जाये या भाज्पा को । सभी दल अपना फायदा देखेंगे । यहां मूल्यों की राज्नीति होगी ।
इस देश की जनता को क्या मिलेगा ? मेरे खयाल से कुछ भी नहीं , शून्य मिलेगा । जनता केवल टैक्स भरे, गरीबी के नाम पर मुफ्त का पैसा लेने की होड़ में जुटे । अपनी मुसीबत में और अधिक इजाफा करे । कौन इस देश की सेवा करता है ? सब बकवास है । नेताओं के हलफ़्नामें देख लिजिये, करोड़ों के मालिक है फिर भी गरीब है ।