CURRENCY NOTES AND METAL COINS SHOULD BEAR THE PICTURE OF BHARAT RATNA AND PARAM VIR CHAKRA AND ASHOKA CHAKRA TITLE HOLDERS ; GOVERNMENT SHOULD THINK OVER IT ; कागज की और धातु की दोनो करेन्सी मे भारत रत्न और परम वीर चक्र और अशोक चक्र धारको के चित्र छापे जांने के बारे मे विचार करना चाहिये

भारतीय करेन्सी मे चाहे वह कागज की हो या धातु की , पिछले ६० सालो से   राष्ट्र पिता  महात्मा   गान्धी का नोटो पर छपा हुआ चित्र देखते हुये चले आ रहे है / यह पिछले लगभग 60 सालो से चला आ रहा है / किसी किसी छोटे कीमत वाले नोटॊ पर अशोक की  तीन  शेरो वाली लाट भी दिखाई देती है /

विश्व के बहुत से देशो मे यथा अमरीकी डालर और यूरोप के देशो की तथा  एशिया के कई देशो मे ऐसी स्तिथि नही है / इन देशो की करेन्सी मे उन देशो के प्रसिध्ध नेताऒ के अलावा अन्य चित्रो की छाप होती है /

बहरहाल अब इस स्तिथि को बदलने का प्रयास किया जाना चाहिये /

मेरा मानना है कि अब तक देश मे जितने भी  ” भारत रत्न ” धारी विभूतियां है उनके चित्रो को कागज की करेन्सी और धातु की करेन्सी पर छापा जाये या उकेरा जाये /  इसी श्रन्खला मे हमारे देश के “परम वीर चक्र ” और “अशोक चक्र” धारी विभूतियो  को भी शामिल किया जाना चाहिये /

यह एक तरह से इस देश  की  जनता के लिये प्रेरणा दायक होगा कि उनके देश के कितने भारत रत्न हुये और परम वीर चक्र धारी हुये और अशोक चक्र धारी हुये जिन्होने इस देश के लिये विभिन्न क्षेत्रो मे सर्वोत्तम कार्य किये और देश के लिये अपने प्राण देकर  एक गौरव गाथा सब्को प्रेरणा देने के लिये देश वासियो के मन मे लिखकर इस दुनिया से विदा हो गये /

करेन्सी धन के लेन देन का एक ऐसा साधन है जिसके जरिये प्रत्येक व्यक्ति तक यह सन्देश दिया जा सकता है कि उनके देश की कितनी महान विभूतिया हुयी है,  यह जब चेतन अथवा अचेतन मन मे करेन्सी को देखकर उसके मन मे अन्कित पूर्व ग्यान का भान होगा /  जैसा कि अभी वर्तमान मे महात्मा गान्धी का चित्र देखकर और अशोक की शेरो वाली लाट देखकर सभी देश वासी समझ जाते है कि महात्मा गान्धी कौन थे और अशोक की लाट का क्या मतलब है ?

समय के साथ करेन्सी का स्वरूप भी बदलना चाहिये / इससे कई फायदे है / एक ही तरह की करेन्सी लगातार चलने से इसमे नकली नोट चलने की और छापने की बहुत समभावनाये होती है / अलग अलग तरह के चित्रो वाले नोट छपने से इसमे कमी आयेगी /

देश के लोग जब भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फर खान और इन्दिरा गान्धी और राजीव गान्धी और लता मन्गेशकर और बिस्मिल्लाह खान और   मदर टेरेसा तथा अन्य भारत रत्नो को नोटॊ पर छपे हुये देखेन्गे तो उनको पता चलेगा कि कितने महान लोग इस देश मे पैदा हुये / इसी तरह जब परम वीर चक्र धारी और अशोक चक्र धारी लोगो को देश वासी देखेन्गे और समझेन्गे तो देश के लोगो को गर्व होगा कि उनके देश की माटी ने कितने बहादुर और जाबाज लोगो को पैदा किया /

भारत सरकार को सोचना चाहिये कि  इस दिशा मे क्या किया जा सकता है ? यह सुझाव feasible  है अथवा नही. क्योन्कि अपने देश मे यह बड़ी विचित्र स्तिथि है कि हर बात का राज्नीति-करण होने लगता है और इसी कारण से बहुत उपयोगी योजनाये भी साकार रूप नही ले पाती है /

हा, एक बात मै जरूर यहां कहून्गा कि इसकी शुरुआत बहुत छोटे सिक्के के साथ की जा सकती है जैसे की १ रुपये का धातु का सिक्का और १० रुपये का कागज का नोट / एक काम और कर सकते है कि limited  सन्ख्या मे Reserve Bank of India चान्दी या सोने के सिक्के भारत रत्न और चक्र धारियो के ढाल कर इसे  pre-booking  करके सीधे उन लोगो को भेज सकती है जो इस तरह के सिक्के लेना चाहते है /  इस तरह के सिक्के जमा करने का शौक पालने वाले इस देश और दुनिया मे बहुत से लोग है जो coins and note collectors  है /

सिक्को की कीमत कुछ सस्ता करना चाहे तो सिक्को को चान्दी और सोना दोनो धातुओ को मिलाकर एक   सिक्का बना दे जैसा कि दस रुपये की कीमत वाले सिक्के का स्वरूप है जो पीतल और  स्टील से मिलाकर बनाया गया है / ठीक इसी तरह से  बीच मे सोना और बाहर चान्दी की धातु  या बाहर सोना और अन्दर चान्दी की धातु का सन्योग करके इसे बना सकते है /

धीरे धीरे माहौल बनने पर ऐसा कागज के नोटो और  स्टील   धातु के सिक्को पर छाप कर और उकेर कर  इसे    विस्तारित किया जा सकता है /

मौका है एक अच्छी शुरुआत की /

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