Satya mev jayate

देश के मीडिया और इलेक्ट्रानिक चैनलों में “बुल बुलें” लड़ाने का मौसम

बुल बुल एक नाजुक सा पछी है , एक नाजुक सी चिडिया, देखने मे सुन्दर , काला रन्ग, नीचे के रोयें कुछ लाल रन्ग के, अवाज बहुत सुहानी, “पिट पिटो” “पिट पिटो” जैसी आवाज छोटी छोटी चोचो से निकल कर आती है, तो मन को हर लेती है /

बचपन में हमारे मुहल्ले मे लोगों को बुल बुल चिड़िया को पालने का शौक था / सैकड़ो हजारों की सन्ख्या मे लोग बुल बुल पालते थे / लोहे की सरिया से बने अड्डे जिन पर कपडे़ का मुलम्मा चढा होता था , उस पर बुल बुल चिडिया बैठी रहती थी / हम बहुत उत्सुकता के साथ उसको देखा करते थे /

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चिड़ी मार कभी कभी हमारे मुहल्ले के पास उन दिनों स्थापित बागीचों में बुल बुल पकड़्ने के लिये आते थे / ये चिड़ीमार किस तरह चिडिया पकड़्ते थे, यह सब देखने के लिये भारी सन्ख्या मे लोग इकठ्ठे हो जाते थे , और एक हुजूम सा इकठ्ठा हो जाता था / हमारे लिये यह बहुत कौतूहल की बात होती थी कि बुल बुल का शिकार या बुल बुल को पकड़्ने में कितनी और कौन कौन सी कलाबजियों और तरकीबो का इस्तेमाल किया जाता है /

सबसे जयादा मजा हम लोगों को बुल बुलों की लड़ाई देखने में आता था / आये दिन मोहल्ले में बुल बुल लड़ाने के competition  हुआ करते थे / बुल बुलो की लड़ाई देखने मे बड़ी भीड़   जम जाती थी / बुल बुलें पालने वाले खाने का चारा दिखाकर बुल बुलॊ को लड़ाते थे / लड़ाई में यह महत्व पूर्ण नही था  कि कौन जीता या कौन हारा, लड़ाई में यह महत्व पूर्ण था कि बुल बुलो की कलाबाजी कैसी है , पैतरे कैसे है, stamina  कैसा है आदि आदि /

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यह तो थी बचपन की बात / अब तो धीरे धीरे बुल बुलों का पालने और उनको लड़ाने का शौक खत्म हो गया  है , और इधर कई साल से बुल बुलें भी देखने मे नही आ रही है / ऐसा लगता है कि अब न तो बुल बुल पालने का शौक किसी को रहा और न उनको लड़ाने का /

लेकिन बुल बुलो की लड़ाई जैसा  वातावरण और नया स्वरूप इलेक्ट्रानिक चैनलों में देखकर , फिर से याद ताजा हो गयी कि बुल बुल न सही बुल बुलो जैसी लड़ाई देखने का मजा अब इलेक्ट्रानिक चैनलों ने पैदा कर दिया है , जिनमें बुल बुलें तो नही , विभिन्न प्रकार के मानव रूपी बुल-बुली नेता, पत्रकार , विशेष्ग्य, और न जाने कौन कौन से स्वयम्भू  experts  एक साथ पैनल बनाकर  और बुल बुलों को लड़ाने जैसा मानव एन्कर द्वारा कोई न कोई सवाल रूपी फुल्झड़ी या सवाल रूपी चारा छोड़ते हुये आपस में “फिट पिटो”  पिट्पिटो” जैसा जोश भरते हुये आपस में ही एक दूसरे को वाक-युध्ध और कटाजुध्ध जैसी लड़ाई को कराने का मैदान बना देते है और आपस मे ही एक दूसरे की “पिट- पिटो”  को कराते रहते है /

