महीना: अप्रैल 2016

न्याय कथा ;[१]; न्यायाधीश भावुक होकर रो पडे ? इसमे नया क्या है ? रो तो हम रहे है जिनको न्याय नही मिल रहा है ?

अब  मै आज की तारीख मे ७१ साल का हू /

जब मै १४ साल का था तब पहली बार मेरे पिता जी मुझे कचहरी ले गये थे अपने साथ क्योन्कि उनको मुकदमे की पेशी पर  “हाजिर है” की बात कहनी होती थी / मेरे पिता जी बीमारियो से पीडित थे और  रोगी थे /  सहायता के लिये मुझे ले गये थे क्योन्कि मेरे बडे भाई को दूकान मे बैठना होता था ताकि रोजी रोटी चल सके और मुकदमे के कारण काम न बन्द हो /

१४ साल की उमर से लेकर आज मै ७१ साल का हो गया हू कचहरी से मेरा पीछा नही छूटा है / औसत मे अगर मै जोड़ बाकी करू तो हफ्ते मे दो दिन कचहरी के लिये आ जायेगा / यानी हफ्ते मे सात दिन होते है औसत मे दो दिन मेरे कचहरी मे गुजरते है / यह सिल्सिला अभी तक जारी है /

jagaranjustice

मेरा ज्यादातर समय उत्तर प्रदेश की जिला  उन्नाव और जिला कानपुर और जिला लखनऊ मे स्तिथि अदालतो में बीता है / मुकदमे दीवानी और फौजदारी और राजस्व के ही अधिक रहे है /

यह कहना मुश्किल होगा कि मुकदमे अगर दीवानी के है तो वे फौजदारी अथवा राजस्व से अलग होन्गे, लेकिन बुनियादी तौर पर यानी बेसिक स्ट्रक्चर पर देखे तो सभी का नेचर या प्रारम्भिक स्वभाव एक जैसा ही होता है / इसलिये कानून के मुताबिक जैसी जरूरत होती है वैसे ही साक्ष्य और अन्य जरूरी दस्तावेज मुकदमे के पक्ष अथवा विपक्ष मे अदालत को निष्कर्ष लेने मे सहायता पहुचाने के लिये वादी अथवा प्रतिवादी द्वारा जमा किये जाते है /

यह बहुत आसान नही होता है और बहुत सरल भी नही है जैसा कि मैने दो लाइनो मे कह दिया है / अदालत की प्रक्रिया अमीबा पैरासाइट की चाल जैसा है / इसे मैने कभी भी बुलेट ट्रेन की तरह की स्पीड से चलते नही देखा है /

मुकदमो की फाइनल निपटान मे देरी के लिये अथवा न्याय देने की प्रक्रिया मे  देरी के लिये  जो सबसे अधिक जिम्मैमेदार लोग है उनमे  सबसे पहले माननीय एड्वोकेट साहबान अथवा जिन्हे  वकील साहब कहा जाता है , ये होते है / कारण यह है कि चाहे वकील पक्ष का हो या विपक्ष का , ये सब मुवक्किलो का   आर्थिक शोषण  करते है /

पक्ष का वकील अगर चाहता है कि मुकदमा जल्दी निपट जाय या निपटाया जाय तो विपक्ष पार्टी का वकील चाहता कि मुकदमा लम्बा खींचा जाय और इस लम्बे खीचे जाने के चक्कर मे विपक्ष का वकील एक अप्लीकेशन से लेकर दूसरी और दूसरी से तीसरी और फिर यह सिलसिला बराबर चलने लगता है / एक तारीख के बाद दूसरी तारीख और फिर कितनी तारीखे पड़ती है  यह याद करने की वादी की हिम्मत नही होती है /

उदाहरण के लिये अभी मुकदमा चला भी नही है केवल वकील दवारा अपोजिट पार्टी को  कानूनी नोटिस भेजी गयी है / ३० दिन मियाद बीतने या जैसा आपने नोटीस मे कहा है , वह समय की मीयाद बीतने के बाद हफ्ते दो हफ्ते या एक माह बाद आपके द्वारा सक्षम अदालत मे   मुकदमा दाखिल किया गया है और हियरिन्ग की तारीख तय कर दी गयी है / दस्ती सम्मन अपोजिट पार्टीज को भेज दिये गये है / अपोजिट पार्टी ने ले देकर सम्मन वापस कर दिये है / दो महीने की लम्बी तारीख डाल दी गयी है / दो महीने बाद  फिर अदालत का आदेश हुआ कि दुबारा दस्ती स्म्मन भेजे जाय / दुबारा सम्मन भेजे गये , दुबारा यही हाल रहा, स्म्मन फिर वापस आ गये यह लिखकर कि जिस्के नाम का सम्मन है वह वहा नही मिले और उनके दरवाजे पर ताला लगा हुआ है , लिहाजा सम्मन वापस किया जा रहा है / इसी बीच किसी विवाद को लेकर वकीलो की हड़ताल हो गयी / तारीख पर पहुचे तो पता लगा कि ढाई महीने बाद की तारीख लग गयी है / तारीख पर पहुचने पर पता चला कि सम्मन दस्ती  [by hand] और डाक द्वारा यानी रजिस्ट्री / स्पीड पोस्ट   [by POST] द्वारा भेज दिये जांय / फिर तीन महीने की तारीख लग गयी / यहा जिस दिन तारीख पडी उस दिन पता चला कि दस्ती सम्मन और रजिस्टरी दोनो ही अदालत नही पहुचे है लिहाजा फिउर दो तीन महीने की तारीख दे दी गयी / नियत तारीख पर जाने पर पता चला कि रजिस्स्टर्ड पत्र मे लिख कर आया कि एक महीने के लिये बाहर गये है घर मे कोई नही है , लिहाजा पत्र वापस/ यह करते करते जब तीन साल बीत गये तब अदालत ने आदेश किया कि सम्मन का अखबार मे प्रकाशन किया जाय / अखबार मे परकाशन के बाद जब दो माह की तारीख पडी तब जाकर विपक्षी अदालत मे बजरिये वकील हाजिर हुआ / यानी तीन साल पहले आपने मुकदमा दाखिल किया जिसके खिलाफ वह तीन साल बाद अदालत मे हाजिर हुआ/

