“सर्वोदय जगत” पाक्षिक पत्रिका में श्री अन्ना हजारे के चिन्तन और मनन के लिये प्रकाशित एक पत्र

मै किशन गिरि महाराज के विचारों से बिल्कुल सहमत हूं / उन्होने तो भ्रष्टाचार के लिये ९०% नब्बे प्रतिशत का आंकड़ा दिया है , लेकिन यह बहुत कम है / मेरा मानना है कि इस देश की जनता ९९.९९ % प्रतिशत “मनस:, वाचा, कर्मणा” भ्रष्ट है और भ्रष्टाचार में लिप्त है या भ्रष्टाचार के कामों को बढाने के लिये अपना अमूल्य योगदान दे रही है /
– चाणक्य पन्डित

राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी क्या कह रहे है, कान्ग्रेसी क्या सुन रहे है ?

नीचे की फोटो देखिये और कान्ग्रेसी टॊपी धारी चेलों से महात्मा गान्धी जी क्या गुफ्तगू कर रहे हैं, जरा यह भी पढिये /


शायद हमारे प्रधान मन्त्री और उनके मन्त्रि मन्डल के सदस्य तथा पूरी कान्ग्रेस पार्टी के लोग, जो फायदे का मौका पड़ने पर गान्धी जी की आड़ लेकर, राजघाट तक जाने का मौका नहीं चूकते, लेकिन गान्धी जी ने क्या कहा था और क्या करना है, यह सब बताने के बावजूद अपनी जेबें भरने के चक्कर में वह सब भूल चुके है जो कभी महामानव महात्मा गान्धी ने कहा था /

श्री कपिल सिब्बल जैसे लोगों के लिये गान्धी जी की कही गयी बात , उनको अन्दर से कैसा महसूस कराती है ?

सरकारी दुकानदारी का स्पष्ट नमूना

ऐसा भी कभी इस देश की जनता ने सुना या देखा है, जैसा इस लेख के लेखक ने इस देश के लोगों को बताया है / अब यह लेख पढकर आप तय करें कि क्या यह सच भी हो सकता है ?

मुसल्मान, जो राज्नीतिक दलों के “वोट बैन्क” है, क्या कहते हैं………..?

मुसल्मान, जो राज्नीतिक दलों के “वोट बैन्क” है, क्या कहते हैं………..?

जरा इस पर्चे को पढिये, जो कानपुर में मुस्लिम बिरादरी के बीच बान्टा गया था /

मुसलमानों को “वॊट बैन्क” समझने वाले राजनीतिक दल अब क्या समझेन्गे ?

राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी “भ्रष्टाचार” के बारे मे

क्या कहते हैं हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी , इस देश को, इस देश के शासकों के लिये, जरा याद कर लीजिये /

 

महात्मा गान्धी के नाम पर रोटियां सेकने वाले , बताइये आप क्या सोचते है ?

“भ्रष्टाचार” तो पूर्व प्रधान मन्त्री माननीय जवाहर लाल नेहरू के प्रधान मन्त्रित्व के शाशन काल और उनके प्रशासनिक समय की देन

“भ्रष्टाचार” तो पूर्व प्रधान मन्त्री माननीय जवाहर लाल नेहरू के प्रधान मन्त्रित्व के शाशन काल और उनके प्रशासनिक समय की देन है / यह कोई आज की बात नहीं है / कोई अगर यह कहे कि भ्रष्टाचार आज के समय की देन है तो यह बेईमानी होगी /

सन १९५५ के बाद से ही इस देश में केन्द्र शासन के स्तर पर भ्रष्ट आचरण की नींव पड़ना शुरू हो चुकी थी / यह आचरण नया नया शुरू हुआ था यानी यह कहा जाय कि भ्रष्टाचार का इस देश में पदार्पण का पहला कदम शुरू हुआ था /

आम लोग इस तरह के कदाचरण की चर्चा करते थे /

सन १९६० के आस पास की बात होगी, जब प्रधान मन्त्री श्री जवाहर लाल नेहरू के समय की सरकार में शामिल गृह मन्त्री श्री गुलजारी लाल नन्दा जी ने इस पनपते और सिर उठाते हुये भ्रस्टाचार से आजिज होकर सन्सद के अन्दर और बाहर यह कहा कि ” इस देश से मै दो साल के अन्दर भ्रस्टाचार को मिटा दुन्गा ” /

उस समय गृह मन्त्री श्री गुलजारी लाल नन्दा के इस बयान पर बहुत बवाल हुआ / कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इसका बहुत विरोध किया / जनता के बीच इस बयान का बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं हुयी / इस देश की जनता ने उनके इस बयान का कोई स्वागत नहीं किया / सबने उनके इस बयान की बहुत खिल्ली उड़ाई /

दो क्या, कई साल बीत गये / लेकिन भ्रष्टाचार जहां का तहां बना रहा / दो साल मे भ्रस्टाचार को समाप्त करने का दावा करने वाले श्री गुलजारी लाल नन्दा आखिर में इस दुनिया से ही निपट गये /