इस तरह की पन्चायत और झन्झट करने की कवायद से क्या नतीजा मिलता है ? इसे समझना बहुत दुरूह कार्य है / Times Now चैनल के बुल-बुल लडैत किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिये जब दूसरी वहां मौजूद देशी और विदेशी बुल बुलों से सवाल करते हैं और जब दूसरी बुल बुल जैसे ही उत्तर देना शुरू करती है , वैसे ही बुल बुल लडैत उनकी जबान पर लगाम लगा देता है और बोलने नही देता , जोर जोर से हाथ हिलाकर इधर उधर गर्दन मे झटके देकर  खुद ही कसूर वार साबित करने की कोशिश करने लगते है / जब तक जवाब देने वाला अपनी बात पूरी करे, बुल बुल लडैत उनकी ही जबान बन्द कर देता है /

लगभग सभी इलेक्ट्रानिक चैनलों में बुल बुल लड़ैत किसी न किसी मुद्दे को लेकर कई बुल बुलों को बैठाकर आपस मे चारा दिखाकर कर “पिट पिटो ” “पिट पिटो” कराया करते हैं / इस तरह की वाक वाचालता से क्या हासिल होता है, यह तो  चैनल वाले जाने / पत्रकारिता की इस तरह की नई विधा  से मीडिया  जनता को क्या बताना चाहता है ? क्या सन्देश  जनता को मिलता है ? मानव मनोवैग्यानिक तथा मानव स्वभाव चाहता  है कि उसकी उत्सुकता का थोड़ा सा appeasement  हो , वह शायद इस तरह की वाक युध्ध और वाक्पटुता को प्सन्द करता है / फिर भी  मुझे नही लगता कि इस तरह की कवायद से जनता पर कोई गहरा असर पड़्ता हो या केन्द्र अत्र्हवा राज्य सरकार या सरकारें बहुत सन्जीदा होती हो /

हां, चैनलों द्वारा प्रायोजित इस  तरह की बुल बुल लड़ाने की प्रक्रिया या BUL BUL FIGHT  को “दिमागी अय्याशी  करने का अड्डा” जरूर कह सकता हूं / जहां कुछ खास “घडियाली दिमाग” वाले ही इक्ठ्ठा होते है , बोलते है, opinion देते है , लेकिन ये जो भी कहते है, बोलते है , वह सब आम जनता की बात नही होती /

इसे कुछ ऐसे समझना चाहिये कि जिस विषय की बुल बुल चर्चा की जा रही है  , वो चर्चा पैनल द्वारा भटक कर “सिर दर्द मुर्गे को क्यों हुआ “ की ओर भटक कर मुड़ जाती है  और  फिर इस बारे में वाक युध्ध जोर शोर से  होने लगता है /  जबकि इस वाक युध्ध के केन्द्र में असली मूल मुद्दा, जिस पर वास्तव मे चर्चा होनी चाहिये थी, वह  है “कुत्ते की बवासीर का इलाज कैसे किया जाय “, जिसकी कोई  पैनलिस्ट चर्चा तक नही करता है /

मैने देखा है कि बहुत इन्टीरियर में बसे सुदूर गावों मे और ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में , जहां आना जाना भी बहुत मुश्किल भरा काम है, वहां अधिकतर लोग FREE AND UNPAID ELECTRONIC   CHANNEL यानी मुफ्त और बिना पैसा  देने वाले चैनल देखते है / इसके लिये लोगों ने अपनी छतों पर DISH ANTENNA  लगा रखे है / २ या तीन प्रतिशत लोग paid channel देखते है / लेकिन बिजली के  न रहने पर और समय कुसमय पर बिजली के आने जाने से  टी०वी० चैनल  लोग नही देख पाते हैं / रेडियो सुनने का रिवाज बहुत कम हो गया है , फिर भी जिन्हे उत्सुकता होती है , वे रेडियो सुनते हैं / अधिकतर ग्रामीण और कस्बाई लोग नाटक, सोप ओपेरा, ड्रामा और बालीवुड के प्रोग्राम देखते हैं /टी०वी० चैनलों द्वारा प्रस्तुत की जा रही बुल्बुलों की लड़ाई जैसे कार्य क्रम BULBUL FIGHT जैसी पन्चायत  इन क्षेत्रों में कोई नही देखता है, इसका कारण है कि गावों मे इस तरह की पन्चायत आम है और ग्रामीण इलाकों की राज्नीतिक दॄष्टिकोण की सोच के समीकरण देश के शहरों की अपेक्षा गावों की परिस्तिथियों से बिलकुल जुदा होती  है /

