3 रुपये किलो की कीमत का टमाटर गांव की मन्डी मे बेचा गया ; वही टमाटर कानपुर शहर की मन्डी में खुदरा दुकानदार से 20 रुपया किलो कन्ज्यूमर ने खरीदा , क्यों और कैसे ?

बात लगभग एक साल पहले की यानी सन २०१३ की है / मै सुबह अपने काम के सिल्सिले मे कानपुर शहर से ८० किलोमीटर दूर जिला फतेह्पुर जा रहा था / सुबह के साढे ६ बजे थे / मेरे लड़्के ने कहा कि घर मे टमाटर नही है, पैसे दे दीजिये तो बाज़ार से ले लून्गा / मैने उसको पैसे दिये और मै बस स्टेशन की तरफ चला गया /

जिला फतेह्पुर के ग्रामीण इलाके मे मेरे बहुत से परिचित है / मै रुकता  रुकाता हौले हौले एक स्थान से दूसरे स्थान अपने सहूलियत को ध्यान मे रखते हुये अपने काम के सिल्सिले मे आता जाता रहता हू / सुबह ९ बजे के लगभग मुझे जिनसे मिलना था उनके पास चला गया / मेरे मित्र ने कहा कि चलिये आपको अपने खेत घुमा लाता हू / उनके पास लोडर था जिसमे खाद की कई बोरियां जिसमे यूरिया और एन्पीएन जैसी खाद भरी थी और प्लास्टिक के बड़े से क्रेट जो अमूमन दूध या सब्जी या प्लेट या ऐसी ही दूसरी चीजें रखने  के काम आती है, ब्ड़ी सन्खया मे रखी हुयी थी / हम दोनों चौडगरा जी०टी० रोड से २ किलोमीटर दूर के एक गांव से चले , उनके खेत यहां से लगभग ५ किलोमीटर दूर थे / पहले पक्की , फिर गाव की कच्ची और फिर खेतों की ऊबड़ खाब्ड़ सड़्को को पार करके उनके खेत पहुन्चा जहा ७-८ मजदूर मौजूद थे / लगभग २०० मीटर चलने के बाद मै उनके खेत पर पहुन्चा और उनके मजदूरो की आराम करने की घास फूस की झोपड़ी मे जाकर एक जमीन पर पड़ी चटाई पर जाकर बैठ गया /

मैने नजारा देखा , मित्र के खेत मे पैदा टमाटर के बड़े बड़े ढेर खेतों के कई कोनों में जमा कर दिये गये थे , कुछ मज्दूर टमाटर तोड़ने मे लगे हुये थे / इधर कई मज्दूर खाद की बोरी को लेने लोडर के लिये चले / प्लास्टिक की क्रेट का मामला समझ मे आ गया कि इन सबमे टमाटर भरे जायेन्गे / तीन घन्टे से ऊपर की कवायद के बाद मेरे मित्र वापस अपने गांव जाने लगे , मैने उनसे कहा कि मुझे पहले ही उतार दे , कुछ दूसरे काम है उनको निपटा लूं /

रास्ते मे मैने केवल जानकारी के लिये पूछा कि टमाटर क्या भाव बिकेन्गे ? वह बोला कि अभी मोबाइल से बात की है मन्डी का खरीदार टमाटर का ३ रुपया किलो भाव बता रहा था और गोभी का छोटे वाले गोभी का एक रुपये मे तीन और बड़े गोभी का एक रुपया और बहुत बड़े गोभी का तीन रुपये मे दो गोभी का भाव बता रहा था / अभी मै इसको लेकर बिन्दकी की बाजार मे बेच दून्गा /  बिन्दकी की बाज़ार जिस स्थान पर मै था और जहां था वहां से लगभग २० किलोमीटर दूर थी /

रात मे घर आया  /  बात आयी गयी हो गयी / दूसरे दिन लड़्के से पूछा कि टमाटर क्या भाव लाये थे ? उसने बताया कि बड़े टमाटर २५ रुपये किलो और छॊटे टमाटर २० बीस रुपये किलो बाज़ार मे बिक रहे थे , मैने छोटे वाले वाले एक किलो टमाटर ले लिये है /

उधर चौडगरा मे मेरे मित्र ने  चलते चलते लगभग १० गोभी और लगभग चार किलो टमाटर  एक बोरी मे भरकर दे दिये / जिसे मै लेकर कानपुर रात तक आ गया /

यहां उल्लेख अवश्य करना चाहून्गा कि यह किसानो की बहुत बड़ी दरिया दिली होती है कि अगर फसल में कोई चीज उनके खेतों मे होती है तो उनके यहां आने जाने वालों को वे अवश्य जाते जाते उस फसल की पैदा की गयी चीज आने वाले के साथ जाते समय बान्ध कर देते है चाहे वह सब्जी हो , खाने की कोई चीज हो, फल हो या भुट्टा मकई हो या गन्ना हो या गुड़ हो या सिरका हो या और कुछ  बोया और पैदा किया गया हो / एक बार मै एक किसान के घर गया वहां उसने आधा बोरा हरा मिर्चा चलते समय बान्ध कर दे गया , जिसे शहर आकर मुझे सब्को बान्टना पड़ा / दूध जिनके घरों मे जानवर देते है , बहुत से दूध या मठा या घी दे देते है / मैने देखा है कि किसान का दिल इन सब  मामलो मे  बहुत बड़ा होता है, भले ही वह कितना गरीब हो  /  मै उन्हे इसके लिये oblige  करने के लिये उनके बच्चो के लिये बिस्किट और टाफी और दूसरी खाने की चीजे ले जाकर के दे देता हूं , हलान्कि वे इसके लिये मना करते है / कभी कभी ऐसा भी होता है कि किसी किसान के खेत से मै बिना पूछे  ही मूली , गाजर, चुकन्दर , मटर या दूसरी पसन्द  की  चीज बिना उअसकी मौजूदगी में तोड़्कर ले जाता हू , लेकिन जब बाद मे कभी मिलता हू तो उनको ईमान दारी से बता देता हू कि मै उनके खेत से कितने नीम्बू, कटहल, फल या सब्जी ले गया था / इसके लिये वे जो भी दाम बताते है , वे मै उनको दे देता हू / बल्कि उससे अधिक /

