मौजूदा सरकार के सामने पैदा हुये सन्कट से कैसे निपटा जाय ?

देश की हालत बहुत विषम परिस्तिथियों मे पहुन्च चुकी है / भारतीय समाज में इस समय सभी राज्यों मे नागरिकों के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उथल पुथल मची हुयी है और अगर समय रहते इससे नहीं निपटा गया तो स्तिथि बहुत बद से बदतर होती चली जायगी /

जो पिछले एक हफ्ते मे हुआ , वह सभी जानते है / मै इसे दोहराना नहीं चाहता / मै कुछ सुझाव सरकार को दे रहा हूं, शायद इससे कोई बात बन जाये /

१- सारे बवाल की जड़ केन्द्रीय मन्त्री कपिल सिब्बल है / इनसे प्रधान मन्त्री जी को फौरन स्तीफा ले लेना चाहिये और सरकार से निकाल बाहर करना चाहिये / इस मन्त्री की वजह से सारा बवाल हुआ है /

२- सरकार के दूसरे मन्त्री सुबोध कान्त सहाय को भी हटाकर इनको कान्ग्रेस सन्गठन के किसी पद पर बैठा देना चाहिये या किसी राजय का प्रभारी बना देना चाहिये /

३- पुलिस के दो तीन आला अधिकारियों को सस्पेन्ड कर देना होगा और कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को भी इसी तरह की दन्डात्मक कार्यवाही करके बाहर करना होगा और चार्ज शीट्ड करना होगा /

४- एक जान्च आयोग का एलान करना होगा जो सारी atrocities की जान्च करके सरकार को बताये कि आखिर क्या कारण थे जिनकी वजह से ऐसा करना लाजिमी था /

५- सरकार ” न नुकुर ” करके स्वीकार करे कि उसको अन्धेरे में रखकर प्रधान मन्त्री या मन्त्रियों के समूह को बिना बताये ऐसी कार्य्वाही की गयी, जिसका सभी को पछतावा है /

६- सिविल सोसायटी के प्रस्तावित बिल की ड्राफ्टिन्ग और मन्त्रियों के समूह के बीच हो रहे वाक युद्द की जड कपिल सिब्बल है, जब सिब्बल बाहर हो जायेन्गे तो जो परिस्तिथियां बने उनके अनुसार यह कहने का मौका मिलेगा कि बिल के लिये थोड़ा और समय चाहिये क्योंकि सिब्बल के जाने के बाद मन्त्रियों की सन्ख्या चार रह जायेगी /

७- बाबा रामदेव जो कुछ कह रहे है, उनको सुनिये और राज्नीतिक तौर तरीके से सरकार निपटे / बाबा फटेहाल है, वो अल्ल बल्ल बकेन्गे, मीडिया के लिये मसाला होगा, इसे कोई नहीं रोक पायेगा / इनसे उसी भाषा में जवाब दिया जाना चाहिये

८- अन्ना हजारे जी का मूवमेन्ट गलत नहीं है / भ्रष्टाचार से सभी आहत है , मै भी हूं / अन्ना हजारे और उनके सभी साथी समझदार है और गान्धीवादी होने के नाते वे अहिन्सा में विश्वास रखते है / सिविल सोसायटी के लोग चाहते है कि भ्रष्टाचार इस देश से दूर हो / इसमें किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिये / सरकार को कुछ पाजिटिव और कुछ निगेटिव रूख अख्तियार करना चाहिये / अगर ये कहते है कि ड्राफ्ट मे इस बात का इन्क्लूसन करे तो इसमे क्या आपत्ति है ? एक बीच का रास्ता निकाल कर कुछ हासिल किया जा सकता है /

९- सरकार को यह सोचना चाहिये कि अभी बिल का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है / इसमें किसी क्लाज को हटाने या कुछ नया जोड़ने का काम तो सन्सद के दोनो सदनों के अन्दर ही फाइनली होगा/ यह तो फिर सरकार के हाथ में होगा कि वह किस तरह का लोक्पाल बिल चाहती है /

१०- लोकतन्त्र मे सरकार टकराव का रस्ता नही अपना सकती / इस तरह का व्यवहार अराजकता को बढावा देता है /

हम दुनियां के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश है / क्या हम दुनियां को यह सन्देश देना चाहते है कि लोकतन्त्र एक भ्रष्ट शाशन व्यवस्था है और इसमे खमियां ही खामियां है और इन खामियों को दूर करने का कोई रास्ता ही नहीं है ?

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