बाबा रामदेव जी को अब क्या करना होगा ?

मै बाबा राम देव जी का बहुत सम्मान करता हू / जब वे योग शिक्षा छोड कर राजनीति में उतरने का प्रयास कर रहे थे, मै उसी समय उनको इस ब्लाग के माध्यम से कुछ सलाह देने वाला था / लेकिन मुझे समय नहीं मिला और मै जो उनको बतौर सलाह देना चाहता था , वह नही कर सका /

मै भूतकाल में क्या हुआ, अब इसके बारे मे छोड़्कर , बाबा के लिये कुछ कहना चाहता हूं /

१- बाबा अब आपके लिये सबसे अच्छा होगा कि आप सन्तुलित मष्तिष्क के साथ जो भी कहें, उसके दूरगामी परिणामों के बारे में आन्कलन करके ही इस देश की जनता के बीच अपने विचार रखें / जो भी कहें उसका कुछ तर्क हो और वह सकारात्मक भी हो / निगेटिव सन्देश से बचें /

२- टकराव की राजनीति न करें / आपको राजनीति से क्या लेना देना ? आप स्वामी विवेकानन्द जी को ले / उनके जीवन को देखें , उनके कार्यों को देखे ? विचार करिये कि क्या यह सब उन्होने किसी राज्नीतिक दल के साथ मिलकर किया ?

३- आपके साथ और आपके समर्थकों के साथ जो भी हुआ, इससे देश के सभी भाग के लोग, नागरिक और देशवासी दुखी, क्षोभ और गुस्से से भरे हुये है / सबके अपने अपने भावनाओं के व्यक्त करने के अलग अलग तर्क है / सन्सार के सबसे बड़े लोकतन्त्र शाशन प्रणाली को अपनाने वाले देश होने के नाते इस तरह के सरकारी अत्याचार को जायज ठहराना किसी भी द्रष्टिकोण से सही नहीं है / अगर सरकार को यही सब करना है तो लोकतन्त्र का क्या मतलब ? यह तो डिक्टेटरशिप हो गयी / आपका जीवन कीमती है, अभी आपको बहुत कुछ करना है और हम सभी आपसे आशा करते है कि आप नागरिको के अधिकारों के लिये उन्हे जागृत करने का प्रयास करेन्गे /

४- आपने “अनशन” करके अपना विरोध व्यक्त कर दिया / विरोध करने के लिये इतना काफी है / अब आप अपना अनशन खत्म करिये और आगे क्या करना है , इस पर विचार करिये /

५- अभी कुछ समय आत्म मन्थन करें /

६- आपके साथ जो भी हुआ है उसके लिये आपके पास अदालतों के दरवाजे खुले हुये है / मीडिया के पास जाइये / ह्यूमेन राइट्स के ्पास जाइये / इस देश के राष्ट्रपति के सामने अपनी बात कहिये /

७- अपने समर्थकों की सन्ख्या हर राज्य में बढाने का प्रयास करें / इसके लिये आप छोटे से छोटे गांव तक जाने का प्रयास करें / आप अपनी इस बनायी हुयी जन शक्ति पर भरोसा करिये / यह जन शक्ति ऐसी हो जो किसी भी चुनाव क्षेत्र में हो रहे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सके /

८- आप अपने को खुद राज्नीति से अलग रखें / आप खुद “किन्ग” न बने बल्कि “किन्ग मेकर” बने

आखिर में मै यही आपसे अपील करून्गा कि अनशन छोड़्कर दुबारा स्वस्थ्य मन और स्वस्थय तन के साथ तरोताजा होकर अगली नीति पर
विचार करें /

भारत का इतिहास बताता है कि राजा की सत्ता हमेशा अपना महल छोड़्कर साधू की झोपड़ी में मथ्था टेकने के लिये गयी है /

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