इस देश के लिये महात्मा गान्धी मर मिटे, उन्होने सत्याग्रह और अहिन्सा का मार्ग अपनाकर भले ही तत्कालीन परिस्तिथियों वश ब्रिटिश हुकूमत को हटाने का कार्य किया हो, लेकिन सच यह है कि यह काम इस देश की जनता के उस वर्ग ने किया जिसे उनसे पहले के नेताओं ने उनको जोड़ने की कोशिश नहीं की या वे नेता जोड़ने का काम नहीं कर पाये /
सत्याग्रह और अहिन्सा उस समय की मान्ग थी,जब अन्ग्रेजों का शाशन था / उस समय आज की तरह सूचना और प्रेस की टेक्नोलाजी ज्यादा डेवलप नहीं थी / देश के लोग “मानसिक गरीबी” और “आर्थिक गरीबी” दोनों को झेल रहे थे / ऐसे समय में जमीन से जुड़े महात्मा गान्धी उन लोगों के लिये मसीहा बन कर आये जिसे “डाउन ट्रोडेन सोसायटी” कहा जाता है / इस सबसे निचले स्तर को छू जाने वाले महात्मा जी धीरे धीरे ऊपर के तबकों में भी पैठ कर गये /
लेकिन उनको सहायता और सहयोग और उनके साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर जूझनेवालों मे सबसे अधिक इसी तबके के लोग आगे आये /
तब की कान्ग्रेस और अब की कान्ग्रेस मे धरती और आसमान का फर्क है / उस समय के कान्ग्रेसी त्याग और तपस्या और आत्म बल पर ध्यान देते थे / कारण यह था कि महत्मा गान्धी जिन्दा थे /
आज के कान्ग्रेसी महात्मा को भूल गये है / उनके दर्शन को भूल गये, उनके सत्याग्रह को भूल गये, उनकी अहिन्सा की पाठशाला के पाठ भूल गये /
आज हाल यह है कि मौजूदा समय के गान्धी के चेले , बापू की ऐसी धरोहर को , ऐसी विरासत को, जिसे सारी दुनिया बड़े आश्चर्य के साथ देखती है, पढ्ती है, उसे खतम कर देने पर तुले है /
सत्य यह है कि मौजूदा सरकार, गान्धी
का नाम केवल और केवल अपने फायदे और अपनी जेबें भरने के लिये करते हैं / उन्हे न तो गान्धी जी की शिक्षा से मतलब है और न गान्धी के दर्शन से / हालात यह है कि श्री मोहन दास करम चन्द गान्धी इस समय की कान्ग्रेस के लिये “आउट आफ डेट” हो गये है / इसका कारण यह है कि कान्ग्रेसी अब समझ गये है कि श्री मोहन दास करम चन्द गान्धी उन्हे कुछ दे नहीं सकते , ये धूर्त कान्ग्रेसी इस गान्धी की साख का तब दोहन करते है, जब उन्हे इस देश की जनता को यह चेहरा उस समय दिखाना होता है, जब वे “अपना फायदा” देखते है / इसके लिये वे राज घाट तो जाते ही है , इन कान्ग्रेसियों कॊ कोई फायदा दिखे तो ये “मुर्दा घाट” तक भी जा सकते है /
आज के कान्ग्रेसी उस “गान्धी” को छोड़ करके इस ‘गान्धी’ के चाटुकार और चम्मच हो गये है , जो उनको बहुत कुछ देता है और दे रहा है / इस ‘गान्धी’ का उस “गान्धी” से कोई खून का रिश्ता भी नहीं है , न ही उस गान्धी का नेहरू परिवार से मीलों मीलों दूर का कहीं कोई सम्बन्ध भी नहीं है , लेकिन यही ‘गान्धी’ उस गान्धी की साख के सहारे इस देश के भाग्य विधाता बन गये हैं /
आज इस देश के वासी उस “गान्धी” को तो बिल्कुल भूल गये और इस ‘गान्धी’ की चाटुकारिता में लीन हो रहे है /
यानी असली गान्धी इस देश के लिये “आउट आफ़ डेट” हो गये हैं /