वही दल केन्द्र में सत्ता में आयेगा , जो अन्ना के लोकपाल बिल को जस का तस अपने चुनावी घॊषणा पत्र में घोषित करके जल्दी से जल्दी लागू कराने की घॊषणा करेगा ………!!!!!!

चुनाव अभी आये तो नही हैं , लेकिन उसकी आने की सुग्बुगाहट शुरू हो चुकी है / देश के दो बड़े दल कान्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा वाम पन्थी और तीसरे मोर्चे के तथाकथित मुलायम सिन्घ अपनी अपनी शतरन्ज की बिसाते बिछाये बैठे है और इस बात का इन्तजार कर रहे है कि कैसे और कब शह और मात का खेल  खेला  जाय ? उधर वाम दल  तीसरे मोर्चे के  विचार को सिरे से ही खारिज करते चले आ रहे हैं /

पहले तीसरे मोर्चे की सम्भावनाओं को आन्कते हैं / राज्नीति में आगे बढने के लिये एक सूत्र है यह भी है कि भले ही आप बेईमानों के बादशाह हों , आप कितने भी लम्पट, लुच्चे , लै मार और लफनगे हों, आप अपने को ईमान्दार बताइये और दूसरे को दुनिया का सबसे बड़ा भ्रष्ठ  व्यक्तित्व / जैसे कि मुलायम सिन्घ का यह विचार करना कि वे प्रधान पद के लिये सबसे उपयुक्त और ईमान्दार और सबसे बेहतर उम्मीदवार हो सकते हैं /

इल्जाम थोपने और इल्जाम लगाने, एक दल का दूसरे दल के नताओं और उनके कारनामों  का लेखा जोखा बदनाम करने की नीयत से सामने लाये जा रहे हैं / नेता जानते है कि अगर इस चिड़िया को हुसकाया जायेगा तो यह चिड़िया कहां कहां तक उड़ान भरेगी / मधु मख्खियों के छत्ते  में कन्कड़ फेकने का काम मुलायम सिन्घ की तरफ से शुरू हो गया है / भाजपा तो पहले ही कमर कस कर कानग्रेस  और दूसरे सहयोगी दलों की छीछालेदर पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है / कानग्रेस की हालात  बहुत खराब है / बहुजन समाज को कोई पूछने वाला नही है क्योंकि इनका वर्चस्व केवल DS4  वालों के बीच में है / समाज वादी पार्टी का तीसरे मोर्चे का सपना कभी सव नही होगा , क्योंकि सब जानते हैं कि अगर  मुलायम सिन्घ प्रधान मन्त्री बन गये तो जाति आधारित , धर्म आधारित राज्नीति का जहर सार हिन्दुस्तान में किस तरह फैल जायेगा और कानून व्यवस्था और केन्दईय शाशन व्यव्स्था का क्या हाल होगा ?

मौजूदा राज्नीतिक हालात इस देश के वर्तमान शाशकों के लिये ठीक नही हैं / महगायी से और इस देश की अर्थ व्यवस्था को लकवा लग गया है / देश का हर जागरुक नागरिक वर्तमान राज्नीतिक नेत्रूत्व से निराश है / केन्द्र सरकार का भ्रष्टाचार दूर करने का कोई इरादा नही है , लगभग सभी नेता इस देश की महान जन्ता को यह आभास करा रहे हैं , खिल्ली उड़ा रहे है जैसे यह सन्देश दे रहे हों कि “हम तो फिर सत्ता में लौट आयेन्गे, क्योंकि हमारे अलावा आपके पास कोई विकल्प्नही है , आप वोट दें या न दें कोई फर्क नही पड़ता , झितेन्गे हम और हम ही राज फिर करेन्गे” /

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के पास फिर से केन्द्र में सरकार बनाने का मौका मिल सकता है / कैसे ? देश की जन्ता भ्रष्टाचार से परेशान है / महगायी से परेशान है / आपाधापी से परेशान है /

