“आप AAP यानी आम आदमी पार्टी ” के लिये खास सन्देश ; जोड़ तोड़ कर सरकार मत बनाइये , दुबारा चुनाव हो या तिबारा चुनाव हो या चौबारा चुनाव हो इससे मत घबराइये ; जीत आपकी ही होगी ; देश के लोगों की आपकी पार्टी को भरपूर जन समर्थन मिल रहा है, इस देश के बहु सन्ख्यक और देश का करोड़ों मुसलमान आपकी पार्टी और इसकी नीतियों और कार्य करने की शैली पर फिदा है / आप न समर्थन लीजिये और न किसी को दीजिये / कान्ग्रेस के नेताओं और बी०जे०पी० के नेताओ के चक्कर में मत पडिये / एक दिन इस देश मे आपकी सरकार बनेगी, इस उम्मीद में इस देश की जनता का मूड PUBLIC MOOD बन चुका है / जितना ही आप पर विरोधी दल के नेता छीटा कशी, व्यन्ग्य, तन्ज और तफरियां लेन्गे, उतने ही आप मजबूत और ताकतवर होन्गे / ईमान्दारी न छोड़िये, अपने लक्ष्य पर ध्यान दीजिये / देश के लोग आपके ऊपर बहुत दृढ विश्वास के साथ उम्मीदे लगाये बैठे हैं / देश की जनता के इस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करें /

किरण बेदी और अनुपम खेर और बाबा राम देव जिस तरह से आप पार्टी के नेताओं को अपनी कीमती सलाह देकर उनको जोड़ तोड़ करके ्दिल्ली की सरकार बनाने के लिये कह रहे है, इन तीनो लोगों को राजनीतिक और कूटनीतिक ग्यान बिलकुल नही है / इसीलिये ये तीनो इस तरह की बेवकूफी की बात कर रहे है / ये भले ही अपने अपने क्षेत्र के माहिर और एक्सपर्ट हों , लेकिन इन्हे राजनीति के महीन दांव पेन्च बिल्कुल नही मालूम है /

कहा गया है कि “POLITICS IS A GAME OF SCOUNDRELS ” यानी “राजनीति धूर्तॊ और मक्कारों का खेल है ” / किरण बेदी न तो धूर्त है और न मक्कार , अनुपम खेर एक कलाकर है और बाबा राम देव आयुर्वेद और योग के शिक्षक, इन्हे भी न तो मक्कार कह सकते है और न धूर्त / धूर्त क्या और कैसे होते है या धूर्तता क्या होती है , यह सभी जानते होन्गे / मक्कार लोग कैसे होते है और मक्कारी क्या चीज है , यह भी सभी जानते और समझते हैं ? अगर नही समझे है तो बिहार के नेता आदर्णीय़ लालू प्रसाद यादव अथवा आदर्नीय मुलायम सिन्ह जी यादव अथवा बहन मायावती अथवा प्रधान मन्त्री मन मोहन सिन्घ की कार्य प्रणाली को समझ लीजिये /

एक जुमला यह भी कहा गया है कि EVERY THING IS RIGHT AND JUSTIFIED IN LOVE AND WAR यानी प्रेम मोहब्बत और युध्ध मे सभी कुछ जायज है / इसीलिये राज्नीति और कूटनीति में नेता और राज्नीतिक दल जन्ता के सामने नूरा-कुश्ती आपस मे किया करते है और पीठ पीछे यानी backdoor  में एक दूसरे की गल बहियां डाले हुये ईद और होली की तरह गले मिलते है /

राज्नीति का एक और बढिया सिध्धान्त है कि जिस सीढी से चढकर आप आगे बढ रहे है और मन्जिल तक जा पहुन्चे है , उस सीढी को गिराकर दूसरी सीढी पकडिये और उस दूसरी सीढी को थामकर तीसरी को पकडिये / यानी आप दूसरे को रौन्दते हुये , कुचलते हुये आगे बढिये, शोर होता है तो सुनिये नही, आन्ख खुली रखे मगर देखिये नही /आदर्णीय  नरेन्द्र मोदी जी से यह सबक सीख लीजिये, आदरणीय लाल कृष्ण आडवाड़ी जी बेहतर समझते होन्गे /

