दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल की सरकार के तीस दिन बीतने के बाद लोगो को क्या समझ मे आया है ?

लगभग   80 %  प्रतिशत  से अधिक  लोगो का मानना है  कि  दिल्ली के मुख्य मन्त्री अर्विन्द केजरीवाल ने ३० दिन मे जितना किया है , वह इस देश की किसी भी सरकार ने चाहे वह भाजपा की हो या कान्ग्रेस की या सपा या बसपा या कोई और , किसी भी सरकार ने इतनी तेजी से काम नही किया / लोगो का मानना है कि ३० दिन मे जितना केजरीवाल सरकार ने किया है वह दूसरे दल अपने नकारेपन को छिपाने के लिये  और अपने अकर्मण्यता और जनता का कोई काम न करने और अपनी कार्य शैली के नकारेपन को जन्ता के जेहन से  ध्यान बटाने के लिये सभी दल सपा को छोड़्कर केजरीवाल पर हमला बोल रहे हैं /

दिल्ली मे पुलिस कर्मियों पर केन्द्र सरकार की कोई कार्यवाही न करने के एवज में मुख्य मन्त्री केजरीवाल का दिल्ली की सड़्कों पर धरना देने का नजारा देखकर लगभग सभी लोगों ने कहा कि “यह बिल्कुल ठीक है और इसमे कोई भी गलत नही है ” / पुराने लोगो ने कहा कि ऐसा तो पहले भी नेताओं के “घेराव” और नेताओ के घरों मे  “बन्धक” बनाने के कार्य क्रम हजारों बार हो चुके हैं /

कुछ लोग इस बात से सहमत थे और कुछ लोग इससे असहमत भी थे कि धरना देने का समय ठीक नही था /

लगभग सभी जातियो और धर्म के लोगो का यही कहना है कि “केजरीवाल को काम करने का पूरा पूरा मौका देना चाहिये” / लोगो का आम आदमी पार्टी पर बहुत विश्वास है और बहुत confident  है और अधिकान्श लोगों का  ये  समझना है कि भारतीय राज्नीति मे आम आदमी पार्टी अव्श्य कुछ बुनियादी बदलाव लायेन्गे /

कुछ लोगो को पिछले दिनो हुयी केजरीवाल सरकार के धरने के style  पर दूर गामी असर  देश की राज्यों की राज्नीति पर पड़्ने का कयास भी लगा रहे है /

कुल मिलाकर लगभग ८०% प्रतिशत लोगो ने यही कहा है कि केजरीवाल सरकार  ठीक रास्ते पर काम कर रही है और इसे बी०जे०पी और कान्ग्रेस ही अस्थिर करने की कोशिश कर रही है /

ग्रामीण इलाके के लोग ९९ % प्रतिशत free to air channel यथा हिन्दी भाषा के प्रसारण चैनल डी०डी० नेशनल चैनल, राज्य सभा और लोक सभा के चैनल के कार्य क्रम देखते है / एक प्रतिशत paid channel  देखते है / हिन्दी  के न्यूज चैनल  कार्य क्रम बहुत कम लोग सुनते और देखते है / ज्यादातर नाटक और मनोरन्जन के कार्यक्रम देखते है / अन्ग्रेजी चैनल ग्रामीण और कस्बाई लोग जानते तक नही है / इन्हे कोई देखता भी नही है /

अन्ग्रेजी भाषा के चैनल ग्रामीण क्षेत्रों मे और कस्बाई क्षेत्रों मे कोई भी नही देखता है / शहरों मे भी १००० एक हजार दर्शकों मे शायद कोई एक दर्शक १० या २० मिनट के लिये कोई कार्यक्रम देखता हो / इसलिये इन्हे antique चैनल कहा जाये  तो अतिश्योक्ति नही होगी /

 

 

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