कब्जा करके बनाये जा रहे मन्दिर और धार्मिक स्थल ; मेरे साथ हुआ हादसा

सोमवार २० सितम्बर सन २०१० को मेरे मकान के सामने बार्डर लाइन के आगे २ फुट नाला की जमीन छोड़कर आस पास के अराजक तत्वों ने सामने ही स्तिथी एक पीपल के पेड़ के नीचे की जमीन घेर कर पहले एक चबूतरा बनाया और बाद में उस पर हनुमान जी की मूर्ती रखने का इन्तजाम किया जाने ही वला था कि तब तक मै वहं पहुन्च गया /

पीपल के पेड़ के नीचे की जमीन पर चबूतरा बनाने का कार्य क्रम कई दिनो से चल रहा था , लेकिन आस पास के किसी भी व्यक्ति ने मुझे खबर नहीं की /

मै कानपुर शहर में रहता हूं / जहा यह मामला हुआ वह मेरे घर से लगभग ५ किलोमीटर दूर का है , जहां मेरी पुश्तैनी जमीन है / मकान पुराना होने के कारण और सामने की दुकान खाली होने की वजह से मैने चार फ़ुट की दीवाल बना दी ताकि कोई अपनी समान न रख सके / इस दीवाल से बिल्कुल सटी हुयी नगर पालिका की बड़ी २ फ़ुट चौड़ी नाली है , जिस पर पत्थर रख दिये गये है / इसके बाद सरकारी जमीन है /

रात में मुझे लगभग ८ बजे किसी ने खबर की कि आपके घर के सामने कुछ लोग हनुमान जी का मन्दिर बना रहे है / सन्योग की बात है कि उसी समय एक सज्जन मेरे पास बैठे हुये थे, जैसे ही यह बात मैने उन सज्जन के सामने बतायी , उन्होने तुरन्त कहा कि आप अभी जाकर उस जगह का मुआयना करे / आप्की जमीन पर कब्जा होने जा रहा है / कल मन्गल वार भी है और बुढवा मन्गल होने से यह शक हो रहा है कि लोग आपकी जमीन पर कब्जा करके आपकी बिल्डिन्ग की रौनक खत्म करने पर तुले हुये है / आप अभी चलिये और देखिये की माजरा क्या है /

मै तुरन्त अपने बेटे के साथ और उन सज्जन को लेकर मकान की तरफ़ भागा / वहां जाकर सब देखा / चबूतरा बनाया जा चुका था / एक तरफ़ कुछ दूरी पर एक दुकान के पास हनुमान जी रखे गये थे/ पीपल के पेड़ पर एक लाल रन्ग की ध्वजा एक कील से ठोंक दी गयी थी /

मैने वहां उपस्तिथि लोगो से पूछा कि यह सब किसका काम है / यह सब किसी ने नहीं बताया कि यह किसका काम है / कुछ देर रहने के बाद मै थाना पुलिस पहुन्चा वहा तहरीर दी कि ऐसी वार्दात हुयी है / इस समय तक रात के साढे नौ बज चुके थे / थानेदार खाना खा रहे थे, उन्होने कहा कि मै अभी खाना खाकर द्स मिनट में आपके साथ चलता हू /

मै पुलिस लेकर अपने मकान आया और पुलिस ने मौका मुआयना किया / थानेदार ने कहा कि यह तो सन्ग्येय अपराध है / सरकारी जगह पर कानूनन ऐसे निर्माण करने का किसी को अनुमति नहीं है / उन्होने कहा कि रात काफी हो चुकी है अभी आप जाइये, कल दिन मे १२ बजे आइये/

मै वापस कानपुर चला आया, इस समय रात के ११ बजे के बाद का समय हो चुका था /

दूसरे दिन मै थाने पहुन्चा, थानेदार अपने बड़े अधिकारी के साथ मीटिन्ग कर रहे थे / क्योकि २४ सितम्बर की वजह से पुलिस अपने पुख्ता इन्त्जाम मे लगी हुयी थी / नागरिकों के साथ मीटिन्ग थी और नेताओं अधिकारियों का आना जाना तथा पुलिस का पुख्ता और सटीक इन्तजाम देखकर मै क्या सभी लोग दहसत में आ गये थे, लेकिन अपने अन्दर के मन में यह विश्वास भी भर रहा था कि किये जा रहे इन्तजाम से हम सभी नागरिक एक्दम सुरक्षित है और हम सब को बिना डरे अपने सभी काम उसी तरह से करना चाहिये जैसा हम रोज करते है /

अभी यह सब महौल थाने के अन्दर चल ही रहा था, सी०ओ० साहब पहले वहां से मीटिन्ग करके निकले, बाद में नेता गण और फिर धीरे धीरे सामान्य जन / मै लगभग दो घन्टे थाने के गेट पर खड़ा रहा और इन्तजार करता रहा कि कब मुझको अन्दर जाकर थानेदार साहब से मिलने का अवसर मिलेगा /