एक और फार्मूला कूटनीति का है और  महत्वपूर्ण भी, आप भले ही देश को लूट रहे हों , घोटाले पर घोटाले किये जा रहे हो, विदेशों मे अकूत पैसा जमा हो , खुद भी बहुत ऊन्चे दर्जे के लुच्चे और लफन्गे हों , आप खुद दूसरे नेता के लिये उसकी जड़े खोदे दे रहे हो और उसको जमीन सुन्घाने के लिये सारी ताकत लगाये दे रहे हो लेकिन अगर कोई आप्को यह सब कहे तो फौरन अपने  विरोधियों की सनसनी खेज और हैरत अन्गेज साजिश करार दीजिये और उलटे आप उन सब पर झूठ मूठ के सन्गीन इलजाम लगाते हुये  उनको  दुनिया के सबसे बड़ा बेईमान और उठाई गीर और दुनिया का सबसे भ्रष्ट आदमी , सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में डुबे हुये  लोग बताइये और अपने को निहायत ईमान दार  और एक भी पैसा लेने से परहेज और आपके लिये पैसा मैल जैसा है , ऐसा बताइये / मीडिया मे जाकर जोर जोर से शोर मचाते हुये , हाथ और पैर पटकते हुये, छाती का खम ठोन्कते हुये, गुस्से मे भरे हुये , ऐसा एक्टिन्ग करते हुये , साजिस करने वालो को उसकी औकात मे ला देने की धमकी दीजिये / कोयला मन्त्री आदरणीय श्री प्रकाश जी जायसवाल से सबक लीजिये /

एक अन्य फार्मूला है कि जब आप पर कोई इल्जाम लगाये और आपको उसको नीचा दिखाना हो तो उसकी तफरी लीजिये, व्यन्ग्य कीजिये, तन्ज कसिये, जुमला ठोन्किये, मजाक उड़ाइये , उसकी चुटकी लीजिये , अगर वह आप से कमजोर नेता है  तो / अपनी तरफ से देश और जनता का ध्यान दूसरी तरफ खींचने का प्रयास करे और इसके लिये किसी अपने से बड़े नेता को जबरन घसीटिये / उसकी तरफ शोशा फेन्केन्गे तो राज्नीति मे गर्माहट आयेगी / आप तो पीछे रह जायेन्गे, सब आपको भूल जायेन्गे और आप के भ्रष्ट काम को भी / हमेशा अपने को बचाइये और दूसरे दलों के मधु मक्खियों रूपी छत्ते मे ढेळा मारकर तमाशा देखिये /  यही राज नीति का पैतरा है /

भारतीय मीडिया, चाहे वह प्रिन्ट हो या इलेक्ट्रानिक, दो  दो कदम आगे बढ कर  जरमनी की हिटलर सरकार के प्रचार मन्त्री ग्लोबेल्स को भी पछाड़े  दे रही है  /  कहां की बात कहां और किस सन्दर्भ में की गयी है और किस तरह कही गयी है ,  किसके लिये कही गयी है , उसके आगे पीछे क्या कहा गया है , बिना पूरी बात बताये इस तरह से गुमराह करती है या कर रही है, मुझे लगता है कि कहीं इसी इलेक्ट्रानिक मीडीया की वजह से कोई गहरा बवाल न हो जाये जो सम्भाले न सम्भले /

क्या ऐसी स्तिथि मे आम आदमी पार्टी को सरकार बनानी चाहिये जैसा कि  अनुपम खेर बता रहे है / आइये बताता हू कि क्या होगा ?

