देश के टूटने का खतरा ?? क्या हम शक्तिशाली सोवियत रूस की तरह टूट कर कहीं अलग अलग होने की तरफ तो नहीं जा रहे हैं ???????????

मुझे अभी अभी पता चला कि टीम अन्ना के साथ अन्ना हजारे जी भी आमरण अनशन पर बैठ गये हैं /

यह इस देश के लिये बहुत दुखदायी और निराशा जनक स्तिथि है / परिस्तिथियां यहां तक फिर आ पहुची जैसे एक साल के तकरीबन पहले थी / जस का तस , परिस्तिथियों मे कोई परिवर्तन नही / यह देश की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़ा करता है / ऐसा लगता है देश की पूरी शाशन व्यवस्था पर लकवा मार गया है /

याद करिये सन्सद के अन्दर होने वाली लोक पाल विधेयक पर बहस का / किस तरह देश के चुने हुये सान्सद और नेता हुन्कारें भरते हुये और देश की जनता को चुनौती देते हुये इस बात का आभास करा रहे थे और जिससे यही ध्वनित होता था कि ” हम भ्रष्टाचार को नही खत्म करेन्गे और इसे खत्म करने के लिये किये जाने वाले सभी प्रयासों को नेस्तनाबूद कर देन्गे / हम उन तत्वों को भी कुचल कर रख देन्गे जो भ्रष्टाचार को देश से खत्म करने की बात करेन्गे /”

जिस देश के नेता देश की सबसे बड़ी पन्चायत में यह बयान दे रहे हों, हुन्कारें भर रहे हों , देश की जनता को चुनौतियां दे रहे हों , ऐसी स्तिथि और समय में सबको सचेत हो जाना चाहिये था / लेकिन देश की जनता सोती रही और नौबत फिर जस की तस पैदा हो गयी /

मेरे विचार से अन्ना हजारे को किसी नये राज्नीतिक दल या राज्नीतिक सन्गठन को बनाने की आवश्यकता नही है /जो ऐसा कह रहे है और सलाह दे रहे है, यही तो सरकार और उसका नेतृत्व चाहता है कि अन्ना ऐसी गलती करें और उनका काम आसान हो जाये / यह सरकार कार्पोरेट घराने चला रहे है / सभी जानते है कौन किसके हाथ बिका हुआ है / सभी के हाथ भ्र्ष्टाचार से सन्रे हुये है / कोई भी ईमान्दार नेता आज की तारीख मे नही नजर आता, चाहे वह मन्मोहन सिन्घ खुद क्यों न हों, उन्होने भी कभी न कभी किसी न किसी के साथ भ्रष्टाचार जरूर किया होगा या भ्रष्टाचार के बराबर का समझौता किया होगा /

मेरा मानना है कि अन्ना शायद गान्धी वादी परम्परा के अन्तिम नेता साबित होन्गे / मै दूर दूर तक नजर दौड़ाता हूं तो मुझे आज की तारीख में कोई भी नेता नजर नही आता जो गान्धी वादि हो और गान्धी के उसूलों पर चलने वाले हों / खुद कान्ग्रेस के अन्दर कोई भी गान्धी के दर्शन वाला बचा हो , ऐसा मुझे कोई नही दीखता / गान्धी कानग्रेस के लिये भी अछूत हो गये हैं / उनको फायदे के लिये या बोट बैन्क के लिये सभी नाम लेते है / स्पष्ट है कि गान्धी जी की विचार धारा इस देश के लिये फेल साबित हुयी है /

देश की जनता भी बटी हुयी है / जिनको बात करने की तमीज नही है , वे अन्ना को गन्ना बेचने की सलाह दे रहे है और उनको विदेशी एजेन्ट बता रहे है / ऐसी ऐसी बातें अन्ना के बारे मे लोग कहते है जैसे वे सब उनके बहुत करीबी हो और उनकी सार बाते तक उनको पता हों /ऐसे बेवकूफो के बल पर क्या इतना गम्भीर आन्दोलन चलाने की जहमत उठायी जा सकती है /

जिस देश की down troden society जो कान्ग्रेस का बोट बैन्क हो और जिसको राजनीति की तमीज तक न हो, उसके बल पर ऐसे गम्भीर अन्दोलन नही चलाये जा सकते है / कान्ग्रेस के नेता श्री मोतीलाल जी नेहरू ने इसी लिये महात्मा गान्धी को चुना कि इन्को लन्गोटी पहनाकर उस स्तर तक पहुचा जा सकता है जहां इससे पहले कान्ग्रेस का कोई नेता नही पहुचा था और न पैठ बना सका था / लन्गोटी लगाकर गान्धी जी कान्ग्रेस को झोपड़ी तक ले गये /अन्ना यह सब नही कर पायेन्गे और न अन्ना वोट बैन्क की राज्नीति से पूरी तरह से वाकिफ हैं /

मै इस पक्ष में कतई नही हूं कि अन्ना कोई राजनीतिक दल बनाये / इसमें नुकसान ज्यादा है और फायदा बिल्कुल नही / बेहतर होगा अन्ना अभी कुछ दिन विश्राम करें , अपने स्वास्थय को देखें / देश की जनता मर रही है उसे मरने दें और उसकी कतई फिक्र न करें / इस देश की जनता ही इस काबिल है कि इसे जितना ही अधिक प्रताड़ित करो , इसे जितना ही अधिक  निचोड़ॊ , इसे जितना ही अधिक दबाओ, यह उस प्रताड़ित करने वाले , उस जुल्म करने वाले, उस निचोड़ने वाले को अपना आका समझेगी और आका समझती ही है  और उसकी पूजा करती है और बहुत  खुश होती है / ऐसी सोच वाली जनता के लिये आप कुछ नही कर सकते, / अगर यह अपने करमों और अक्रम्ण्यता से मर रही है तो इसे मरने दीजिये, इसमें जान पूकने की कोशिश न कीजिये/ इसे कोई लूट रहा है तो  लूटने दीजिये / देश की जनता इसी काबिल है /

