महीना: फ़रवरी 2012

“कुकिन्ग गैस सब्सीडी” फौरन हटाकर खुले बजार में रसोई गैस बेची जाय…..!

इस साल के बजट में मै वित्त मन्त्री से अनुरोध करून्गा कि रसोई गैस की सब्सीडी खत्म करके जितना वास्तविक मूल्य रसोई गैस का बनता हो, उतने में गैस सिलिन्डर को खुले बाज़ार मे बेचा जाना चाहिये /

हकीकत यह है कि रसोई गैस के सिलिन्डर, हर गैस एजेन्सी वाला, ७० प्रतिशत ब्लैक में बेचता है और केवल ३० प्रतिशत घरों में सप्लाई हो पाती है / ब्लैक में या कालाबाज़ार में गैस सिलिन्डर की कीमत गैस के मिलने या कम मिलने की सूरत में घटती बढती है / एक सिलिन्डर की कालाबाजारी में कीमत ६०० रुपये से लेकर १२०० रुपये तक है / लोग खुसी से पैसा देकर सिलिन्डर खरीद लेते है / देहात और ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरों से सिलिन्डर ६०० रुपये या ७०० रुपये में बहुत प्रसन्न्ता के साथ खरीदकर अपने गावों में शहरों से लाद्कर और अतिरिक्त १०० रुपये खर्च करके अपने गन्तव्य तक ले जाते हैं /

मै खुद कई बार गैस एजेन्सियों के चक्कर में सिलिन्डर लेकर मरामारा फिरता रहा और गैस गोदाम के कई कई चक्कर लगाने के बाद गैस लाने का खर्चा सिलिन्डर की कीमत के बराबर करना पड़ा / यानी ४०० रुपये की गैस और ४०० रुपये रिक्सा का लाने और लेजाने के लिये किया गया खर्चा, जो कुल मिलाकर ८०० रुपये हो जाता है / यह मेरा हाल नही है, कमी वेशी सभी उपभोक्ताओं का यही हाल और दुर्दशा है / सबसे बड़ी बात यह है कि पैसा तो खर्च होता ही है , सारा दिन गैस के जुगाड़ करने मे ही चला जाता है, इससे आमदनी की आमद भी बाधित होती है /

इस कम्प्य़ूटर के युग में जब कि हर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसे माहौल में रसोई गैस का समय से न मिलने का व्यवधान मानसिक तनाव के पैदा होने के साथ साथ पारिवारिक क्लेश और रोजाना के कार्य कलापों को अव्यवस्थित करता है , इस कारण से लोग यही सोचते हैं कि थोड़ा ज्यादा ही सही गैस सरलता से और बिना किसी बाधा के मिले चाहे उसकी कितनी भी कीमत क्यों न हो ? ताकि जीवन शान्त मय और तनाव रहित हो , भले ही इसके लिये अतिरिक्त कीमत क्यों न चुकानी पडे़ /

मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह रसोई गैस की सब्सीडी हटाकर फौरी तौर पर खुले बाज़ार मे गैस सिलिन्डर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे और हर घर के लिये सबसे आवश्यक वस्तु को सरलता से और आवश्यकता के समय में या जरूरत के अनुसार तुरन्त मिल जाये ऐसी व्यवस्था का उपाय करे /

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