“आम आदमी पार्टी” के करिश्मे से सारे देश में उत्साह की लहर ; महात्मा गान्धी का सपना कि देश की जनता के हाथ में शासन की बागडोर होनी चाहिये- यही आम आदमी पार्टी का मूल Concept हो

देश की स्वतन्त्रता के पश्चात महात्मा गान्धी जिस स्वराज की कल्पना करते थे और देश का शासन चलाने के लिये सीधे सीधे जनता की भागीदारी या साझेदारी  की बात करते थे और दूसरा यह कि महात्मा गान्धी का  कहना था कि देश की स्वतन्त्रता के बाद अब कान्ग्रेस को समाप्त कर देना चाहिये और इस पार्टी को dissolve   कर देना चाहिये , क्योंकि कान्ग्रेस पार्टी का मुख्य लक्ष्य था कि देश को अन्ग्रेजों की गुलामी से स्वतन्त्र कराया जाय, जिसे पूरा कर लिया गया है और इस लक्षय प्राप्ति के साथ कान्ग्रेस को समाप्त कर देना चाहिये /

लेकिन बाद का इतिहास सबको पता है कि महात्मा गान्धी और नेहरू के बीच क्या हुआ और किस तरह की आपस में ही जड़ काटने की POLITICS की गयी , यह  सारा विवरण इस देश की जनता को पता है /

अन्ग्रेज अपनी सत्ता को transfer  कान्ग्रेस को कर गये / फौरन सत्ता पाने के लालच में कान्ग्रेस का नैतिक और मानसिक पतन ही यहीं से शुरु हो गया / एक एक करके सही और ईमान्दार छवि वाले और देश को सही दिशा की ओर ले जाने वाले  और अच्छी नियत मन में रखने वाले नेताओं को नेहरू जी ने एक तरफ से ठिकाने लगाना शुरु कर दिया /

वोट बैन्क की  राजनीति और तुष्टीकरण की राजनीति और आम जनता को सब्ज बाग दिखाकर झान्सा देने की राजनीति और देश की जनता को सम्प्रदाय और जाति और वर्ग और भाषाई और अगड़ा और पिछड़ा और दलित और अति दलित और राज्य वार और और देश को उत्तर दक्षिण और पुरब पश्चिम और नौकर और मजदूरऔर अमीर और गरीब और न जाने कितनी श्रेणियों  मे देश की जनता  को बान्ट दिया गया, इसलिये  यह सब किया गया ताकि सत्ता केवल नेहरू परिवार के पास ही रहे /

कालान्तर में कान्ग्रेस में सत्ता से चिपके रहने के फार्मूले का  इतिहास बताने की यहां जरूरत नही  है /

कहां १९६० और  १९७० और १९८० का दशक और कहां आज का २०१३ का साल /  यह बुरा हाल और फटे-हाल  कान्ग्रेस का आखिर क्यों और कैसे हुआ ?

१- कान्ग्रेस  पार्टी के पास नेताओं की कोई कमी नही है , अभी भी बहुत से अच्छॆ नेता कान्ग्रेस पार्टी में है, लेकिन उनकी बोली को सुनता कोई नही है और न उनकी बात को कोई तवज्जो  देता है / पार्टी में चाटुकारों की भरमार है , जो पैसा ले दे कर टिकट और पद दोनों ले लेते है / कान्ग्रेस पार्टी के लिये काम करने वाला   devoted  कार्यकर्त्ता और  ईमान्दारी से पार्टी का काम करने वाला   कार्यकर्ता  की भयन्कर और घनघोर उपेक्षा की जायेगी, तो ऐसे ही परिणाम मिलेन्गे / पार्टी का सूपडा नही साफ होगा तो और क्या उम्मीद करेन्गे ?