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कुकिन्ग गैस ब्लैक करने मे सबसे अव्वल ; कानपुर शहर का बदनाम इन्डेन गैस डीलर “सुमीता गैस एजेन्सी”

कानपुर शहर की जिस इन्डेन कुकिन्ग गैस डीलर के बारे मे देख रहे है  और पढ रहे है आप , वह इस शहर का नम्बर एक कुकिन्ग गैस यानी रसोई गैस को ब्लैक में बेचने वाला कारोबारी है / इस रसोई गैस यानी कुकिन्ग गैस कम्पनी की अनियमितताओं और गैस को ब्लैक में बेचने के बारे मे पचासों बार कानपुर शहर के दैनिक अखबारों मे समाचार छप चुका है / शहर के किसी भी इस गैस आपूर्ति कम्पनी के मेरे जैसे उपभोक्ताओं से पूछ लीजिये और जानकारी करिये कि इस एजेन्सी की गैस , जो उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जानी चाहिये वह जाती कहां है ?  घर में गैस की आपूर्ति नहीं होती और न इसके करमचारी घरों में गैस सिलिन्डर लगाने आते है, तो बुक की गयी गैस जाती कहां है ?

पिछले दो द्शकों से मै इस गैस एजेन्सी का उपभोक्ता हूं / इस गैस एजेन्सी का रिकार्ड है कि इसने शायद  ही एक साल में मुझे तीन या चार गैस सिलिन्डर कायदे से भेजे हों / मैने २३ अक्टूबर २०११ को इस गैस एजेन्सी में खुद जाकर अपनी गैस की बुकिन्ग कराई थी, लेकिन एक महीना हो गया अभी तक गैस नहीं आई / यह पहली बार नही हुआ है / ऐसा हर बार होता है और जब भी मै गैस बुक कराता हू, डेढ महीने से लेकर चार महीने में गैस की आपूर्ति हो पाती है / 

अब इनके गैस न भेजने के तर्क भी पढ लीजिये जो इस एजेन्सी के मालिकों और करमचारियों ने गढ रखे हैं /
पहला तर्क-१ ; आपके यहां हमारा कर्मचारी गैस लेकर गया था, लेकिन आपके घर में कोई नहीं था इसलिये गैस वापस आ गयी, इसलिये आपकी गैस कैन्सिल कर दी गयी है / आपको दुबारा गैस बुक करानी पडेगी /

दूसरा तर्क -२ ; आपकी गैस की पर्ची भेज दी गयी है / जब तक आप घर पहुचेन्गे आपकी गैस लग गयी होगी / घर आने पर पता चला कि गैस एजेन्सी से कोई भी बन्दा गैस लगाने नहीं आया / मुझसे इस गैस एजेन्सी के करमचारियों ने झूठ बोला /

तीसरा तर्क-३ ; आपके घर जो सिलिन्डर भेजा गया था उसमें गैस की लीकेज निकल आई, गैस लगाने वाले ने देख लिया था इसलिये आपके घर गैस नहीं लग पायी / पब्द्रह दिन बाद जब सिलिन्डर आयेगा अब तो तभी आपके घर गैस लग पायेगी /

