कान्ग्रेस की प्रधान मन्त्री मन्मोहन सिन्ह की इस सरकार को समर्थन देने वाले सभी राजनीतिक दल भी उतने ही इस देश की जनता के गुनहगार है , जितनी कि कान्ग्रेस है / इस सरकार को समर्थन देने के लिये कमर कसे समाज वादी पार्टी के श्री मुलायम सिन्ह , बहुजन समाज पार्टी की मायावती, द्रमुक, अन्ना द्रमुक की जय ललिता तथा अन्य वे सभी दल जो इस समय कान्ग्रेस की सरकार को समर्थन दे रहे है, उतने ही पाप के दोषी है, जितनी कि कान्ग्रेस कर रही है / यह सम्भव ही नहीं है कि देश की इतनी छीछालेदर हो रही है, सम्वैधानिक सन्स्थाओं की साख पर बट्टा लग रहा है, कान्ग्रेस के नेता अपनी “हिटलर शाही” इस देश में चला रहे है, जब देखो तब पेट्रोल के दाम बढाये जा रहे है , महन्गायी से सभी परेशान हो रहे है / आम नागरिक का जीना मुहाल है / एक भी इस सरकार के सहयोगी दलों के नेताओं ने कभी भी विरोध नहीं किया और सभी के सभी सूम साधे बैठे है /
इसका सबसे कारण यह है कि अभी इनको वोट लेने की आवश्यकता नहीं है / केन्द्रीय चुनाव में अभी तीन साल से कुछ अधिक का समय है / कान्ग्रेस के घाघ और मन्जे हुये नेता जानते है और इस देश के लोगों की नस पहचानते है कि इस् देश की जनता को कैसा चारा फेन्कना चाहिये जो वोट बटोरने में सटीक साबित हो / कान्ग्रेस को सहयोग देने वाले दल जैसे जैसे चुनाव आयेन्गे, वोट लेने के चक्कर में आपस में ही “नूरा कुश्ती” करेन्गे, क्योन्कि ये इन राज्नीतिक दलों की आपसी “अन्डर स्टैन्डिन्ग” होती है कि इनको तो समर्थन देना ही देना है /
मौजूदा सरकार को समर्थन देने वाले सभी राज्नीतिक दलों को एक यह बहाना बचने के लिये मिल रहा है कि जब लोकपाल बिल सन्सद में आयेगा तब अपनी प्रतिक्रिया देन्गे / इसका सीधा सीधा मतलब यह निकला है कि ये सभी समर्थन देने वाले राजनीतिक दल अपने को यह कहकर जनता की निगाहों में सुरक्षित महसूस करने का प्रयास कर रहे हैं कि उनकी नियत साफ है / लेकिन इसके बहुत से कूटनीतिक मायने निकलते है जो देश, काल और परिस्तिथि के अनुसार बनते और बदलते रहते है , राजनीतिक दलों के लिये राजनीति एक व्यापार और दुकानदारी के अलावा और दूसरा कुछ भी नहीं है /
इतनी महीन और सूच्छ्म बातें देश की जनता नहीं समझती है , क्योंकि इस देश की जनता के पास अपना कोई दिमाग नहीं है और इसी ना-समझी और दिमागी-कमजोरी का फायदा कमोवेश इस देश के सभी के सभी राजनीतिक दल ऊठा रहे है , अपनी जेबें भर रहे है, भ्रष्टाचार कर रहे हैं, इस देश की जनता को उल्लू बना रहे है और सबसे बड़ी बात यह है कि इस देश की जनता अपने स्वयम को सभी राज्नीतिक दलों द्वारा लुटवाने मे गर्व महसूस करती है और “उफ” करने के बजाय सब कुछ चुप्चाप बर्दाश्त कर लेती है /
चाहे “नाग नाथ” हों या “सांप नाथ” , हैं तो ये सब एक थैली के ही चट्टे-बट्टे, सवाल यह है कि आखिर दोषी कौन है और दोष किसको दिया जाय ?