उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों पर मेरा त्वरित नजरिया

विधान सभा उत्तर प्रदेश २०१२ के चुनाव परिणामों से सभी का चकित होना स्वाभाविक है / मै इसके लिये निम्न कारणों को जिम्मेदार मानता हूं /

१- अन्य राज्यों यथा पन्जाब और उत्तराखन्ड और मनीपुर और गोवा के चुनाव के लिये चुनाव आयोग ने कही कहीं एक चरण में अथवा दो चरणों में चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न करा दी थी / उत्तर प्रदेश ही केवल ऐसा राज्य बचा , जहा चुनाव सात चरण मे हुये और इसे सम्पन्न कराने में लगभग तीन हफ्ते का समय लगा / नतीजा यह हुआ कि एक जगह के हुये मतदान का सुर्रा कि फलाना जीत रहा है, ऐसी हवा उड़ाने का मौका दूसरी जगहों के लिये बड़े आराम से मिल गया /

२- नेताओं की बयान बाजी जैसे दिग्विजय सिह का विच्छिप्तों जैसा अनर्गल प्रलाप, बेवजह के “राष्ट्रपति लागू कराने के बयान ” जैसी अनावश्यक जरूरत वाले बयान, प्रदेश की कराह रही जनता के मुद्दों से हटकर आपसी नूराकुश्ती, राहुल गान्धी का नौटन्की करते हुये सार्वजनिक मन्च से एक पार्टी के खिलाफ पर्चा फाड़्ना, यह सब जनता सुन और देख रही थी /

३- मीडिया द्वारा चौथे / पान्चवें चरण के मतदान के बाद शोशे फैला देना कि ” त्रिशन्कु विधान सभा ” बन रही है, बाद के चरणो पर होने वाले चुनाव के लिये जनता का किसी एक दल की तरफ झुकाव हो जाना
ताकि त्रिशन्कु की स्तिथि न आने पाये /

४- राष्ट्रपति शाशन से बचाने के लिये जनता का विचार करना और किसी एक दल को पूर्ण बहुमत देने की मन्शा को जाहिर करने के लिये द्ल विशेष के पक्ष मे न चाहते हुये भी मतदान करना

५- नये परिसीमन के कारण पुराने जिताऊ समीकरण बदल गये /

६- नये मतदाताओं का रूझान एक विशेष दल को चुनने के लिये इस कारण से हुआ , क्योंकि [१] इनके सत्ता में आने से उसे मुफ्त हजारों रुपये का लैप्टाप कम्प्यूटर मिलेगा [२] बेरोजगारी भत्ता मिलेगा, जैसा कि उनको इसी दल की पिछली सरकार में प्रति माह ५०० रुपये या १००० रुपये मिल रहा था, लेकिन मायावती की सरकार नें बन्द कर दिया था, इसलिये इस उम्मीद और लालच से नये नवयुवक मतदाताओं नें मुलायम सिह को चुना /

ऐसा शायद दूसरे राजनीतिक दल न कर पाते /

७- मतदाताओं का यह मानना कि मुलायम जो कहते है , वह करते भी है और यह सही भी है जैसा कि मैने उनके शाशन काल में देखा और समझा है / यह विश्वास मतदाताओं को देने में मुलायम सिह कामयाब रहे / अन्य राजनीतिक दल इसी कारण से फेल हो गये /

एक बात और , जो सबसे महत्व पूर्ण है और वह यह कि , अगर यह चुनाव तीन चरणों मे सम्पन्न हो जाते तो शायद उत्तर प्रदेश का राज नीतिक नक्शा कुछ और होता /

हलांकि अन्य कारण राजनीतिक दलों के अपने अपने नजरिये से अलग अलग हो सकते हैं , जिसे वे ही समझ सकते है /

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