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“कुकिन्ग गैस सब्सीडी” फौरन हटाकर खुले बजार में रसोई गैस बेची जाय…..!

इस साल के बजट में मै वित्त मन्त्री से अनुरोध करून्गा कि रसोई गैस की सब्सीडी खत्म करके जितना वास्तविक मूल्य रसोई गैस का बनता हो, उतने में गैस सिलिन्डर को खुले बाज़ार मे बेचा जाना चाहिये /

हकीकत यह है कि रसोई गैस के सिलिन्डर, हर गैस एजेन्सी वाला, ७० प्रतिशत ब्लैक में बेचता है और केवल ३० प्रतिशत घरों में सप्लाई हो पाती है / ब्लैक में या कालाबाज़ार में गैस सिलिन्डर की कीमत गैस के मिलने या कम मिलने की सूरत में घटती बढती है / एक सिलिन्डर की कालाबाजारी में कीमत ६०० रुपये से लेकर १२०० रुपये तक है / लोग खुसी से पैसा देकर सिलिन्डर खरीद लेते है / देहात और ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरों से सिलिन्डर ६०० रुपये या ७०० रुपये में बहुत प्रसन्न्ता के साथ खरीदकर अपने गावों में शहरों से लाद्कर और अतिरिक्त १०० रुपये खर्च करके अपने गन्तव्य तक ले जाते हैं /

मै खुद कई बार गैस एजेन्सियों के चक्कर में सिलिन्डर लेकर मरामारा फिरता रहा और गैस गोदाम के कई कई चक्कर लगाने के बाद गैस लाने का खर्चा सिलिन्डर की कीमत के बराबर करना पड़ा / यानी ४०० रुपये की गैस और ४०० रुपये रिक्सा का लाने और लेजाने के लिये किया गया खर्चा, जो कुल मिलाकर ८०० रुपये हो जाता है / यह मेरा हाल नही है, कमी वेशी सभी उपभोक्ताओं का यही हाल और दुर्दशा है / सबसे बड़ी बात यह है कि पैसा तो खर्च होता ही है , सारा दिन गैस के जुगाड़ करने मे ही चला जाता है, इससे आमदनी की आमद भी बाधित होती है /

इस कम्प्य़ूटर के युग में जब कि हर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसे माहौल में रसोई गैस का समय से न मिलने का व्यवधान मानसिक तनाव के पैदा होने के साथ साथ पारिवारिक क्लेश और रोजाना के कार्य कलापों को अव्यवस्थित करता है , इस कारण से लोग यही सोचते हैं कि थोड़ा ज्यादा ही सही गैस सरलता से और बिना किसी बाधा के मिले चाहे उसकी कितनी भी कीमत क्यों न हो ? ताकि जीवन शान्त मय और तनाव रहित हो , भले ही इसके लिये अतिरिक्त कीमत क्यों न चुकानी पडे़ /

मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह रसोई गैस की सब्सीडी हटाकर फौरी तौर पर खुले बाज़ार मे गैस सिलिन्डर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे और हर घर के लिये सबसे आवश्यक वस्तु को सरलता से और आवश्यकता के समय में या जरूरत के अनुसार तुरन्त मिल जाये ऐसी व्यवस्था का उपाय करे /

क्या मायावती की सरकार उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी ?

चुनाव के बाद सुश्री मायावती की पार्टी बहुजन समज पार्टी फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने वाली है /

मै जहां जहां भी गया, वहां ओ०बी०सी० पिछडे़ और दलितों से मेरी बात हुयी है उससे यही निष्कर्ष निकल रहा है / अन्दर खाने सभी यही स्वीकार कर रहे हैं कि मयावती के ऊपर जितने भी राज्नीतिक दल है , उनके द्वारा कीचड़ उछालने का यही मतलब है कि उनको जबरन दबाया जा रहा है / रही सही कसर चुनाव आयोग के फरमान ने पूरी कर दी / यह ठीक उसी तरह से है जैसे कि गुजरात में सोनिया गान्धी ने जब नरेन्द्र मोदी को “मौत का सौदागर ” कह दिया था / इसी एक जुमले से सभी गुजरात के लोग चिढ गये और फिर नतीजा सबके सामने आया / यही कहानी मायावती फिर से उत्तर प्रदेश मे दोहरा रही है / सभी दलित समाज और पिछड़े वर्ग के लोग अपने को चुनाव आयोग के फरमान से अपमानित मह्सूस कर रहे है /

