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दैनिक जागरण कानपुर अखबार मे छप रहे ‘जन जागरंण‘ अभियान द्वारा न्याय व्यवस्था के बारे में

इस समय मेरी उमर लगभ ६५ वर्ष की है / मै जब १४ साल का था , तब पहली बार मेरे पिता जी मुझे कानपुर कचहरी ले गये थे / मेरे पिता जी व्यवसायी थे और मै तीन भाइयों में बीच का हूं / पिता जी की तबियत खराब रहती थी, इसलिये जब तक वे मुकदमों की पैरवी कर सकते थे , तब तक वे करते थे / जब तबियत खराब रहने लगी तो कचहरी की दौड़ धूप करने के लिये , वे मुझे साथ में ले जाने लगे /

मै और पिता जी जज साहब की अदालत के सामने बैठ जाते और पुकार का इन्तजार करते / वे मुझे बताते कि अहलमद जब पुकार लगाये , तब कह देना कि हाजिर हैं और अभी बाबू जी [ वकील साहब] को बुलाकर लाते है / पुकार होने के बाद जब मै कहता कि हाजिर है तो अहलमद कहता कि जाओ वकील सहब को बुला लाओ/

मै दौड़ कर जाता और वकील साहब को उनके बस्ते से बुला लाता / कभी कभी वकील साहब बस्ते में नहीं होते, तो उनको ढून्ढ कर लाते / यह सब करते करते पूरा दिन बीत जाता और आखिर में तारीख लेकर वापस आ जाते /

मै देखता था कि जो मुकदमे मेरे १४ साल की उम्र में दाखिल हुये थे उनका फैसला मेरी शादी के बाद हुआ/ यानी ५ या छह साल फैसले में लग गये / उस समय मेरी इतनी अकल नहीं थी कि मुकदमा होता कया है ?

कभी कभी मुझे अकेले जाना पड़्ता क्योंकि पिता जी हृदय रोग से पीड़ित थे और मेरे अलावा किसी को मुकदमे की पैरवी के बारे में जानकारी नहीं थी /

पिता जी के छोड़े गये मुकदमों मे से कई तो मुझे उनकी मृत्यु के बाद लड़्ने पड़े /

आज मुझे पचास से अधिक साल हो गये है मुकदमा लड़्ते लड़्ते, मुझे मेरी जवानी कब आयी और कब गयी , कुछ पता ही नहीं चला /

कुछ मुकदमें ३० साल में निपट पाये, किसी में कुल मिलाकर ३५ साल लग गये / पिछले २० सालों से मैने एक पैरोकार रख लिया है जो मुकदमों की पैरवी करने जाता है / हर सप्ताह एक से लेकर छह तारिखें पड़ती है /

भारतीय न्यायिक वयवस्था में बहुत सी कमियां और खामिया है, इनका मैने अध्य्यन किया है / इन कमियों का वकील और मुवक्किल दोनों बहुत फायदा उठाते है / मेरा लाखों रुपया किरायेदार लेकर भाग गये और कोई भी कोर्ट मेरा पैसा नही दिलवा सकी / मेरा वकील एक मुस्लिम है, जो पिछले ३५ सालों से मेरे मुकदमे देख रहे है, मै उनको हर माह एक निश्चित रकम दे देता हू और उनसे हाथ जोड़ लेता हू कि जो भी दे रहा हू उसे रख ले /

दैनिक जागरण द्वारा शुरू किये गये इस ‘ ‘ न्यायिक बदलाव ‘ ‘ में मै अपना योगदान जरूर करून्गा और लोगों को बताउन्गा तथा सरकार को भी उन कमियों की ओर इन्गित करून्गा, जिनसे न्याय देरी से मिल रहा है और इसके पीछे के कारण क्या है और कौन कौन से है ?

सानिया मिर्जा के परिवार वालो ने क्या समझ कर उसकी शादी एक गैर मुल्की इन्सान से तय की ?

सानिया मिर्जा के परिवार वालो ने क्या समझ कर उसकी शादी एक गैर मुल्की इन्सान से तय की ?