और भी इसके जवाब देखिये………

 तर्क ४-  गैस लगाने वाला आपके घर गया तो था, लेकिन आपके घर में गैस का सिलिन्डर खाली नहीं था, इसलिये आपकी गैस वापस आ गयी है / अब आपकी गैस कैन्सिल हो गयी है / आपको गैस चाहिये तो आपको गैस की बुकिन्ग दुबारा करानी पडे़गी और फिर डेढ से महीने में गैस भेजी  जायगी 

 तर्क ५- इन्डेन गैस का प्लान्ट बन्द है , इसलिये गैस नही आ रही है / कभी बताते है हड़्ताल हो गयी है / कभी बताते है गैस की सप्लाई नही मिल रही है इसलिये प्लान्ट का काम बन्द है , कभी बताते है , अधिकारियों ने माल नहीं भेजा, कभी बताते है दो हफ्ते की मसक्कत के बाद २० सिलिन्डर भेजे है जो आपके आने से पहले ही लोगों को बान्ट दिये गये / कभी बताते है एक हफ्ते से कोई गैस सिलिन्डर की खेप नहीं आयी है /

 तर्क ६- गैस लगाने वाले आदमी ही पिछले १० दिनों से नहीं आ रहे है / आपकी पर्ची उनके पास है / पता कर रहे हैं कि आपकी गैस का क्या हुआ ?

 यानी गैस न देने के लिये तरह  तरह के यानी एक के बाद दूसरे बहाने इनके पास मौजूद हैं /

 अब सवाल यह है कि जब इस गैस कम्पनी के उपभोक्ताओं के पास गैस नहीं भेजी जाती या गैस नहीं दी जाती या गैस उप्भोक्ताओं को गैस नहीं मिलती , तो यह जाती कहां है और consume  कहां की जाती है ?

 सुमीता गैस एजेन्सी जहां पर स्तिथि है , इसे यदि केन्द्र बिन्दु मान लें तो सारी बात समझ में आ जायगी / इस गैस कम्पनी के २ या तीन किलोमीटर के वृत्ताकार दायरे में खाने की चीजें बनाने वालों के कारखाने है / ये कारखाने बहुत सी खाने पीने की चीजें बनाते है /  ऐसे  कारखानों की भरमार है जहां पेठा, दालमोठ, नमकीन, गजक, शक्कर से बनाये जाने वाले व्यन्जन, टाफी और खाने के लिये बहुत से आईटम हैं /

 ऊपर बताये गये दायरे में बहुत से रेस्टारेन्ट, खाने पीने के स्टाल, होटल और कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन के नजदीक की खान पान की दुकानें स्तिथि हैं /

 जहां यह गैस कम्पनी है , यह इलाका बहुत congested और highly populated है / ऐसे हजारों की सन्ख्या में उपभोक्ता है जिनके पास किसी भी गैस कम्पनी की कनेक्सन नहीं है /  यह सब लोग गैस ब्लैक में खरीदते है /

 बहुत से car owner अपनी अपनी कारें और वेहिकिल कुकिन्ग गैस से चला रहे है / इनके पास कोई अधिकृत गैस कनेक्सन नहीं है / इसके अलावा ४ किलो वाले छोटे सिलिन्डर जिन्हे “बच्चा सिलिन्डर”  कहा जाता हैऐसे सिलिन्डरों को भरने के लिये बड़ी सन्ख्या में गली मुहल्लों में दुकाने हैं /

यही कुकिन्ग गैस “गैस से पानी गरम करने” के लिये उपयोग किये जाते है तथा गैस से चलने वाले “जेनेरेटर” भी चलाये जाते है /