अब विपक्षी के वकील ने तरह तरह के बहाने लगाकर तारीखे लेना शुरू किया उदाहरण के लिये [१] कि वह किसी दूसरी अदालत मे व्यस्त है इसलिये नही आ सकता

[२] कि वह आज बीमार है और इसलिये अदालत मे नही आ सकता इसलिये दो माह बाद की तारीख लगा दी जाय

[३] कि उसके घर मे आज शादी वा अन्य समारोह है इस्लिये पेशी किसी दूसरी तारीख को दे दी जाय

[४] उनके बच्चे की तबियत खराब है , अस्पताल गये है

[५] कि वादी द्वारा मुकदमे PLAINT COPY  की कापी सम्नमन के साथ नही  भेजी गयी है कापी दिलवायी जाय

[६] कि आज पेशी के दिन सम्मन मिले है जवाब देने के लिये अगली तारीख दे दी जाय

यानी कहने का मतलब यह कि  विपक्षी वकील के पास मुकदमे को लिन्गर आन करने के लिये सैकड़ो बहाने होते है और अदालतो को यह सब मानना पड़्ता है , अदालते यह सब करती है /

जबाबुल जवाब और गवाही और बहस की प्रक्रिया मे तीन साल से लेकर पान्च साल तक निचली अदालत मे चक्कर काटना पड़ा तब जाकर आठ या दस साल बाद अपको फैसला मिला /

दस साल तक अपका विपक्षी मुफ्त मे  आपके घर मे रहता रहा मौज उड़ाता रहा और जब उसने देखा कि वह हार गया तो फिर रातो रात वह गायब हो गया, अब आप उसको तलाशिये कि वह है कहा जिससे आप अपने पैसो की वसूली करते रहे / जाहिर है कि आप कुछ भी नही प्राप्त कर पायेन्गे / उलटे मकान खाली कराने की प्रक्रिया मे दस बीस हजार और खर्चा करिये तब जाकर आप अप्नी जगह का कब्जा कर पायेन्गे / यह तो निचली अदालत का फैसला हुआ यानी मुन्सरिम स्तर की अदालतो का फैसला होने के बाद का हाल / उन्नाव कोर्ट मे मुन्सरिम कोर्ट को अब सिविल जज जूनियर कहा जाने लगा है /

अब और तमाशा देखिये / अगर अपका विपक्षी आपसे मुकदमा लड़्ने पर आमादा हो जाये तो आप अप्नी जगह इतनी जल्दी तो नही खाली करा स्कते है / अभी उसको लड़्ने के लिये जिला जज कै अदालत और फिर हाई कोर्ट मे अपील करने का पूरा पूरा मौका है जो तीन महीने के अन्दर का होता है / इसलिये किसी से आप जल्दी खाली कराने की उम्मीद मत करे क्योन्कि कानून ऐसा कहता है /

जिला अदालत स्टे दे देती है और फिर तीन चार साल मुकदमा और चलता है / यह तब है जब आप खुद बहुत मुस्तैदी के साथ अपने मुकदमे की पैरवी करे तब / अगर किसी दूसरे से पैरवी करायेन्गे तो फिर ईश्वर ही मालिक है आपके मुकदमे का कि कब फैसला होगा /

कुल मिलाकर लुब्बो लुआब यह कि १० से लेकर २० साल तक आप निचली और जिला अदालत मे चक्कर काटिये और उसके बाद यदि आप्का विपक्षी हाई कोर्ट चला गया तो २५ साल के बाद फैसला मिलेगा /  तब तक आपका विपक्षी / मुद्दालेह मौज मार्ता रहा और दोनो हाथो से अपको लूटता रहा और कानून ऐसा कि जैसे ही उसको पता चला कि वह हार रहा है तो किसी दिन रातो रात बोरिया बिस्तर बान्ध कर रफू चक्कर / आप खाली वकील की फाइल देखते रहिये और अपने कर्मो को दोष देते रहिये / इसके अलावा अप कुछ भी नही कह और कर सकते है /

इसे कहानी न समझियेगा , यह वास्तविकता है / मै तो यह त्रासदी प्रत्यक्षता से  भुगत रहा हू  /

न्याय कथा कि इस सिरीज मे मै अपने अनुभव आप सबसे शेयर करून्गा ताकि आप भी सचेत  रहे  /

 

 

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