पिछले एक सप्ताह से टेनिस की खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा की शादी को लेकर इतना बखेड़ा और हाय तोबा मची हुयी है कि अब यह मसला खिंचते खिंचते पाकिस्तान की सरकार तक जा पहुचा है । यह शादी क्या हो गयी , झगड़े की जड़ बन गयी है ।

जब शादि ब्याह के मसले घर की चहार दीवारी से बाहर आ जाते है, तो पास पड़ोस के लोगों को बोलना ही पड़ जाता है । हलाकि शादी व्याह करना या न करना व्यक्ति की अपनी स्वतन्त्रता पर है, लेकिन जब कोई डिग्नेटरीज का मामला हो तो उसका असर सभी पर पड़्ना स्वाभाविक है ।वे एक मश्हूर टेनिस की खिलाड़ी हैं और भारत की ओर से खेलती है । यहं उनको जितनी सुविधायें मयस्सर है , वे शायद उनको पाकिस्तान में कभी भी नहीं मिलेंगी ।

१- पहला यह कि वे शादी होते ही पाकिस्तान की नागरिक हो जायेंगी और भारत से उनक रिश्ता हमेशा के लिये खतम हो जायेगा, भले ही उनका जन्म यहां हुआ हो और उनके माता पिता यहां रह रहे हों ।

२- पाकिस्तान से भारत के रिश्ते हमेशा तनाव पूर्ण रहेन्गे और इसमे नर्मी कभी भी नहीं यह आयेगी, इस सूत्र को गान्ठ बान्धकर रख लेना चाहिये । यदि सानिया शादी करती है तो उनका दर्ज़ा एक पाकिस्तानी का होगा और वे केवल यहां मेहमान बन कर ही आ पायेंगी ।

३- भारत में उनको जितनी स्वतन्त्रता से और अधिक अवसर टेनिस खेल से सम्बन्धित मिल सकते हैं , उनको पाकिस्तान में शायद ही मिल सकें, यह तो उनको भी पता होगा कि टेनिस खेल की पाकिस्तान में क्या दुर्दशा है ? भारत में तो उनके लिये खेल मन्त्रालय से लेकर जिला स्तर तक टेनिस के खेल को लेकर अपार सम्भावनायें है । यह उनको पाकिस्तान में तो मिलने से रहा ।

४- पाकिस्तान अभी और बुरे दौर से गुजरेगा । तालिबान इनका पीछा छोड़ेंगे नही, न जल्दी जल्दा, अफगानिस्तान की समस्या क कोई हल निकलेगा । अब यह मुतवातिर चलता रहेगा । कौन जाने कब कहीं से किसी तालिबान का फरमान जारी हो जाये कि पाकिस्तान की महिलायें टेनिस कतई न खेलें क्योंकि यह इस्लाम के उसूलों के खिलाफ़ है और उनको मार डालने की धामकी दे दी जाये, वे तब क्या करेंगी ? हिन्दुस्तान में तो वे महफ़ूज है, लेकिन वहां क्या होगा ? सवाल सिक्योरिटी और जीवन की रक्षा से जुड़ा हुआ है ?

५- दुबई में रहने से क्या होगा ? कोई कितने दिन अपनों से अलग होकर रह सकता है ? दुबई में कितने दिन रहेंगे ? क्या वहां से टेनिस खेली जायेगी ? सवाल एक और है, सानिया किस देश के लिये टेनिस खेलेंगी ? हिन्दुस्तान से तो उनका पत्ता साफ हो जायेगा, वे पाकिस्तान की नागरिक हो जायेंगी । भारत सरकार किसी पाकिस्तानी को देश की तरफ से खेलने देगी ? मेरे विचार से तो यह नामुमकिन है, क्योंकि इतने बखेड़े विरोधी खड़े कर देन्गे कि सर्कार को भी सोचना पड़ेगा । इस लिये सानिया को अब समझ लेना चाहिये कि शादि यदि की तो उनका कैरियर बिल्कुल खतम हो जायेगा और जो आज लोग उनको सर पर बठाये हुये है , वे उनको जमीन्दोज करने में एक सेकन्ड भी नहीं लगायेन्गे ।

६- अपना परिवार अपना होता है । सैकड़ों लोग , हज़ारों लोग और करोड़ों लोगों कि भावनायें राष्ट्र के स्वाभिमान से जुड़ी होती है । भारत का कोई भी सितारा पतन के गर्त में गिरता है तो लोग उसको बचने की सलाह देते है । क्या सानिया को कोई भी भारतीय मुसलमान ऐसा नहीं मिला जो उनको एक पाकिस्तानी से शादी करनी पड़ रही है ? यह ऐसा सवाल है, जो मैं नहीं, मेरे मुसलमान दोस्त उठा रहे हैं । मेरा मानना है कि भारत के लगभग सभी मुसलमान इस शादी से कतई खुश नहीं हैं ।

७- तजा तरीन शादी बहुत से सपने, बहुत सी रन्गीनियां लेकर आती है, लेकिन कुछ दिन बाद जैसे जैसे हकीकत रूबरू होती जाती है, वैसे वैसे ही सारे सपने टुटते देर नहीं लगती । बाद मे एक गलत निर्णय लेने का खामियाजा अजब भुगतना पड़्ता है, तब पता चलता है कि उनके द्वारा की गयी एक गलती कितनी कहतर्नाक उनके लिये साबित हुयी ।