इस कम्पनी से गैस आपुर्ति न मिलने पर मै दो बार जिला पूर्ति अधिकारी के दफ्तर भी गया / इसके अलावा मैने इन्डियन आयल के अधिकारियों को लखनऊ तथा कानपुर दोनों जगह सम्पर्क किया / इससे इतना हुआ कि  मेरी शिकायत तो नहीं दर्ज की गयी , उल्टे वहां के क्लर्कों ने फोन करके मेरी गैस जरूर लगवा दी, लेकिन कार्यवाही के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ  और सब वैसा ही चलता रहा , जैसा आज तक चल रहा है / इसमें तनिक भी बदलाव नहीं आया है /

इन्डेन गैस के अधिकारियों से कई बार कहा कि मेरी गैस का कनेक्सन किसी दूसरी गैस एजेन्सी में ट्रान्स्फर कर दे, लेकिन यह भी नही हो पाया / 

मैने इस कम्पनी के मालिकों से गैस न मिलने की शिकायत को बताने के लिये जब सम्पर्क करना चाहा  तो पता चला कि वे यहां रहते नहीं हैं और इसीलिये कम्पनी में क्या हो रहा है, यह देखते तक आते नहीं है, क्योन्कि इस कम्पनी के मालिक लखनऊ में रहते है / कुछ दिल्ली में रहते है और कुछ विदेशों मे रहते है / इनके परिवार की राजनीतिक पहुन्च बड़े ऊन्चे स्तर की है तथा कई नौकर शाह इनके रिश्तेदारों मे हैं /

गैस कम्पनी में देख्र रेख के लिये मुझे दो लोग मिले , एक हैं “हसीन मियां” और दूसरे हैं “शर्मा जी”  / ये दोनों सज्जन एक तो मिलते नहीं हैं क्योंकि इनके मिलने का समय बहुत अनिश्चित है /

The Cooking Gas Cylinder supply cost is Rs 400/- [Rupees FOUR HUNDRED] per cylinder, but in Black, it costs Rs 600/-  [Rupees SIX HUNDRED]  to Rs 1000/-  [Rupees ONE THOUSAND] per cylinder. In case of Gas unavailability due to any reason or in Gas crisis situation , the cost of culinder raises high accordingly. Many Hotels, Restaurants, Food Industries, private persons etc etc are not using COMMERCIAL GAS CYLINDER , beacause they are more costly , comparative to cooking gas, which is much cheaper in rates and more in gas quantity. 

हलान्कि पास में ही और कुछ गैस एजेन्सियां है, इसमें दो इन्डेन की और एक भारत गैस की है , लेकिन इन गैस कमपनियों के  कन्ज्य़ूमर बताते है कि उनके यहां गैस कम्पनी में गैस बुक कराने के दिन से एक सप्ताह के अन्दर गैस मिल जाती है / किन्ही विशेष अड़चनों में दस  पन्द्रह दिनों के अन्दर गैस की आपूर्ति घरॊ में कर दी जाती है /

इस गैस की कम्पनी की अन्य शिकायतें निम्न वेब-साईट पर भी देखें /

www.client-complain.com
www.consumercomplaints.in
www.india-complaints.com
www.worstscams.com 

क्या अब इस देश के नेता “लोकतान्त्रिक तानाशाही” पर उतर आये हैं ?


          

 

 

 

 

इस देश की जनता का सबसे पहले सुधरना जरूरी है

हम चाहते है, इस देश का हर नौजवान चाहता है, इस देश का हर नागरिक चाहता है कि हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की करे । लेकिन क्या ऐसा होना सम्भव होगा ?

शायद हम विचार कर रहे होन्गे की “नही” । सोचें भी क्यों न , हर तरफ़ लूट खसोट, मारामारी का बाज़ार गरम है, जिसको जहां मौका मिल रहा है , वह वहां हाथ साफ़ किये ले रहा है । चोर बाज़ारी, मुनाफ़ाखोरी बढ्ती चली जा रही है ।……….और अफ़सोस की बात ………हमारे विद्वान,कर्मठ, वाक पटु, बातों को इधर उधर घुमाने व्वाले नेता और अपना उल्लू सीधा हो जाये ऐसे राज्नीतिक दलों के कान में रुई घुस चुकी है उनकी आन्खों में ऐसा बवाल पैदा हो गया है जिससे उनको कुछ खराब नज़र ही नहीं आता ।

जाहिर है, ये नेता जो आज कुर्सी पर बैठे हैं, वे अपने आप तो वहा पहुंचे नही, उनको भेजा तो हमने आपने है । अब वे कुर्सी पर बैठ कर भ्रस्ताचार कर रहे है तो इस  भ्रष्ट आचार को करने की चाभी देने की   जिम्मेदारी किसकी है ?