कल्पना करिये , [यह हकीकत से बहुत दूर की बात है और वास्तविक नही है] दिल्ली मे सरकार बनाने के लिये ७० सीटों मे से आधी ३५ सीटो की जरूरत तो है लेकिन बहुमत के लिये एक सीट अधिक होना चाहिये , यानी कुल आन्कड़ा ३६ का है / जिस दल के पास कम से कम ३६ हो वह सरकार बनायेगा / चाहे वह उसके अपने दल के चुने गये सदस्य हों या दूसरे दल से समर्थन लेकर कम से कम ३६ सन्खया हो / अरविन्द केजरीवाल के पास २८ है, कान्ग्रेस के पास ८ है / ये दोनों मिलकर सरकार बना सकते है / लेकिन यह बहुत खतरनाक खेल होगा अरविन्द केजरीवाल के लिये / इस तरह के खेल में अभी जन्म ली हुयी पार्टी का सत्यानाश हो जायेगा / कैसे? यह समझने की बात है / इसके दूर गामी परिणाम होन्गे /

बी०जे०पी० और कान्ग्रेस इसलिये परेशान है क्योन्कि इनका हाल ्ठीक उसी तरह का है कि “न खुदा ही मिला और  न विसाले सनम” / अर्थात यह जीत कर तो आ गये लेकिन बीच मे ही लटक गये / कैसे ? टिकट के लिये मारा मारी की गयी होगी, टिकट पाने के लिये  लम्बा धन और लाखो खर्च किये गये होन्गे पार्टी को चन्दा देने के लिये, उसके बाद एलेक्शन लड़े , उसमे भी करोड़ॊ का खर्चा आया होगा / मै एक मोटा अन्दाजा लगाता हू कि यह सब खर्चा दिल्ली जैसे महन्गे शहर मे चुनाव लड़्ने के लिये लगभग तीन करोड़ के आस पास का बैठना चाहिये, जो एक कान्स्टीटुएन्सी के एक कन्डीडेट का चुनाव लड़्ने का खर्चा होगा / इससे अधिक भी दिल खोलकर खर्चा करने वाले भी होन्गे, किसने कितना खर्चा किया यह कोई बतायेगा भी नही, आप केवल अनुमान लगा सकते हैं / अगर सरकार नही बनी तो यह सारा पैसा पानी मे गया /

इसके ठीक उलट अर्विन्द केजरीवाल की पार्टी ने चुनाव जनता की शक्ति के बल पर लड़ा, जिसमे उस विधान सभा क्षेत्र की जनता ने अपना शेयर जिसका जैसा बना  उसने सहयोग किया क्योकि वहां कन्डीडेट को प्रतीक बनाकर , अपना अक्स समझ कर , क्षेत्र की जन्ता लड़ रही थी / दूसरी तरफ बी०जे०पी० या कान्ग्रेस के कन्डीडेट का पैसा लड़ रहा था / आप और दूसरे दलो मे यही फर्क है / एक तरफ जन्ता अपना प्रतीक मानकर चुनाव लड़ रही थी और दूसरी तरफ खास नेता /

इसीलिये आप पार्टी का यह कहना सही है कि बहुमत नही है . वह विपक्ष में बैठेगी /

बी०जे०पी० और कान्ग्रेस दोनों ने ही सत्ता की लालच का चारा आप पार्टी की तरफ फेका है / यह चारा बहुत जहरीला और कान्टो भरा और पोटैसियम सायनाइड जैसा है /

मै अरविन्द केजरीवाल के विचारों  से इत्तेफाक रखता हू / ये सरकार तभी बनाये जब इनका  पूरा पूरा बहुमत हो / अगर चुनाव दुबारा होते है, तो होने दिया जाय, इसमे क्या हर्ज़ है ? यह तो लोकतान्त्रिक मर्यादा का सवाल है / दिल्ली की जनता फिर सोच विचार करके तय करेगी कि किसको बहुमत दिया जाय ? इसमे किसको क्या एतराज है ? सवाल यह है कि कान्ग्रेस अथवा बी०जे०पी० क्यों इतना उताबला पन सरकार को बनाने के लिये दिखा रही है / ये दोनो दल आप के ही पीछे क्यो पडे है ?  अगर इतना ही उतावला पन है तो ये दोनो दल कान्ग्रेस और बी०जे०पी० आपस मे ही सरकार  चाहे तो बना ले, इसके लिये उनको रोकता कौन है ?

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