वे यह समझ रहे हैं कि कान्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी और समाज वादी पार्टी के नेताओं ने मिलक्रर सुश्री मायावती जी की शिकायत करके उनके नेता की बेइज्जती कर दी है , अब वे देश और दुनिया को दिखा देन्गे कि उनके नेता की इस बेइज्जती का बदला वे किस तरह से ले सकते हैं / यह अब दलितों के लिये मूछ ऊन्ची और बेइज्जती से नाक कटने से बचने का सवाल हो गया है /

मैने जहां तक नम्बरों का खेल समझा है, इस चुनाव में मुख्य रूप से पहले [१] नम्बर पर बसपा रहेगी दूसरे नम्बर [२] पर समाज वादी पार्टी आयेगी , तीसरे [३] नम्बर पर कान्ग्रेस आयेगी और चौथे [४] नम्बर पर भाजपा रहेगी /

आम जनता और आम लोगों के अपने अपने तर्क है / भाजपा के बारे मे सभी वर्ग के लोगों का मानना है कि ये सब कान्ग्रेस-कल्चर के फालोवर हो गये हैं, इनकी सरकार के मन्त्रियों ने कान्ग्रेस के मन्त्रियों से दो कदम आगे जाकर भ्रस्टाचार किया है और अपनी नैतिकता और ईमान्दारी का कोई उदाहरण तक नहीं छोड़ा है, जब वोट देना है तो इनको ही क्यों ? मुसलमानो का वोट सबसे पहले और सबसे अधिक समाज्वादी पार्टी को और उसके बाद कान्ग्रेस को और उसके बाद बसपा को मिलेगा /

मेरा ख्याल है कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बसपा की ही बनेगी, मायावती जी फिर मुख्य मन्त्री होन्गी / यह जरूर हो सकता है कि इस बार मायावती का सन्ख्या बल कम हो जाये और बहुमत के लिये उनको निर्दलीय या छोटे दलों से सहयोग लेना पड़े /

महात्मा गान्धी के पड़्पोते श्री तुषार गान्धी इस देश के नेताओं से क्या कहते है?

जब तब कभी अचानक ऐसा मौका मिलता है और कान्ग्रेस के नेताओं को अपना उल्लू सीधा करने के लिये और अपना सामूहिक फायदा ऊठाने का त्योहार भांप लेने का बक्त “बाई दा वे” जब मिल जाता है , तो ये सब एक स्वर में “महात्मा गान्धी” की शरण मे जाने से जरा भी नहीं हिचकते / वन्शवादी और “टाईटिल धारी” गान्धी और उनके चेलों ने कभी देश की दुर्दशा पर आन्सू भी नहीं बहाये होन्गे /

लेकिन १०० प्रतिशत असली और १०० टन्च महात्मा गान्धी के परिवार के एक सदस्य और महात्मा गान्धी जी के पड़्पोते – The Great Grandson of Mahatma Gandhi – श्री तुषार गान्धी जी का मन इस महान देश की दुर्दशा देखकर क्या कहत्ता हैं और क्या लिखता है, यह दैनिक जागरण , कानपुर के दिनान्क ०१ दिसम्बर २०११ के सम्पाद्कीय पेज पर छपा है, जरा बानगी इस स्कैन की गयी कापी में देखिये /


एक वह समय था , जब भारत से विदेशी खदे़ड़े जा रहे थे और इस महान देश के लोग इन सबको खदेड़ने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगाये दे रहे थे /

आज हालात यह है कि खुद सरकार ही इन विदेशियों को देश में व्यापार जमाने के लिये अप्नी पूरी ताकत के साथ एड़ी चोटी का जोर लगाये दे रही है /

और देश के लोगों को समझाया जा रहा है कि इन विदेशियों को लाने से महन्गायी कम होगी और किसानों को फायदा होगा / ऐसा तो पिछले ६० सालों से तर्क सुनते चले आ रहे है ? लेकिन हकीकत सभी जानते है / बैन्कों का जब राष्ट्रीय करण किया जा रहा था , तब कहा गया कि लोगों को कर्ज दिया जायेगा, किसानों को खेती के लिये और उद्योंगों को बढाने के लिये कर्ज और पून्जी दी जायेगी / क्या यह सब हुआ ? अभी का उदाहरण ले लीजिये, “न्य़ूक्लीयर डील” मे नेताओं की डील हो गयी और जनता को बताया गया कि इससे फ़लाने फ्लाने फायदे होन्गे / क्या ये सब हुआ ?