२- जब कार्य का विकेन्द्रीकरण नही करोगे और यह सोचोगे कि मैडम और उनके बेटे ही सब कुछ है और कान्ग्रेस पार्टी उनके पूर्वजॊ की सम्पत्ति है और धरोहर है और उनकी जेबी पार्टी है  और बिना उनके आदेश के पार्टी का कोई पत्ता न हिले , अहन्कार मन में भरा हो , कमरे के अन्दर बैठकर सब decide करोगे  तो जाहिर है , पार्टी तो कम्जोर होगी ही / कान्ग्रेस का कार्यकर्ता या कान्ग्रेस पार्टी का सपोर्टर किस मुह से दूसरे मतदाता को यह कहे कि “कान्ग्रेस को वोट दो” / जबकि कान्ग्रेस की सरकार और उसकी उपलब्धियों मे भ्रष्टाचार और बेईमानी की नीयत सबसे ऊपर हो और जब देश का मतदाता इस भ्रष्टाचार को दूर करने के लिये सरकार से गुहार लगा रहा हो और इसके बदले में तकलीफ और भ्रष्टाचार करना तो दूर , कान्ग्रेस सरकार यह सब सुनना न पसन्द करती हो और इस तरह अपने को सबसे अधिक ताकतवर साबित करके सत्ता के मद और नशे में चूर होकर देश के मतदाताओं को शीर्ष स्थान से चुनौतियां दी जा रही हो और देश के मतदाताओं को बेवकूफ समझा जा रहा हो  और कान्ग्रेस पार्टी मतदाताओं को यह सन्देश दे रही हो जैसे कि ऐसा लगता हो कि”हम तो भ्रष्टाचार करेन्गे, और देश को जैसे लूटते रहे है वैसे ही लूटते  रहेन्गे, हम ताकतवर हैं , जो हमे रोकेगा, उसको कुचल कर रख देन्गे”/

३- “कान्ग्रेस को क्यों वोट दिया जाये”,  और कान्ग्रेस क्यों हारी , पिछले कुछ  सालों का लेखा जोखा शायद आप सभी भूल चुके हैं, इसलिये याद दिलाये दे रहा हूं / याद करिये कलमाडी का घोटाला, कान्ग्रेस पार्टी तो इनको क्लीन चिट दे चुकी है लेकिन अच्छा रहा कोर्ट ने उनको जेल का रास्ता दिखा दिया / याद करिये २ जी घोटाला , जो सीधे प्रधान मन्त्री तक जाता है , इसमे भी क्लीन चिट आ गयी / याद करिये राम्लीला मैदान का मन्जर , जब रात में सोते हुये बेगुनाह लोगों पर बर्बर  लाठियां चलायी गयी / सारा देश इस घटना से सकते  और दहशत में आ गया / केद्र की कान्ग्रेस सरकार और उनके सहयोगी दल सारे के सारे इस तरह की कार्यवाही को  justify  कर रही थी कि उसने जो भी किया वह सही किया / यह शायद स्वतन्त्रता के बाद की एक तरह की अजूबा घटना होगी , जिसमे एक “राज बीर” नाम की महिला की मौत हो गयी थी / याद करिये मायवती को क्लीन चिट देने का और याद करिये मुलायम सिन्घ को क्लीन चिट देने का / याद करिये किस तरह से कोयला की फाइले गायब है और याद करिये आदर्श घोटाला / एक ईन्ट उठाइये और एक  इस एक ईन्ट के नीचे दबा पड़ा हुआ घोटाला हाजिर है /