मै कहना तो बहुत चाह्ता हुं , लेकिन मुझे सानिया के इस निर्णय पर आश्चर्य जरूर हुआ ।

हलाकि शादी व्याह करना व्यक्ति की अपनी रुचि पर निर्भर करता है, लेकिन जिस देश ने सानिया को इस मुकाम तक पहुंचाया, उनको देश के उच्च से उच्च सम्मानों से नवाजा गया, देश के लोगों नें उनके खेल को सराहा और उनसे बहुत सी उम्मीदें भविष्य के लिये लगा के रखीं, उनके इस तरह से किशी पाकिस्तानी के साथ शादी करने के निर्णय से निश्चय ही इस देश के प्रत्येक भारतीय को ठेस पहुंची है ।

इस देश की जनता का सबसे पहले सुधरना जरूरी है

हम चाहते है, इस देश का हर नौजवान चाहता है, इस देश का हर नागरिक चाहता है कि हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की करे । लेकिन क्या ऐसा होना सम्भव होगा ?

शायद हम विचार कर रहे होन्गे की “नही” । सोचें भी क्यों न , हर तरफ़ लूट खसोट, मारामारी का बाज़ार गरम है, जिसको जहां मौका मिल रहा है , वह वहां हाथ साफ़ किये ले रहा है । चोर बाज़ारी, मुनाफ़ाखोरी बढ्ती चली जा रही है ।……….और अफ़सोस की बात ………हमारे विद्वान,कर्मठ, वाक पटु, बातों को इधर उधर घुमाने व्वाले नेता और अपना उल्लू सीधा हो जाये ऐसे राज्नीतिक दलों के कान में रुई घुस चुकी है उनकी आन्खों में ऐसा बवाल पैदा हो गया है जिससे उनको कुछ खराब नज़र ही नहीं आता ।

जाहिर है, ये नेता जो आज कुर्सी पर बैठे हैं, वे अपने आप तो वहा पहुंचे नही, उनको भेजा तो हमने आपने है । अब वे कुर्सी पर बैठ कर भ्रस्ताचार कर रहे है तो इस  भ्रष्ट आचार को करने की चाभी देने की   जिम्मेदारी किसकी है ?

यह हम आप हैं जो देश को नरक में धकेल देने के लिये जिम्मेदार है ?

देश का सुधार भी हमारे ही स्तर से यानी जनता के स्तर से होगा, इसलिये यदि देश का सुधार चाहते है तो पहले सुधार का चरण यहीं से शुरू होगा तभी सबका कल्याण है ।

मनमोहन सिह की सरकार का लेखा जोखा १०० दिन से ऊपर का

कहने के लिये कुछ भी उल्लेखनीय नहीं है इन १०० दिनों में सरकार का लेखा जोखा परखने का , सिवाय इसके कि इस देश की जनता का वाकई दिल गुर्दा इतना मजबूत है कि इसे जितना भी सताओ यह कुछ बोलने वाली नहीं । सभी तरफ़ लूट खसोट का बज़ार गरम है अखबार इनसे भरे पड़े हैं लेकिन इस देश की जनता मूक दर्शक बनी हुयी कान मे तेल दाले पड़ी हुयी बैठी है ।

यह बदलना भी नहीं चहती है । देश की जनता स्वयम चाहती है कि लूटने वाले उसे चाहे जितना लूटे वे आवाज़ तक नहीं उठायेंगे ।

नेता जानते हैं कि जनता दो तरीके से गरीब है एक सोचने का मद्दा नहीं है इसलिये दिमाग से गरीब है दूसरे इतना पैसा नहीं है कि आराम से खा पी सकें और सुकून से जीवन बिता सकें  यानी पैसे और धन से भी गरीब हैं ।

फिर क्यों न इस देश के नेता इस कमजोरी का फायदा उठायें  और जनता को हर जगह उल्लू बनायें ?

ये पाकिस्तान में क्या हो रहा है ?

जरा नज़र डालिये पाकिस्तान की जन सन्ख्या पर, क्या कहता है अन्ग्रेजी भाषा का “विकीपीडिया इन्साइक्लोपीडिया” इस बारे में ।

पाकिस्तान की जन्सन्ख्या लगभग 17 करोड़ 28 लाख है । इस जन्सन्ख्या में 95% सुन्नी और शिया मुसलमान है, इसमें सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व ८५ प्रतिशत है । हिन्दुओं की सन्ख्या 32 लाख है , जो पाकिस्तान की आबादी का केवल 1.85% है । क्रिश्चियन्स की आबादी २८ लाख है जो केवल 1.6% है । सरदारों यानी सिखों की आबादी २० हजार है, जो पकिस्तान की कुल आबादी में 0.04% हैं ।