रही बात भ्रष्टाचार दूर होने या न होने की / जब देश की जनता इस मुद्दे पर बटी हुयी है, सबके अपने अपने तर्क हैं और कुतर्क भी हैं / इसके पीछे जनता की यह मानसिकता काम कर रही है कि भ्रष्टाचार दूर हो जायेगा तो हमे अपनी सात पुश्तों तक के लिये पैसा इकठ्ठा करने को कैसे मिलेगा / इस देश की जनता मृग मरीचिका में जीने के लिये बहुत विश्वास करती है / जिस देश के लोग घूस देकर नौकरी पा रहे हों , जिस देश के लोग नौकरी पाने के लिये हर तरह के भ्रष्ठ तरीके अपनाने में बिल्कुल हिचक न करें, जिस देश की जनता का यह नारा हो कि ” अपना काम बनता  और भाड़ में जाये जनता”  और अपने काम के लिये सभी तरह के  भ्रष्ठ तौर  तरीके अपनाने में लेश मात्र भी हिचक न हो, घूस लेने और देने में विश्वास करती हो कि किसी तरह उसका काम हो जाय , उस देश की जनता के लिये लिये कोई कुछ नही कर सकता है / जिस देश के सरकारी कर्मचारी सुबह सोकर उठते समय आन्ख खुलते ही यह सो्चे और विचार करें और तय कर ले कि आज कार्यालय जाकर वापस होते समय कितनी घूस की रकम जेब में भरकर और उसे लेकर घर आना है ,  उस देश के लिये चाहे दुबारा गान्धी जी  ही क्यों न जन्म लेकर यहां आ जायें , वह भी कुछ नहीं कर पायेन्गे/ अब तो लोग यह भी कहने से नही हिचकते कि गान्धी को कान्ग्रेसियों ने ही मरबा डाला /

दो दिन पहले मुझे कान्ग्रेस के एक कार्य्कर्ता मिले जो रामा देवी , कानपुर में रहते है , उन्होने अपना नाम दयाशन्कर गुप्ता बताया था, उनके साथी से पूछताछ करने के बाद पता चला कि वे पत्रकार के साथ साथ प्रेस प्रिन्टिन्ग  का काम करते है, इन्के खन्दान के लोग बहुत कट्टर कान्ग्रेसी है , इन्का मोबाइल नम्बर ९७९४२२०३६९  है / अब इनका विचार भी समझ लीजिये / ” चुनी हुयी सरकार को सरकार न मानना, ऐसे शख्स अन्ना हजारे को पुलिस भेज कर अच्छी तरह से लठिया देना चाहिये था/  और उनके साथ अनशन करने वालों को गोली मार देनी चाहिये थी ” /

कान्ग्रेस के सभी कार्यकर्ता बहुत खुश हैं कि अन्ना का अन्दोलन “फ्लाप” साबित हुआ/

इसमें खुश होने की बात कोई नही है / आने वाले दिन इस देश की जनता पर भारी होन्गे / इस देश की जन्ता को अपनी अकरमण्यता के लिये बहुत बुरे दिन भोगने होन्गे / प्रजातन्त्र फेल होने की तरफ जा रहा है / लोगों में निराशा व्याप्त है और इसीलिये वे चुनाव में वॊट देने से अब कतराने लगे है , यह सोच कर कि वोट देने से कोई फायदा नही है / जब सारा काम घूस देकर ही कराना है तो फिर कोई भी सरकार आवे , उससे उनका क्या मतलब ? जब जनता की भागीदारी ही नही है और ऊपर बैठे सभी नेता अपने मन का कर रहे है तो चुनावों में वोट देने या न देने से क्या फर्क होगा ? मौजूदा परिस्तिथियों में ऐसा लगता है कि कोई भी बदलाव दूर दूर पचासों साल तक नही होना है  / यह अकर्मण्यता और राजनीतिक दलों की जनता के साथ की जा रही बरगलाने की चेष्टा और बेइमानी और धोखा धड़ी अन्तत: इस देश को ले डूबेगी /

असम, नागालैन्ड, अरुणाचल, कश्मीर, त्रिपुरा और अन्य देश के कई क्षेत्र अपने को इस देश से अलग मान रहे, वे भारतीय कहलाना पसन्द नही करते / तेलन्गाना, खालिस्तान आदि आन्दोलनों का भूत अभी भी जिन्दा है / ब्लैक मेल की राजनीति देश पर हाबी है / सरकार इन समस्याओं को हल करना तो दूर, उसे क्सी चिमटी से भी छूना पसन्द नही करती / यह अकर्मण्यता की हद हो गयी /  महाराष्ट्र का मन्त्री मध्य प्रदेश के खदानों की सम्पदा लूट रहा है /  तमिलनाडु का मन्त्री सारे देश का धन लूट रहा है और खा रहा है , ऐसे में क्या मध्य प्रदेश का जन मानस यह नही सोच सकता कि “बाहर का व्यक्ति हमे और हमारी सम्पदा लूट रहा है ” /

देश टूटने की कगार पर चल ने की दिशा में है / मुझे लगता है कि कहीं देश शक्ति शाली सोवियत सन्घ की तरह टूट कर कहीं अलग अलग राष्ट्रों में न तब्दील हो जाये / क्योन्कि परिस्तिथियां ठीक उसी तरह की बन रही है जैसे किसी समय सोवियत सन्घ में टूतने से पहले बनी थीं /

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