महीना: दिसम्बर 2012

भारत देश का कोई भी नगरिक इस देश के छोटे से लेकर छोटे कानून और बडे से लेकर बहुत बड़े “कानून” से कतई नही डरता

देश के बनाये गये सभी कानून इस देश की जनता को कुछ भी प्रभावित नही करते / अगर कोई यह समझता है कि देश की जनता कानून के शाशन के बल पर चल रही है तो यह सब लोग यह भूल जायें और इस मुगालते में न रहें कि इस देश की जनता को कोई कानून या वयवस्था चला रही है /

मुझे बहुत मानसिक पीड़ा हुयी है जब नई दिल्ली में सरकार की नाक के नीचे एक फीजियोथेरपिस्ट लड़की के साथ बलातकार जैसा कृत्य किया जाता है और वह भी उसके पुरुष मित्र के सामने / दो घटे तक यह सब एक बस के अन्दर दिल्ली की सड़्कों पर केन्द्र सरकार की नाक के नीचे होता रहा / कितने शर्म की बात है ?

याद करिये, नई दिल्ली में ही,  कुछ साल पहले एक विदेशी दूतावास मे कार्य करने वाली महिला राजनयिक का बलात्कार एक कार में दो युवकों ने किया था / बाद मे बलात्कारियों ने इसी तरह से महिला राजनयिक को कार से धकेल दिया था / इस राजनयिक को उसके देश में दो चार दिन बाद वापस भेज दिया गया था / यह मामला सब भूल चुके है क्योंकि इस देश की जन्ता को भूलने कि बहुत बड़ी आदत है /

हमारे देश की न्याय व्यवस्था भले ही विश्व की सबसे अच्छी न्याय वयवस्था में शुमार किया जाता हो, लेकिन अमली और जमीनी हकीकत में जमीन आसमान का फर्क है / इस देश का कोई भी नागरिक देश के कानून से कतई नही डरता / वह यह अच्छी तरह से समझता है कि जड़्मूल से ही यह न स्वीकार करों कि उसने जुर्म किया है / पकडे भी गये तो वह उस समय कहीं और थे / लखनऊ के एक छात्र लड़्के ने एक एक दूसरे छात्र लड़्के का कत्ल कर दिया / प्रत्यक्ष दर्शियों नें उस लड़्के को दूसरे लड़के को देशी कट्टे से गोली मारते हुये देखा और भागते हुये उसका पीछा भी किया / उसके बारे में जितनी भी जानकारी होनी चाहिये थी  उसके बारे में पुलिस को मुहैया करायी / पुलिस भी उसे गिरफ्तार करने के लिये अपनी मुहिम चलाने लगी / मगर सब दांव समाप्त हो गये / हुआ यह कि लड़्के के बाप लखनऊ रेलवे स्टेशन पर मुलाजिम थे / उनको जैसे ही यह पता चला कि उनके लड़्के ने गोली मार कर हत्या कर दी है , आनन फानन में उन्होने अपने लड़्के को एक दिन पहले ही प्रतापगढ रेल्वे स्टेशन पर जुगाड़ करके बिना टिकट रेलवे यात्रा करने के जुर्म में गिरफ्तार करके जेल भिजवा दिया / सब भौचक्के रह गये / कहने का मतलब यह कि अब सब यह यकीन करत्ये हैं कि जब उनसे जुर्म ही नही हुआ तो कानून का दखल किस बात का ?

मै अपने अनुभव से कह सकता हू कि दिल्ली दामिनी गैन्ग रेप के सभी अभियुक्त अदालत से चूट जायेन्गे या बहुत मामूली सजा होगी/ कैसे ?

१- छह अपराधियों में से  ्दो नाबालिग है, इनको कोई कठोर सजा मिलने से रही, इनका मामला जूवेनाइल कोर्ट में चलेगा, सजा के तौर पर यह दोनों सुधार गृह भेज दिये जायेन्गे /
२- बाकी बचे चार में से एक ड्राइवर अदालत में कोई कहानी बतायेगा कि जैसे कि वह तो बस चला रहा था और उसका ध्यान सामने सड़क पर था, मेरे पीछे कोई देशी कट्टा या चाकू लेकर खड़ा था , जो उसको धमका रहा था, उसने धमकाने वाले का चेहरा नही देखा क्यों कि उसने पीचे मुड़कर न देखने की धमकी दी थी /वह तो बस चला रहा था और वह कहीं एक्सीडेन्ट न हो जाये उसको बचाने का प्रयास कररहा था और उसका सारा ध्यान तो सड़्क पर था / बस के अन्दर क्या हो रहा था , यह तो सामान्य बात है क्यों कि नी उमर के लड़्के हल्ला गुल्ला गुल गपाड़ा तो मचाया ही करते हैं / उसको तो पता ही नही चला कि बस के अन्दर क्या हो रहा है , जब उसने देखा ही नही तो वह क्या बताये कि बस के अन्दर रेप हुआ भी है या नही / कुछ इसी तरह के बयान अदालत मे दर्ज कराये जायेन्गे /

४- कोई कहेगा मै इसमें शामिल नही हूं , मै तो बस में सफर कर रहा था, मै तो वारदात से पहले ही फलाने बस स्टाप पर उतर गया था / मुझको पता नही कि उसके बाद क्या हुआ ? क्या घटना घटी ? ये दामिनी और उसके ब्याव फ्रेड क्या है , न तो इनको मै जानता हूं और न इनको मैने कभी जिन्दगी मे देखा है / मुझको बिला बजह फसाया जा रहा है / कोई कहेगा कि यह आपास में मिले हुये है और मुझको ये सब मिल्कर फसा रहे है / बलातकार तो हममें से किसी ने भी नही किया / उसके देओस्त ने जब बलात्कार करने की कोशिश की तो वही सब आपस में दोनों यानी दामिनी और उसका ब्याव फ्रिन्ड चलती बस से उतर कर कहीं चले गये / हमने कोई बलात्कार नही किया / हो सकता है जब ये बस से उतरे हों तो किसी दूसरे के हत्थे चढ गये हों और उन्होने बलात्कार कर दिया हो /