इस देश की जन्ता ने यह भी देखा है कि “भ्रष्टाचार” के दूर करने के लिये भारतीय जन्ता पार्ती की उत्तराखन्ड प्रदेश की सरकार नें अन्ना हजारे का “जन लोक्पाल बिल” जस का तस पास करके अपने प्रदेश में लागू किया / यह बी०जे०पी० के लिये क्रेडिट की बात है / अगर भारतीय जनता पार्टी २०१४ के चुनावी घोषणा पत्र  या अपने election manifesto  में यह बात कहकर जनता के बीच उतरती है , तो मेरा यह मनना है कि इसका क्रेडि्ट उसे अवश्य मिलेगा / इसका कारण यह है कि भले ही भारतीय जनता पार्टी ने सन्सद में अपने सह्योगी दलों के दबाव में आकर अन्ना हजारे के जन लोक पाल बिल का पूर पूर समर्थन न कर पायी हो लेकिन अगर वह अपने ब्ल बूते पर अकेले ही इतनी सीटॆं ला सकने की स्तिथि में हो कि अगर उसका कोई विरोध भी करे तो बहुत कम हो / इस तरह से अगर बी०जे०पी० करती है तो उसे जनता का समर्थन अवश्य मिलेगा /  कान्ग्रेस की सरकार को सहयोग दे रहे दलों की स्तिथि बहुत खराब होगी क्योंकि ये भी उतने हॊ पाप के दोषी ह्गैं जितना कि कान्ग्रेस पार्ती की सरकार / पान्च साल गुल्छर्रे उड़ाने के बाद और वी०आई०पी० जैसी मौज मारने के बाद जनता इनकी हवा निकालने में कोई कोर कसर नही छोड़ेगी ,ऐसा मेरा मनना है /

इस देश के लोगों नें अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार का कार्य काल देखा है / गेहूं उस समय पान्च रुपये से लेकर अधिकतम पिसा हुआ सात रुपये किलो था / रसोई गैस आलू प्याज की तरह से बिकने की स्तिथि में रही / दामॊ में नियन्त्रण इतना कि शक्कर के भाव तीन चार रुपये कम कर दिये गये और शक्कर सस्ती बिक रही थी / यह शायद इस देश की जन्ता को नही सुहाया / अब आज जब सभी महगायी से पिस रहे हैं तो सब्को अटल जी की सरकार याद आ रही है /   

इस देश की जनता के लिये सरदार मन्मोहन सिह जैसे प्रधान मन्त्री की ही जरूरत है, अब सब उनका गुण गान कर रहे हैं / चाहे गांव का आदमी हो या शहर का सब्के सब कान्ग्रेस का ही गुण बखान  कर रहे हैं / आज अगर इलेक्सन होते है तो मेरा मानना है कि कान्ग्रेस फिर से सत्ता मे आ जायेगी / क्योंकि इस देश की जनता की यह धारणा बन गयी है कि ” अगर कान्ग्रेस पार्टी के अलावा कोई दूसरी पार्टी केन्द्र की सत्ता में आती है तो उनकी स्तिथि भूखे शेर की तरह से होगी जो आते ही आते इस देश की बची खुची सम्पत्ति खा जायेन्गे, बन्दर बाट कर लेन्गे, एक एक पाई पी जायेन्गे / इससे अच्चा है कि कान्ग्रेस खा पी करके अपना पेट भर रही है और इन्के भरे पेट के कारण यह थोड़ा कम लूटेन्गे, इसलिये बेहतर है इनको ही जिता दो और फिर से सत्ता पर बैठा दो /”

लेकिन इसके ठीक उलट एक शर्त यह भी  है कि जो राजनीतिक दल अन्ना के जन लोक पाल बिल का जस का तस लागू करवायेगा , वह भी सत्ता में आ जायेगा क्योंकि देश की जनता को अगर यह विकल्प मिलता है तो वह चाहती भी है कि इस देश से भ्रष्टाचार दूर हो और इसके लिये वह कान्ग्रेस को बुरी तरह से पराजित करने से भी नही चूकेगी /

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