महीना: फ़रवरी 2015

दिल्ली मे केजरीवाल दुबारा फिर मुख्य मन्त्री होन्गे यह तय है ? बी०जे०पी दिल्ली मे चार कारणो से हारेगी ???

जब से दिल्ली मे चुनाव की घोषणा की गयी तब से मेरी निगाह दिल्ली के चुनाव की तरफ विषेष तौर पर लगी हुयी थी /

,ऐ समझ रहा था कि डा० हर्ष वर्धन अगले दिल्ली के मुख्य मन्त्री होन्गे ऐसा मै मान्ता था / लेकिन जैसे ही किरन वेदी का नाम सामने आया और यह आभास हुआ कि कितन वेदी ही दिल्ली की मुख्य मन्त्री बनेन्गी , मुझे शक होने लगा कि बी०जे०पी० अपनी स्रकार नही बना पायेगी /

मेरे विचार से चार कारण बी०जे०पी के दिल्ली मे हारने के है ;
[१] किरन वेदी का मुख्य मन्त्री के तौर पर बी०जे०पी० को project करना , यह सबसे खतरनाक साबित हुआ / अनदर खाने यह चेहरा किसी भी बी०जेपी के  कार्य-   कर्ता को हजम नही हुयी / दिल्ली मे विजय गोयल और डा० हरष वर्धन पिछले कई दशक से बीजेपी से जुडे रहे / इन नेताओ ने अपना कई दशक इस पार्टी के लिये दिया और समर्पित तौर पर काम करते रहे / लेकिन चुनाव होने के कुछ दिन पहले किरन बेदी का आ जाना सबको खल गया / यह असन्तोष जो दिल्ली बीजेपी के कार्यकर्ताओ मे फैल गया वह सब पर भारी पड़ गया / बीजेपी के नेताओ और कार्यकर्ताओ ने मन से काम ही नही किया जिसका नतीजा यह निकल कर आया है /
अगर किरन बेदी की जगह विजय गोयल या डा० हर्ष वर्धन होते तो बीजेपी की सरकार दिल्ली मे बनना तय थी / क्योन्कि बीजेपी के कार्यकर्ता जितना मानसिक और शारीरिक रूप से इन दोनो नेताओ के प्रति समर्पित थे उतना किरन बेदी के साथ अपना सामन्जस्य नही बैठा सके /

[२] गलत चेहरे का चयन और जीतने के लिये सब कुछ मोदी ने दांव पर लगा दिया / यह दिल्ली की जनता देख रही थी / किरन वेदी ने अपने कार्य काल मे सीधे सीधे जन्ता के लिये कुछ भी नही किया बल्कि उनके पुराने रिकार्ड का जब सामने आना शुरु हुआ तो लोग भड़क गये / दिल्ली केलोगो कोलगा कि बीजेपी के नेता केजरीवाल को चोर  और बेईमान और लूटने वाला बना दिया जब कि हकीकत मे ऐसा कुछ भी नही था / दिल्ली की जन्ता को यह समझ मे आया कि मोदी स्रकार अपनी पूरी ताकत दिखाकर  केजरी वाल को मिटा देना चाहती है / मोदी सरकार की    यह भावना दिल्ली के  लोगो को अच्छी नही लगी / केजरीवाल के सामने मोदी की सरकार की ताकत झोन्कने का फलसफा लोगो को बहुत बुरा लगा /

[३] बीजेपी के प्रचार मे पार्टी के बडे नेता साइड लाइन कर दिये गये और किसी भी बडे बुजुर्ग नेता का प्रचार मे हिस्सा न लेना निगेटिव साबित हुआ

[४] विरोधी दलो को लगा कि पानी सिर से ऊपर बह रहा है अब   मोदी के विजय रथ को रोकना चाहिये / यह काम अरविन्द केजरीवाल कर सकते थे / ,लिहाजा सभी अपोजिट दलो ने और मुसलमानो ने बेहतर यही समझा कि मोदी को रोकने के लिये केजरीवाल को सपोर्ट किया जाय /  वाम दलो ने और ममता बनर्जी ने और अन्दर खाने कान्ग्रेस और दूसरे दलो ने  आप पार्टी को अपने खेमे के वोट केजरीवाल को दिलवा दिये /

चाहे जितनी भी चर्चा कर ली जाय, वाह वाही के कसीदे पढे जांय लेकिन आप की जीतने के मूल कारणो मे यही समाया है और इसी फैक्टर ने आप को जीत दिलायी है /

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