कानपुर में डाकटरों की हड़्ताल ; ऐसी पुलिस की बरबर्ता और गुन्डागर्दी सभ्य समाज के लोगों के साथ कभी नही देखी ? सारा दोष विधायक इरफान सोलन्की और एस०एस०पी० यादव का है ?

डाक्टरों और सभ्य समाज के लोगों के साथ पुलिस द्वारा की गयी ऐसी बरबरता और गुन्डागर्दी शायद ही कभी देखने को मिली हो ? मैने बहुत से जन्ता द्वारा किये गये आन्दोलनों को कवर किया है , उन्हे फिल्माया भी है और पुलिस द्वारा खदेड़े जाने और पी०ए०सी० द्वारा लाठी चार्ज किये जाने की कवरेज बहुत बार की है / मुझे अच्छी तरह से पता है कि प्रशासन पहले लाउड स्पीकर द्वारा चेतावनी देता था कि अगर भीड़ न हटी तो उन्हे लाठी चार्ज करना पड़ेगा और उस वख्त जिले के सभी जिम्मेदार न्यायिक अथवा प्रशासनिक अमला मौजूद रहता था / जब बात बही बनती थी तब लाठी चार्ज का आदेश दिया जाता था / ऐसी एक औपचारिकता होती थी प्रशासन की तरफ से /

इधर पिछले कई सालों से मुझे लगता है कि इस तरह की पूर्व चेतावनी और प्रशासनिक औपचारिकता के बिना ही शासन और सरकार जब चाहती है तब पुलिस भेज कर वह सब कुछ कर देती है जो कानूनी हो या न हो /

कानपुर मे यही सब हुआ , सारी सीमाओ और कानून को ताक पर धर कर पुलिस ने गुन्डा गर्दी की और डाक्टरों को मारा पीटा और और उन्हे लहू लुहान कर दिया / अगर हम आप करते तो एक सेक्न्ड मे जेल के अन्दर कर दिये जाते , लेकिन यह स्र्कारी गुन्डागर्दी है इसलिये यह सब तो सरकार जायज ही ठहरायेगी /

विधायक इरफान सोलन्की के पिता मरहूम हाजी मुश्ताक सोलन्की एक बहुत नेक दिल इन्सान थे / हर कान्पुर का निवासी उनकी तारीफ जरूर करता है / मेरा भले ही उनसे राजनीतिक मतभेद रहा हो लेकिन एक इन्सान के नाते मै भी उनकी तारीफ करता था, उनके कामो की तारीफ करता था / लेकिन इनके पुत्र इरफान सोलन्की अपने वालिद के ठीक उलटे स्वभाव के हैं / यह पहले भी कई बार इसी तरह के बवाल कानपुर मे कर चुके हैं /

केसा KESA बिजली कम्पनी के पूर्व एम०डी० महिला अधिकारी के साथ यह झगड़ा कर चुके है और इसका मामला इन्होने विधान सभा मे उठाया था , बाद मे यह चाय पीने उस अधिकारी के पास गये / यह कई बार झगड़ा झन्झट कर चुके है और यह उनकी आदत मे शामिल है /

कानपुर मेडिकर कालेज मे बवाल की जड़ इलफान सोलन्की का व्यवहार रहा है / यह बड़े गर्म मिजाज के है और यही कारण रहा कि यह झगड़ा जो दाढी मे हाथ फेरने से शान्त हो जाता उसके लिये आई०एम०ए० को राष्ट्रपति तक गुहार लगाने न जाना पड़्ता /

गलती एस०एस०पी० यश्श्वी यादव की सबसे ज्यादा है / प्रशासन को क्या, लोग मरते है तो मरते रहे, इससे इस अफसरों को क्या फर्क पड़्ता है / क्योंकि इन अफसरो या नेताओं के घर का कोई व्यक्ति नही मरा है, इसलिये नेताओं को और अफ्सरों को कोई फरक नही पड़्ता /

उससे भी ज्यादा प्रदेश सरकार की गलती है / प्रदेश सरकार अपनी राजनीति चमकाने के लिये जिस तरह का व्यवहार कानपुर के नागरिको के साथ कर रही है , वह पहले से ही जग जाहिर है / जब राजनीति की जायेगी तो उसके परिणाम भी ऐसे ही आयेन्गे /

प्रदेश स्रकार द्वारा जान्च पर जान्च बैठाने और कमीसन पर कमीसन को बैठाने की बात करने से तो यही लगता है कि प्रदेश सरकार मुसलमानों के वोट पाने के चक्कर मे कुछ भी प्रभावी action कतई नही लेगी, भले ही लोग मरते रहे / कोई यह समझे कि पुलिस की गुन्डा गर्दी रोकने या अफसरो का तबादला कर दिया जायेगा , ऐसा कुछ भी समझ मे नही आया है /

यह बहुत ही निराशा जनक है कि जिस सरकार से प्रदेश के लोगो ने जिस तरह परिवर्तन की उम्मीद और न्याय प्रियता की आशा की थी, अफसोस वह सब कुछ भी नही हुआ /

समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस राज्य के लोगों को अपने कार्य कलापों से बहुत निराश किया है /

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