कहने का मतलब यह कि पुलिस के सामने उन्होने जो भी जुर्म कबूल किया वह इसलिये क्यों कि पुलिस उसके घर वालों को और उसको परेशान कर रही थी कि अपना जुर्म कबूल कर लो, इसलिये हमने डर के मारे और दबाव में आकर अपना जुर्म कबूल कर लिया / अब अदालत मे हम स्वतन्त्र है, कोई दबाव नही है इसलिये अदालत को सही सही बयान और ईमान्दारी से बयान दर्ज करा रहे है क्योंकि उनको अदालत पर भरोसा है /

मुझे नही लगता कि दामिनी जिन्दा बचेगी / जब मुख्य साक्ष्य ही नही बचा तो मुकदमा बहुत कमजोर हो जाता है / अगर बच भी गयी तो उसकी एवीडेन्स का या बयान का कोई भरोसा नही किया जायेगा क्योंकि विरोधी पक्ष के वकील उसको गलत साबित करके रहेन्गे / दामिनी का साथी का ब्यान भी भरोसे लायक नही समझा जायेगा और यह भी बहुत लचर साबित होगा / इसलिये कोई यह समझे कि इस मुकदमे में कोई revolutionary  बात निकल कर सामने आयेगी, ऐसा मै नही समझता /

कुल मिलाकर मेरा तो यही मानना है कि देश का कानून बहुत कमजोर है , भले ही हम उसे शक्तिशाली कहें / जब १०० बलात्कार के केसेस में २० लोगों को भी सजा बमुश्किल मिल पाती हो, ऐसे कानून को क्या शक्ति शाली कहा जायेगा ? जब एक एक मुकदमे का फैसला २० साल से लेकर २५ साल तक होगा और उसके बाद भी मुकदमा चलने की गुन्जाइश बनी रहेगी तो क्या खाक देश की कानून व्यवस्था में सुधार होगा ?

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गुजरात में भारतीय जनता पार्टी फिर सत्ता में दो तिहाई बहुमत लेकर वापस आयेगी

गुजरात के मुख्य मन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी अगली बार फिर भारतीय जनता पार्टी को दो तिहाई बहुमत से जिता कर सरकार बनाने की स्तिथि में हैं / मैने पिछली बार भी कहा था कि मोदी जी दो तिहाई बहुमत लेकर सत्ता में आयेन्गे / इस बार भी वही दोहरा रहा हूं कि मोदी जी इस बार भी सता में दो तिहाई बहुमत लेकर आयेन्गे / यह बिलकुल तय है /

वास्तविकता यह है कि जितना भी विरोधी प्रचार कान्ग्रेस और दूसरे स्थानीय दलों द्वारा मोदी के खिलाफ किया जा रहा है और उनके ऊपर जितने भी राजनीतिक वाक्प्रहार किये जा रहे है , उनका उलटा असर प्रदेश की जन्ता पर पड़ रहा है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि नरेन्द्र मोदी ने गुजरात राज्य को इस देश का सबसे बड़ा और अग्रनी धनाड्य राज्य बना दिया है / इस देश के सभी राज्य अकेले गुजरात राज्य के विकास के आगे नतमस्तक हो गये हैं / यह बात इस राज्य के सभी नागरिक बखूबी समझते हैं /

इस राज्य के अधिकान्श मुसलमान मोदी के प्रशन्शक हैं / मुसलमान अब गुजरात राज्य में अपने योग दान की कीमत समझने लगा है / यहां का गुजराती मुसलमान अपने दूसरे राज्यों के लोगों को सन्देश देता है कि ” विकास अपने आप का करिये और व्यापार करिये, पैसा कमाइये, लड़ने झगड़ने से पिछड़ जाने के अलावा और कुछ भी नही हासिल होगा” /

कानग्रेस की वोट बैन्क की राजनीति को यहां के अधिकान्श मुसलमान पसन्द नही कर रहे हैं / जाहिर है कि गुजरात के सर्वान्गीण विकास का फायदा अल्प सन्ख्यक भी बड़े मजे से उठा रहे हैं /

गुजरात का जन मानस समझ चुका है कि विकास का “टेम्पो” नरेन्द्र मोदी की अगुयायी में ही बना रह सकता है , इसलिये प्रदेश की जनता अगला मुख्य मन्त्री नरेन्द्र भाई मोदी जी को ही चाहती है /

कान्ग्रेस और दूसरे दलों के द्वारा किये जा रहे प्रचार का उल्टा असर हो रहा है / लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि केशू भाई पटेल और शन्कर सिन्घ बाघेला इस राज्य के नेता हैं, उन्होने ने क्यो नही गुजरात को इतना अग्रणी बनाने की कोशिश की, जबकि वे कई सालों तक इस राज्य में एक छत्र राज्य करते रहे ?

अब जब गुजरात राज्य अपने सर्व प्रिय नेता नरेन्द्र मोदी की अगुआई में ईमानदारी के साथ श्रेष्ठ से अति-श्रेष्ठ की ओर अग्रसर है, तो इस राज्य की जनता के सामने राज्य के विकास के लिये सिवाय नरेन्द्र मोदी के दूसरा कोई विकल्प नहीं है /

जीत मोदी की ही होगी, वह भी दो तिहाई बहुमत के आन्कड़े के साथ  /