४- कुछ कान्ग्रेस के मन्त्रियों ने देश के मतदाताओ को बेवकूफ समझ रखा है / ५०० करोड की मिल्कियत वाले कान्ग्रेस के मन्त्री कपिल सिब्बल शायद अपने को विश्व का सबसे अकल्मन्द व्यक्ति समझते होन्गे/ कोई समझे या न समझे , मै तो उनको समझता हू ही , क्योन्कि देश का सारा कानून यही अकेले घोट कर पिये बैठे है , अब आपको भी समझाये देते है / ये सबको एक दूर की कौड़ी पकड़ा चुके हैं कि १५०० रुपये में टैबलेट कम्प्यूटर देन्गे , जिसका नाम “आकाश” रखा गया है / लाखों करोड़ो खर्च करके इसकी लान्चिन्ग बड़े जोर शोर से की गयी /  मैने भी भड़ी में आकर एक आकाश बुक करा दिया / कई साल हो चुके  है , “आकाश” का क्या हाल है , यह मै आकाश को ढके हुये बादलों के बीच से देखने की कोशिश कर रहा हूं / अगर आप लोग भूल गये है तो मै याद दिलाये दे रहा हूं कि यह वही कपिल सिब्बल है , जिन्होने रात के अन्धेरे मे शान्ति पूर्वक राम लीला मैदान में  सो रहे अन्दोलन कर्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठी चलवाने के अगुवा कर्ता रहे है / इन्होने तो छाती ठोन्क कर बहुत बुलन्दी के साथ हन्सते हुयेऔर मुस्कुराते हुये इस घटना के पहले  दिन TIMES NOW  और दूसरे news channels  मे बयान दिया था कि यह कार्यवाही ऐसे लोगों के लिये “LEARNING LESSON”    है / सबसे अधिक अफ्सोसनाक बात यह रही कि देश की राजधानी में सरकार की नाक के नीचे इतनी बड़ी घटना हो गयी और किसी भी दल या नेता ने अफसोस तक नही किया , उलटे सारे दल ऐसी कार्यवाही को समर्थन दे रहे थे / यह देश की जन्ता के जज्बातों पर नमक छिड़कने का काम किया गया / कान्ग्रेस के नेता लोगों के जखमों पर नमक छिड़्कते रहे और लोग बेबस होकर खून का घून्ट पीकर इस लिये बैठ गये कि एक दिन तो हमारा होगा ही / लोगो ने कान्ग्रेस की  औकात बता दी / क्यो घबराते है , अभी और औकात बताना बाकी है, लोक सभा के चुनाव मे यह भी मन्शा पूरी हो जायेगी / देश की जनता गलती कर रही है , इस पाप कर्म के पीछे कान्ग्रेस को समर्थन देनेवाले दल भी शामिल है , देश की जन्ता को चाहिये कि अब समय आ गया है , इन दलों को भी औकात बता दी जाय /

५- अन्ना हजारे का जब दिल्ली में भ्रष्टाचार को लेकर मुहिम चलायी जा रही थी तो उनको तिहाड जेल में बन्द कर दिया गया था / सारे देश में कान्ग्रेस के खिलाफ आग लगी हुयी थी / मन्मोहन सरकार आन्ख मून्द  कर बड़े ही निर्विकार भाव से मुख में ताला डालकर  इस देह की जन्ता के आन्दोलन को demoralize  करने के जितने भी फार्मूले हो सकते थे , वह सब आजमाये गये / जासूसी से लेकर घर के भेदियों तक , क्या क्या नही किया गया ? लालू जैसे नेता सन्सद के अन्दर हुन्कारें भरते हुये अन्ना की किये गये अन्शन की खिल्लियां उड़ा रहे थे / जैसे कि इस देश में भरष्टाचार जैसी कोई चीज ही नही है और न इसे दूर करने की जरूरत है / इस देश की एक अरब और ३० करोड़ के लगभग की जन्ता यह सब देख समझ रही थी , लेकिन उस समय वह बेबस थी और कुछ कर नही सकती थी / अन्ना का अन्शन तुड़्वाने के लिये सरकार ने  न कोई काम और न कोई पहल की / जब इस तरह से जिम्मेदार सरकारे इस देश के नागरिकों के साथ इस जुल्मो सितम की हद तक जायेन्गी और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करेन्गी , इस तरह से कि एक बूढे आदमी इस बात के लिये अनशन चला रहा है जो  सारे देश में हो रही लूट और भ्रष्टाचार को दूर करने की पहल कर रहा है , उसका इस तरह से तिरस्कार किया जाये ? ऊपर से बसपासुप्रीमो माया वती का अन्ना हजारे पर व्यन्ग्य कसते हुये यह कहना कि अगर अन्ना को भ्रष्टाचार दूर करना है तो राज्क्नीतिक दल बनाकर सत्ता में आयें और भर्ष्टाचार दूर करें / सपा सुप्रीमों मुलायम सिन्ह भी यही कह रहे थे कि हम भ्रष्टाचर नही दूर करेन्गे, यह तो जनता का काम है कि वह दूर करे / बाकी सभी क्षेत्रीय दल और भारतीय जन्ता पार्टी गुम्सुम और न समझ मे आने वाली भाषा मे गोल मोल बयान देकर मरकज से दूर भागती रही /