जब मेरे लड़्के ने बताया कि उसने टमाटर २० रुपये किलो का खरीदा है तो मै चौन्का / कानपुर शहर मे टमाटर  बिन्दकी की मन्डी से आता है , यह मुझे पता चला , जब मैने इसे जानने की कोशिश की / मैने कई मुसलमान सब्जी-फरोशों से बात की , उन्को पूरी बात बतायी ,उनहोने कहा यह ज्यादा से ज्यादा सारा खर्चा मिलाकर ८ से १० रुपये के बीच मे बिकना चाहिये / लेकिन इतनी बड़ी कीमत की बात समझ मे नही आयी / अब यह उढेड़ बुन मेरे दिमाग में बस गयी कि इसके बारे मे पता करना चाहिये कि खेत की सब्जी जो तीन रुपये किलो मन्डी मे बिकने जा रही है वह कानपुर शहर आकर २५ रुपये किलो मे क्यों बिक रही है / मुझे इसका जवाब चाहिये था, लेकिन यह सब समझ मे एक साल बाद  full and final होकर आया कि क्या कारण है जो टमाटर इतना महन्गा हो गया /

बहस मुबाहसे और सबसे जानकारी प्राप्त करने के बाद मोटे तौर पर , हलान्कि नीचे बताये गये सभी आनकलन अधिक से अधिक वस्तुस्तिथि के है, यह समझ मे आया कि ;

[१] टमाटर तीन रुपये किलो की कीमत देकर गांव या कस्बे के दुकान दार ने खरीदा जैसा कि बिन्दकी की मार्केट

[२] २ रुपये प्रति किलो मार्जिन लेकर इस दुकान्दार ने कानपुर मन्डी के दूकान्दार को एक रुपया प्रति किलो के हिसाब से माल भेजने का भाड़ा बिन्दकी से कानपुर सब्जी मन्डी तक का जोड़कर इस टमाटर की कीमत ६ रुपये प्रति किलो कर दी

[३] कानपुर शहर के दूकान्दार ने २ रुपया प्रति किलो का मार्जिन लेकर इसे आठ रुपये मे खुदरा दूकान्दार को बेच दिया यानी अब टमाटर की कीमत आठ रुपये प्रति किलो हो गयी /

[४] खुदरा दूकान्दार इस टमाटर को क्यों २० य २५ रुपये मे बेचता है यह मुझे समझ मे नही आया , इस बारे मे मैने जानने की कोशिश की लेकिन सफलता नही मिली  /

[५] धीरे धीरे इस रहस्य का पर्दा भी खुल गया  / होता यह है कि दूकान दारों  को  कई स्तर पर ऐसे धन खर्चा कर्ना होता है जिनकी वजह से सामान बहुत महन्गी हो जाती है / मुझे बताया गया  कि मन्डी समिति के लोग , सब्जी मन्डी के दबन्ग लोग . वहां तैनात पुलिस, स्थानीय थाना, छुटभैय्ये नेता, मन्डियों के दादा , नगर पालिका के कर्मचारी आदि आदि लोग इन खुदरा दूकान्दरों से पैसा वसूली करते है , जिसके कारण ३ रुपये का टमाटर उपभोकताओं को २० से २५ रुपये खर्चने पड़ जाते है /

टमाटर की एक बोरी में बडे और मन्झोले और छोटे टमाटर होते है जिन्हे खुदरा दूकानदार छाण्ट छान्ट करके कई categories  का बना देते है जिन्हे विभिन्न दामों मे बेचकर दूकान्दार पैसा कमाता है / यह दूकान दार भी जब मौका लगता है तो महगाई बढने के नाम की दुहाई देकर ग्राहको के गुल्ली लगाने से बाज नही आता है / अमूमन ऐसे दूकान्दारों की सनखया बहुत  है जिनके भाव ग्राहक के रूप रन्ग और पहनावा देखकर  बदलते रहते है /

आखिर वे भी तो कमाने के लिये बैठे है / बहती गन्गा मे कौन अपना हाथ नही साफ करने की कोशिश करेगा ?

अब गोभी का भाव भी समझ लीजिये / जो गोभी एक रुपये का तीन बिन्दकी की बाज़ार मे बिका वह कानपुर मे १२ रुपये का बिक रहा था / जो बड़ा गोभी था वह ३० रुपये का बिक रहा था /

इसे मै क्या समझूं , दाम बढना किस तरह की प्रक्रिया है ? क्या यह भ्रष्टाचार से भी जुड़ा मामला हो सकता है ? यह किस तरह का अर्थ शास्त्र है जहां ३ रुपये की चीज २५ रुपये मे बिक रही है /

बिन्ब्दकी बाज़ार मन्डी से कानपुर शहर की मन्डी की दूरी लगभग ७०  किलोमीटर के आस पास होगी /

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