यानी हिन्दु जनता पाकिस्तान में प्रतिह्जार में लगभग १८ व्यक्ति, क्रिस्चियन्स १६ व्यक्ति और सरदार एक्दम नगण्य । यह है स्तिथि पाकिस्तान की , जो अपने यहां के अल्प सन्ख्यक आबादी को ढोना बोझ समझ रहा है । बीस हज़ार सिख भी उनके लिये बोझ बन गये हैं ? किसी भी सिख को वहा न तो नौकरी मिलती है और न वहां वे किसी आधिकारिक पद पर हैं । यही हाल सभी माइनारिटीज का है ।

विकीपीडिया में ऐसे बहुत से तथ्य दिये हुये है, जिन्हें देखकर और पढ्कर लगता है कि इलामावलम्बियों ने यह ठान लिया है कि वे इन सबका धर्म परिवर्तन करके अप्नी आबादी में शमिल करके शत प्रतिशत मुस्लिम आबादी मे तब्दील कर लेगा । हाल ही में पाकिस्तान के कई इलाकों में सिक्खों के ऊपर “जजिया कर” लगाने का क्या अर्थ निकाला जाय ? आज सिक्ख हैं, कल हिन्दू और क्रिष्चियन होंगे ? इस बात की क्या गारन्टी कि ऐसा नही होगा ?

सवाल यह है कि अल्प्सन्ख्यकों को देखने वाला य़ुनाइटेड नेशन्स का यह विभाग क्या कर रहा है ?

हवा का रुख , कहां जा रहा है ?

जैसा कि पहले आशन्का मैने जग जाहिर की थी कि नेताओं की नूरा कुश्ती में “हमाम में सब नन्गे हैं ” वाली मसल चरितार्थ होने जा रही है । सभी दलों को चुनाव में मिले वोटों के रुख को भाम्पकर यह आशन्का हो गयी है कि त्रिशन्कु लोक सभा का मैन्डेट देश की जनता ने जान्बूझकर दिया है । वोटों के दाम देने वाले मौजूद हैं, वोटों के खरीदार घात लगाये बैठे हैं, वोट देने वाला सोचता है, बटन दबाने के लिये पैसे मिल रहे हैं, भले ही एक दो दिन की दारू का खर्चा निकल आयेगा । ऊससे इस बात से क्या मतलब कि मुम्बई में कौन देश हमला कर रहा है, उससे इस बात का क्या सरोकार कि महगायी में कौन कितना पिस रहा है और इसका जिम्मेदार कौन है ? उसको सिर्फ़ अपने सेमतलब है कि नेता जी कुछ दे रहे है, ले लो, और बटन दबाओ । यह है देश के ऐसी सोच रखने वाले ३०% जनता, जिसे केवल प्याज से मतलब है और प्याज में ही उनकी सारी राजनीति समाई हुयी है । प्याज ही उनकी जान है और प्याज में ही उनके प्राण बसते हैं ।

य़ह भारतीय लोकतन्त्र का चेहरा है । क्षेत्रवाद ने तो और दुर्दशा करके रख दी है । अब यही तो फायदा है क्षेत्रीय दलों को कि उनको कितनी कीमत चुकाकर बहुमत लेना होगा ।

सरकार किसी की भी बने, मज्बूत और कमजोर तो लोकतन्त्र होगा । इस तरीके से बनायी गयी सरकारे इस देश की जनता की मानसिकता दर्शाती हैं । इसके अलावा कुछ नहीं ।

जेल में बन्द साध्वी प्रग्या पर दूसरे कैदी द्वारा हमला

ताज्जुब की बात है, इस देश का मीडिया किसी नेता के छींक देने की स्टाइल को खबर बना देता है । एक दूसरा चैनेल तो इतना तेज़ है कि खबर आधी मिलते ही बाकी की आधी खबर खुद जोड़्कर प्रसारित कर देता है, इससे पहले की दूसरा चैनेल उस खबर को ब्राड्कास्ट करे । श्टिन्ग आप्रेशन करने वाले बड़े बड़े धाकडी पत्रकार पैदल हो गये । पर किसी भी चैनेल ने यह खबर नहीं प्रसारित की कि साध्वी प्रग्या पर साथ में बन्द एक मुसलमान कैदी द्वारा हमला करके उनकी मुह, औ चेहरे की अच्छी खासी धुनाई कर दी गयी ।

यह खबर मुझे आज के “MSN Internet news” द्वारा मालुम हुयी । आज किसी भी चैनेल ने यह खबर प्रसारित नहीं की । अब हमे लगने लगा है कि टी०वी० चैनेल विश्वास योग्य नही रह गये हैं ।