यह हम आप हैं जो देश को नरक में धकेल देने के लिये जिम्मेदार है ?

देश का सुधार भी हमारे ही स्तर से यानी जनता के स्तर से होगा, इसलिये यदि देश का सुधार चाहते है तो पहले सुधार का चरण यहीं से शुरू होगा तभी सबका कल्याण है ।

Rajnitik Ghatana kram ka tezi se badalana

Is samaya desh mein Rajnitik ghatana kram bade tezi se badalatey chale ja rahe hain, media har pal mein kahan kya ho raha hai, in par drishti jamaye huye hai. Nisandeh , kab kaya ho jaye isaka koi bharosa nahin, kab kaun kahan palti mar jaye, kaha nahin ja sakata hai,

 

Yeh desh ki rajniti ke liye shubh lakshan builkul nahin hain. yah to narak mein dalane wali stithi hai, jis desh ka koi moral na ho, charecter na ho, imandari na ho, naitik muly na ho, vahan kaya hoga ? Kewal apane phayade ke liye , desh ke rajnitik dal yah sab kar rahe hain ya phir unake pichche ki kya mansha hai , kya koi batala sakata hai ?

 

Mujhe lagata hai ki apane swarth ke liye, ye neta desh ke saath kuchch bhi kar sakatey hai, ye kisi na kisi ke haath bike huye log hain, aaparadhik prakrati ke netaon ka daman thama ja raha hai , isase Congress kya sandesh desh ke logon ko dena chahati hai ? Un logon ke daman ko thama ja raha hai, jo apani gair kanooni manshaon ko pura karana chahatey hain, ye kaun sa congress ka netratva aa gaya hai ?

 

Neharu ji ke jamane mein aisa nahin hua, neharu ji se lekar Indira gandhi tak aisa kabhi nahin hua, is tarah ki pahal ki shuruaat Narsimha Rao ke shashan kal mein hui, aur is nazir ne Kharid Farokhta ka bazar SANSAD tak ko bana dala. Congress ka aisa vidroop chehara maine aaj tak nahin tekha. Isase achcha tha ki Manmohan singh apani naitik jimmedari nibhatey huye, gaddi chchod dete, kam se kam desh ke rajnitik aur naitik mulyon ki surkshsha to hoti ?

 

Ooont kis karavat badalega, yah koi nahin janata ? Koi jite ya haare, isase koi pharaka nahin padata, lekin DEMOCRACY KI aisi CHCHICHCHALEDAR  dekhakar man mein pida avashya hoti hai.

Dr. Manmohan Singh ki Sarakar girane ke baad , Mayawati, Pradhan Mantri Banegi

Lakshan dekhakar to yahi lagata hai ki , Mayawati, hi agali Pradhan Mantri banegi. Yah ek chauka dene wali baat huyi hai, sabhi bhauchakke hokar rah gaye hain, Mayawati bahut strong hokar ubhar aayi hain aur ab jo samikaran benenge ve mere hisaab se bahut jabardast honge.

 

Mayawati ka naam uchchala gaya hai, Bampanthiyon ki taraf se, isaka matalab yah hua ki Mayawati ko left ka saath mil chuka hai, Left ko pichche se support mil raha hai BJP ka, khud Mayawati ke bhi sansad unake saath hain. NDA yani Rajag ke sabhi ghatak dalon ne apani pratibadhdhata saath saath rahane ki dikhai hai, isase lagata hai ki NDA ki tut ki koi sambhavana nahin banati.