बहरहाल मै थानेदार साहब के सामने रक्खी हुयी कुर्सी पर बैठ गया, वे बहुत व्यस्त थे / आधा घन्टा बाद मेरी तरफ मुखातिब हुये / उन्होने कहा कि सार्वजनिक और सरकारी जगह पर कब्जा करना सन्ग्येय अपराध है /

मै कुछ देर बाद वापस कब्जे वाली जगह पर आया तो देखा कि किसी ने एक और हनुमान जी की पथ्थर की मूर्ती सीमेन्ट लगाकर रख दी है / मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ, मैने अपने नौकर से कहा कि मै इन मूर्तियों को हटाये दे रहा हूं , तुम इस चबूतरे को तोड़ना शुरू करो / मेरे साथ मेरा बेटा भी था /

मैने एक झटके में हनुमान जी को उखाड़ा तथा दूसरे हनुमान जी को उठाकर नीचे रख दिया और हथौड़ा लेकर चबूतरा गिराना शुरू कर दिया / कुछ देर में ही वहा भीड़ लग गयी / बोला कोई नहीं / बजरन्ग दल के एक नेता आकर मुझसे पूछने लगे कि आप क्यों हनुमान जी का चबूतरा तोड़ रहे हैं ? मैने कहा यह अवैध है / मेरी उनसे बहस होने लगी / वे नेतागी्री दिखाने लगे / एक नेता विश्व हिन्दू परिषद के भी आ गये / वाद बिवाद जारी रहा / मैने काम नहीं रोका और बराबर चबूतरा तोड़ने में लगा रहा /

तभी किसी ने उन नेताओं से कहा कि कल रात में पुलिस आयी थी और पन्डित जी की लिखित तहरीर थाने में जमा है / यह सुनकर नेता जी खिसक लिये और फिर कोई लौट्कर नहीं आया / मैने उस चबूतरे को जमीन दोज करके बराबर कर दिया /

लोग कह रहे थे कि आपने सही समय पर जागरुक होकर अवैध निर्माण बनाने से रोका / जिस स्थान पर इस तरह का निर्माण हो रहा था वह कानपुर लखनऊ हाई वे है / ऐसे जाने कितने मन्दिर बन गये है जो हाई वे के किनारे किनारे बनये गये है /

मुझे बाद में पता चला कि इस सबके पीछे सफ़ेद्पोश नेताओं , नशेबाजों, स्मैकियों, पियक्कड़ॊ का हाथ था / ऐसे और इस तरह्से कब्जा जमाने वालों की नीयत कीमती जमीन पर कब्जा जमाकर उस पर दूकाने बनवाकर या जगह घेर कर रहने के साथ साथ कमाई का जरिया बनाने का होता है / धरम से उनका कोई लेना देना नहीं होता / जहां यह कब्जा हो रहा था, उसके १० कदम पर ही एक अच्छा खासा पुराना मन्दिर बना हुआ है / अगर सबको इतनी ही श्र्द्धा होति तो उनको पास के मन्दिर में जाना चाहिये था / इस तरह के नये मन्दिर बनाने क्या जरूरत थी /

वास्तविकता यह है कि देश को अगर इन सब बातों से बचाना है तो इसके नियन्त्रण के लिये कड़े कानून और सजा की जरूरत है /

कल्पना करें यदि मुझसे जरा सी भी चूक हो जाती और कुछ घन्टॊं का फरक पड़ जाता और अगर मै इस तरह के स्टेप न लेता, तो वहं मन्दिर बन जाता, तब क्या मै इस मन्दिर को हटा पता ? जवाब यही होता, शायद नहीं और कभी नही / यह पर्मानेन्ट बन जाता और फुट्पाथ पर कब्जा करके वहां दुकाने बन जातीं वही कब्जा जमाने वाले अपना घर बना लेते और रहने लगते / देश का कोई कानून इनको हटा भी नहीं सकता था /

जो मकान मालिक है, जिनकी जगहें खाली पड़ी है, वे सब बहुत सतर्क रहें / किसी की भी कीमती जमीन एक छोटे मन्दिर के कारण बरबाद हो सकती है / देश का कोई भी कानून इस कब्जे के सामने टिक नही सकता और इस मसले पर सभी न्यायालय चुप हो जाते है / कानपुर में ही हजारों ऐसी जगहें है जहं इस तरक के निर्माण रोजाना बड़ी सन्खया में हो रहे है और यह सिल्सिला थम नही रहा है / कही भी किसी भी सड़्क पर निकल जायें ऐसे निर्माण आपको बड़ी सन्खया मे देखने को मिलेन्गे /

सवाल यह है कि इस तरह के हादसे कब रोके जायेन्गे और इन्हे रोकेगा कौन? कानून तो बेकार हो चुका है /

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