“सर्वोदय जगत” पाक्षिक पत्रिका में श्री अन्ना हजारे के चिन्तन और मनन के लिये प्रकाशित एक पत्र

मै किशन गिरि महाराज के विचारों से बिल्कुल सहमत हूं / उन्होने तो भ्रष्टाचार के लिये ९०% नब्बे प्रतिशत का आंकड़ा दिया है , लेकिन यह बहुत कम है / मेरा मानना है कि इस देश की जनता ९९.९९ % प्रतिशत “मनस:, वाचा, कर्मणा” भ्रष्ट है और भ्रष्टाचार में लिप्त है या भ्रष्टाचार के कामों को बढाने के लिये अपना अमूल्य योगदान दे रही है /
– चाणक्य पन्डित

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