कान्ग्रेस पार्टी से लोगों का भरोसा अब उठता जा रहा है / आज तक जितने भी वादे किये गये , वे सब कागजी निकले / श्री मनमोहन सिघ की सरकार के अधिसन्ख्य आश्वासन जो भी दिये गये थे , ये सब के सब कोरे आश्वासन निकले /

लोगों का भरोसा इस सरकार के कार्य कलापों से हिल गया है और मन में अविश्वास बैठ गया है /

आर०टी०आई० सूचना के लिये रुपया २०००/- [ रुपया दो हजार ] मान्गे गये ; नगर पालिका दफ्तर से रुपया दस का IPO और application भी गायब हो गयी

अगस्त २०११ में मैने एक मुकदमे के सिलसिले में R.T.I. की सूचना के तहत जिला: उन्नाव , उत्तर प्रदेश की एक नगर पालिका में application दी थी / कुछ दिन बाद नगर पालिका के दफ्तर में जाने पर पता चला कि मेरी application मय दस रुपये के IPO के गायब है / सम्बन्धित क्लर्क ने कहा कि दुबारा application दीजिये / दुबारा application दी गयी /

आर०टी०आई० की सूचना की मुझे जरूरत इसलिये पड़ी क्योंकि मेरा एक किरायेदार मेरा दो लाख चालिस हजार रुपये का किराया लेकर रफू-चक्कर हो गया / मुकदमा लड़ता रहा और किराया , कचेहरी में जमा नहीं किया और कानून की कमजोरी का फायदा उठाकर भाग गया / किरायेदार से पैसा वसूली के लिये जिला उन्नाव की अदालत में मुकदमा चल रहा है / मेरे वकील नें कहा कि
इस किरायेदार के मकान और जायदाद के लिये पन्चशाला कागज की जरूरत है, जो नगर पालिका के दफ्तर में ही मिलेगा /

मैने सम्बन्धित क्लर्क से बात की तो उसने बताया कि जिस व्यक्ति के मकान का पन्चसाला चाहते है , उसने अपना टैक्स जमा नहीं किया है, इसलिये मिलेगा नहीं / अब आपके पास यही आर०टि०आई० का रास्ता बचा है / इसके लिये आपको रुपया २०००/- खर्च करने पड़ेन्गे, तभी यह सूचना आपको मिल पायेगी /

यह वही समय था “अन्ना हजारे” के दिल्ली के रामलीला ग्राउन्ड में चल रहे “भ्रष्टाचार हटाओ” आन्दोलन का, जिसमें अन्नाजी, भूख हड़्ताल कर रहे थे / मैने उनाव जाकर अपने वकील से पूरी बात बतायी और यह भी बताया कि रुपया २०००/- सूचना देने के लिये मान्गे जा रहे है /

वकील साहब ने कहा, ” पन्चशाला नहीं मिल रहा है तो रहने दीजिये, आर०टी०आई० लेने में इतना अन्धेर खाता मचा है, आप एक भी पैसा मत दीजिये, आप यह सब रहने दीजिये, किरायेदार की मकान की स्तिथि का पता कर लीजिये, और अगली तारीख में मुझे बता दीजियेगा” /

यह उदाहरण यही बताता है कि lower beurocracy मे जिस तरह का भ्रष्टाचार घुस गया है, उससे कैसे निपटा जाय ? यहां तो हाल यह है कि जिस सरकारी द्फ्तर मे काम के लिये जाता हूं , वहीं दफ्तर का हरेक सरकारी मुलाजिम मुंह खोले बैठा है कि जो आया है उसकी जेब कैसे साफ करी जाय?

