हम चाहते है, इस देश का हर नौजवान चाहता है, इस देश का हर नागरिक चाहता है कि हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की करे । लेकिन क्या ऐसा होना सम्भव होगा ?
शायद हम विचार कर रहे होन्गे की “नही” । सोचें भी क्यों न , हर तरफ़ लूट खसोट, मारामारी का बाज़ार गरम है, जिसको जहां मौका मिल रहा है , वह वहां हाथ साफ़ किये ले रहा है । चोर बाज़ारी, मुनाफ़ाखोरी बढ्ती चली जा रही है ।……….और अफ़सोस की बात ………हमारे विद्वान,कर्मठ, वाक पटु, बातों को इधर उधर घुमाने व्वाले नेता और अपना उल्लू सीधा हो जाये ऐसे राज्नीतिक दलों के कान में रुई घुस चुकी है उनकी आन्खों में ऐसा बवाल पैदा हो गया है जिससे उनको कुछ खराब नज़र ही नहीं आता ।
जाहिर है, ये नेता जो आज कुर्सी पर बैठे हैं, वे अपने आप तो वहा पहुंचे नही, उनको भेजा तो हमने आपने है । अब वे कुर्सी पर बैठ कर भ्रस्ताचार कर रहे है तो इस भ्रष्ट आचार को करने की चाभी देने की जिम्मेदारी किसकी है ?
यह हम आप हैं जो देश को नरक में धकेल देने के लिये जिम्मेदार है ?
देश का सुधार भी हमारे ही स्तर से यानी जनता के स्तर से होगा, इसलिये यदि देश का सुधार चाहते है तो पहले सुधार का चरण यहीं से शुरू होगा तभी सबका कल्याण है ।