Mayawati ke sabase saath , jo jabardast gun hai, wah unaka Dalit hona, mahila hona aur ek sakhta prashashak hona hai, unake abdar nirnaya lene ki chchamta bahut jabardast hai, Panditon aur Daliton ki chemistry unake saath hai, isaliye ye baatein unake paksha mein jati hain.

 

Dusarti baat yah ki Yadi Mayawati Pradhan Mantri banati hain, to ve Bharat Desh ki dusari Mahila pradhan mantri hongi, kyonki Indira Gandhi ke baad se koi bhi mahila is pad par nahin baith saki hain, ek baat jo mahatwapoorna hai, vo yah ki Mayawati Pahali DALIT Pradhan Mantri Banegi, jo itihas mein yaad rakhane jaisa karya hoga, yah bahut badi baat hai, ADMK, aur dusare South India ke dal is baat par gaur karenge aur mujhe lagata hai ki ve support karenge,

 

Lekin, agar, MAYAWATI, Pradhan mantri nahin bhi ban pati hain, ti nishchay hi dalit rajniti ek anokhe mod par chali jayegi, aur yah tay hai, ki bade bade diggaj is andhi mein ud jayeinge.

 

Agar sarkar banati hai Mayawati ki, to samarthan sabhi dalon ka hoga, kuchch bahar se samarthan denge, kuchch sarkar mein rahakar denge. BJP, shiv sena  aur bam dal shayad na shamil hon, lekin chchote chchote rajnitik dal isamein shamil honge, nirdaliya bhi mantri banenge, chchut bahiye bhi minister banenge, aur yah sarkar ek saal tak ghasitate ghasitate chal jayegi, isaka phayada ye sabhi ralnitik dal uthayenge, kyonki satta prapti ka yah samikaran bahut jabardast hai.

 

Congress aur unako support karane wale sabhi dalon ki mitti palit hona tay hai, unaka bhavishya andhakar may hai, jo congress ke paksha mein jayenge, ve buri tarah se harenge , yah tay hai.

Pakistan ke rajnitigya aur neta abhi Miyan Musharraf ko President ke pad par banaye rakkhein

Miyan musharraf Pakistan desh ke President hain, jaisa ki khabare aa rahi hain unase , yahi andaza lag raha hai ki shayad wahan ke rajnitigyon ka ek gut Miyan Musarraf ko hatane par tula hua hai.

Yahan ek baat Pakistan ke rajnitigya samajh lein , Miyan Musharraf ko agar gaddi se hataya to Pakistan kisi ke sambhale nahi sambhalega. Halat itane bure ho chuke hain ki Miyan Musharraf hi use sambhal pa sakatey hain. Unhe pata hai ki kahan kya ho raha hai, wahan ki kya paristhitiyan hain,  aur isase kaise nipta ja sakata hai. Agar Miyan Musharraf hatey to Pakistan ke bahut bure hal ho jayeinge.

Behatar yahi hoga ki miyan musharraf  ko abhi gaddi par baithayein rakkhein, unhe hatayein nahin. Samajhdari isi mein hai ki Pakistan ke rajnitigya apani apani vyaktigat mahatvakanchcha ko bachaye rakkhe, jab mauka aave aur desh ki stithi dharre par aa jaye, tab Miyan Musharraf ko hatane ke liye vichar karein, isase pahale nahin. Is samay Pakistan apani aantarik samsyyon se jujha raha hai, vahan halat bahut kharab ho rahe hain, aise mein Rajnitigya pahale in samasyon se nipatey, baad mein kuchch aur sochein. Koi bhi rajnitigya Miyan Musharraf ko hatane ke liye , philhal  koi muchchon ki ladai ka prashna na banve, yahi achcha hoga.