चाहे वह केन्द्र की सरकार हो या राज्य की सरकारें, चाहे वह कोई भी राज्नीतिक दल हो, कोई भी नहीं चाहता कि इस देश से भ्रष्टाचार दूर हो / मुझे अविश्वास जैसा लगता है कि जिस तरह का सरकार जन लोक्पाल बिल ला रही है , उससे देश के लोगों का कोई भला होगा, बल्कि मुझे ऐसा लगता है कि इस बिल के पास हो जाने के बाद भ्रष्टाचार और ज्यादा बढ जायेगा / क्योंकि “बोफोर्स कान्ड” के उजागर होने के बाद सरकारी दफ्तरों में जिस तेजी से सुविधा शुल्क और घूस देने कि रकम में इजाफा हुआ है, यह मै तब से आज तक देख रहा हू और देखता चला आ रहा हूं / इसलिये मेरे अनुभव में यही है कि सरकारी कर्मचारियों के दिल घूस लेने के मामले में और अधिक खुल जायेन्गे, क्यों कि हर कानून में बहुत से ऐसे छेद होते है जो लोगों को साफ बच जाने का मौका देते है /

सुखराम को लीजिये पन्द्रह साल से अधिक हो गये अभी तक सजा नहीं मिली, क्यों ? पुलिस अधिकारी राठौड का क्या हुआ ? ऐसे ही हजारों हजार नेता और अधिकारी मौजूद हैं, जिनके ऊपर अभी तक वर्षों से कोई कार्यवाही नही हुयी है और सभी फाइलें धूल चाट रही हैं / दर असल इन सबके दिल भ्रष्टाचार से खुल गये है और ऐसे लोग बे-खौफ हो गये हैं / क्या आप समझते है कि कनीमोरी और राजा जैसे नेता सुधर जायन्गे और फिर कभी आगे भ्रष्टाचार नहीं करेन्गे या भरष्टाचार से तौबा कर लेन्गे ? जी नही, यह सोच बिल्कुल गलत है ? अब इन सभी का भ्रष्टाचार करने का तौर तरीका बदल जायेगा, ये और दुगनी तिगनी ताकत लगाकर अधिक से अधिक से भ्रषटाचार करेन्गे, क्योन्कि इनके दिल खुल गये है, ये बे-खौफ हो जायेन्गे / ये समझ गये है कि भ्रश्टाचार करने के बाद ज्यादा से ज्यादा क्या हो सकता है ? इन्हे भ्रष्टाचार से बचाव के सब रास्ते और भ्र्ष्ट कार्यों की सजा से बचने के सभी महीन से महीन बातें पता हो गयी है / सजा काट लेने के बाद सालों मुकदमा लड़ लेन्गे , और पैसा हजम कर जायेन्गे / चार महीने की जेल काटकर अगर बीस हजार करोड़ बचते है तो ऐसा सौदा बुरा कहा जायेगा ?

अमिताभ बच्चन के पौत्री आगमन पर ; मेरा सपना पूरा हुआ

तीन वर्ष से अधिक हुआ है यानी २ मार्च २००८ को जब मैने एक रात एक सपना देखा था, जो फिल्म अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन से जुड़ा हुआ था और इस सपने में मै देख रहा था कि मैं उनके पोते Grandson को यानी श्री अभिषेक बच्चन के लड़्के को अपनी गोद में लेकर खिला रहा हूं और उसको अपना आशीर्वाद दे रहा हूं / इस सपने का जिक्र मैने अपने इसी ब्लाग के एक पोस्ट पर दिनान्क ०४ मार्च २००८ को किया था /

यह सपना भी बड़ा ही विचित्र था / वैसे मै सपने बहुत कम देखता हूं / अक्सर रात में जब सो जाता हूं तो स्वाभाविक है कि मन की स्तिथि अधिक स्वछन्द और चलाय मान हो जाती है और मन मश्तिष्क अपनी रफ्तार से बेलगाम होकर भागते रहते हैं / नीद के आगोश में न जाने कहां किधर यह मन शरीर को घुमाता रहता है, किसे क्या पता कब किधर यह चला जाय /

मुझे सपने याद भी नहीं रहते हैं / एक तो देखता कम हूं , दूसरे मै सपनों मे क्या हुआ , यह जानने और समझने की फुरसत ही नहीं रहती / मै इन सपनों की हकीकत को न तो नकारता हूं और न ही स्वीकार करता हूं / बुजुर्ग लोग गांव शहर मे बताते थे, जैसा कि मै बचपन से सुनता चला आ रहा हूं, कि सपने अगर ब्राम्ह मुहूर्त में देखें जांयें तो सच निकलते हैं /