जन्ता को अब मौका मिला है , उसने इन सब्को औकात बता दी है / आगे भी आने वाले दिनों मे औकात बता देगी / थोडा धीरज रखिये /

६- कान्ग्रेस पार्टी के लिये  अभी भी कुछ  नही बिगड़ा है , यह दुबारा  चाहे तो उसी पुरानी रौनक में तीन महीने के अन्दर अपने को energize कर सकती है / कैसे ?

[१] फैसले जल्दी लें  और सोच समझ कर ले , याद रखे कि शीर्ष स्तर पर लिये गये फैसले का फौरन असर जमीनी स्तर तक जाता है /

[२] जनता परेशान है भ्रष्टाचार और रोजाना खाने पीने की चीजो मे बढ रही महगायी से, यह दोनों बाते रोकने के लिये ठोस उपाय करे / गैस के दाम या पेट्रोल के दाम मे दस पान्च रुपये की बढोतरी जनता सह सकती है लेकिन खाने पीने की चीजों के बढते दामो से परेशान होती है , दूध महन्गा होने , सब्जिया महन्गी होने से सभी प्रेशान होते है

[३]प्रधान मन्त्री सरकार से उन मिनिस्टरों को कैबिनेट से हटाये जो इस सरकार की बहुत बदनामी करा चुके है

[४] पार्टी के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन पूरे देश से बुलाकर दिल्ली मे करें और छोटे तथा बड़े नेताओं से मिल्वाये और उनकी समस्याये सुने और उनका समाधान करे  / जमीनी हकीकत का सामना कर रहे कार्य कर्ताओं को  प्रोत्साहित करे और उनकी मदद करें

[५] कान्ग्रेस पार्टी के कर्ता धर्ताओं को समझना होगा कि पार्टी की जान और धड़कन  उसके कार्य कर्ताओं मे बसती है / कार्य करता अपने काम के लिये पार्टी में सम्मान चाहता है , भले ही आप उसे पैसा न दें, सम्मान तो दीजिये / कार्य कर्ताओं का मनोबल बढाने के लिये ठोस उपाय करिये / कार्य करताओ के बीच से ही स्थानीय नेतृत्व  निकालिये, ऊपर से कुछ भी मत थोपिये / यह गलत है और इससे कार्यकरता का मनोबल गिरता है /

[६] कान्ग्रेस पार्टी अपने सन्गठन का ढान्चा सुधारिये, यह जितनी जल्दी हो सके करें /

कान्ग्रेस पार्टी के लिये अभी समय है, कुछ भी नही बिगड़ा है , जो बीत चुका सो बीत चुका, हार का मलाल मत करे , हार छोटी हो या बड़ी , इसका कोई मतलब नही होता / विरोधियों  को टक्कर देना है और उनको पस्त करना है तो फौरन कमर कस कर जितना जल्दी हो उतनी जल्दी उठिये और फाल्तू की राज नीति मे समय गवाने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करिये / यह कोई भी करे , मैडम हो या राहुल गान्धी / गलतियां सबसे होती है, गलतियां सुधारी जा सकती है /

मेरा तो कान्ग्रेस के नेताओं से यही कहना है कि सकारातम्क सोच के साथ अभी से , इसी समय से सुधार का काम शुरु करे, अभी कुछ भी नही बिगड़ा है / जो भी बिगड़ा है वह सब सम्भल जायेगा, ऐसा विश्वास करिये/

 

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