मैने यह सपना ब्राम्ह मुहूर्त मे देखा था और कुछ मिनटॊं तक, लगभग चार या पान्च मिनट तक, देखने के बाद मेरी सपना देखते देखते ही नींद पूर्ण चेतना के साथ खुल गयी थी / सपने को देखते देखते मेरे मन की चेतना जब अर्ध चेतन अवस्था में आयी तो इसी अर्ध चेतन अवस्था में मैं यह समझ कर बड़ा आश्चर्य चकित था कि अभी रात तक तो मै कानपुर में था, यह अचानक मै मुम्बई में अमिताभ बच्चन के घर कैसे पहुन्च गया ?

इस सपने के बारे मे मैने किसी को भी नहीं बताया / लेकिन मन में बार बार और कई बार जब इस सपने के बारे मे याद आया तो मैने इसका जिक्र अपनी पत्नी और कुछ दोस्तों को बताया / अगले दिन मैने इस सपने के बारे में अपने इसी ब्लाग के पोस्ट में कुछ साल पहले लिखा था /

मुझे अच्छी तरह अब भी याद है कि जिस बच्चे को अमिताभ बच्चन ने मुझे आशीर्वाद देने के लिये मेरे हाथों में दिया था, वह वास्तव में चड्डी पहने हुये था और डायपर पहने था , इसलिये मुझे उसके लिन्ग के बारे मे कोई ग्यान नही मिला / मैने बाद में अपने आप अनुमान लगाया कि शायद बच्चा पुरूष लिन्ग होगा / इसीलिये उस पोस्ट में मैने Grandson शब्द का प्रयोग किया है /

मुझे खुशी है कि मेरा देखा हुआ सपना पूरा हुआ / मै श्री अमिताभ बच्चन और उनके परिवार को बधाई देता हू और शिशु को दीर्घायु और शतायु होने की शुभ कामना देता हूं /

अमिताभ बच्चन के पिता जी कविवर श्री हरिवन्श राय जी बच्चन को मै अपनी युवावस्था और कालेज के दिनों मे तथा एकाध कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हुये देखा और सुना है / इसके अलावा मै उनके परिवार के किसी सद्स्य से न तो कभी मिला हूं और न मेरा कोई परिचय है / यदा कदा टी०वी० या फिल्मों में जरूर अमिताभ बच्चन के परिवार के सदस्यों को देख लेता हूं /

बच्चन परिवार को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें /

Today’s Prime Minister Sardar Manmohan singh Government Decision SHOCKED THE WHOLE NATION

Its night for me  and is remaining 15 minutes to 01 O’clock, I wake up because I could not sleep due to ANXIETY  OF THE FUTURE  of this Great Nation.

The first issue of the anxiety is the CREADIBILITY  of this Government. I think , the Government have dishonoured the way of GANDHIAN  AGITATIONS totally in this country. The way , dealing  such a crisis, is looking  that novices are running the Governmet without any brain and direction and future results.

The second one , this Governemnet have lost the FAITH and BELIEFS on the NATIONAL LEVEL by their own insincerity. They are jumping from  one branch to another, simply by their own reasons, unsatable in their behaviours without any resonsibility. The Nation is running on the mercy of those hands , which keeps away themselves from any RESPONSIBILITY and RESPONSIVENESS.

We are greatest DEMOCRATIC COUNTRY in the Globe. The whole world is watching our attitude and way of solving this problem, which we have today and agitation on ANTI CORRUPTION MOVEMENT. Are our leaders conveying the massage to the whole world, that DEMOCRACY SYSTEM of Governence is a system of full of corruption and there is no place for rectification, if it is brought in notice by the public and mass to clean corruption ?

The corrupted leaders are more powerful than the public , who sent them for serving the nation for FIVE years and they collectively are making MONEY without any interruption.  

This is an EXTREME STAGE of ANXIETY, everybody should think over it and draw a solution to the problem as early as possible.

I am shocked by the statements of the responsible POLITICIANS of this great country. It looks me that no body is interested in removing  Corruption, adversely they prefer to do corruption without interruption.