ळोक सभा के चुनाव के पहले चरण के मतदान का सन्शय

पहले चरण का मतदान सम्पन्न हो चुका है । जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था कि चुनाव शान्ति पूर्वक होन्गे, वह तो नही हुआ । नक्सलियों के हमले ने पुलिस बल पर हमला करके अपनी मन्शा जग जाहिर कर दी है । आशन्का की जा रही थी कि कि चुनाव में बिघ्न और बाधायें डाली जायेंगी , वैसा तो हुआ नहीं । मतदान का प्रतिशत कमोवेशी उतना ही रहा, जितना की होना चाहिये । फिर भी उस तरह का उत्साह मतदाताओं में नही देखने को मिला, जितना कि होना चाहिये था । यह लजिमी भी है । जब खाने पीने की चीजों के दाम लगातार हर दिन बढ रहे हों , तो लोग अपना पॆट देखेन्गे या चुनाव का बैलेट ।

गर्मी का मौसम, ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटाई का समय, परीक्षायें , यह सब कारण हैं, जिनसे कम मतदान हुआ । फिल्हाल किसे कितना वोट मिला, कौन पार्टी आगे है या पीछे, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन वोटों के बन्टवारे में कान्ग्रेस और बीजॆपी सबसे आगे हैं, बाकी सब पीछे ।

वरुण गान्धी के फैक्टर से सवर्ण मतदाता अन्दर ही अन्दर बहुत नाराज

उत्तर प्रदेश की मुख्य मन्त्री मायावती का वरुण गान्धी के खिलाफ़ रासुका लगाये जाने से अन्दर ही अन्दर सवर्ण मतदाता बहुत नाराज है । जिसे आज सोसल एन्जीनियरिंग कहकर महिमा मन्डित किया जा रहा है, वह सोसल इन्जीनियरिंग इस लोक सभा के चुनाव में चलने वाली नहीं है । प्रदेश में विधान सभा के चुनाव का समिकरण कुछ दूसरा था, तब थोड़े समय के लिये यह युक्ती काम आ गयी । ळोक सभा के चुनाव में यह काम नही आ पायेगी, यह तो तय है ।

वरुण गान्धी पर रासुका लगाने से सभी सवर्ण बहुत आहत हुये हैं । झिस तरह से यह लगाया गया, इसके पीछे की मन्शा का भी पर्दाफास हो चुका है । सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि ज्यादती हुयी है ।

अब यही फैक्टर मायावती की लुटिया डुबो देगा । बहुजन समाज पार्टी बहुत बुरी तरह से हारेगी । इनका आन्कड़ा जितना सन २००४ के चुनाव में था, उतना ही बना रह पायेगा, इसमें भी सन्देह है ।

क्षेत्रीय दलों की सरकार बनने में अहम भूमिका

यह तो तय है की त्रिशन्कु लोक सभा बनेगी, क्योंकि न तो काग्रेस को स्पस्ट बहुमत मिलेगा और न बीजॆपी को । दोनों ही दल बहुमत के आन्कड़े से नीचे ही रहेगे । सरकार तो बननी है, यह समवैधानिक मज्बूरी है । कैसे बनेगी, यह सभी राजनीतिक दलों की मजबूरी है कि वे किस तरह की सरकार बनाना चाहेन्गे । दो ध्रुव बने हैं । क्षेत्रीय दल अपना फाय्दा देखेन्गे । एक धर्म निर्पेक्षता को दुहाई लेकर लेकर और दूसरा साम्प्रदायिक तत्वों के खिलाफ, यह बहाना लेकर और अपना नफा नुकसान देखकर, जोड़बन्दी करेंगे कि कान्ग्रेस को सपोट किया जाये या भाज्पा को । सभी दल अपना फायदा देखेंगे । यहां मूल्यों की राज्नीति होगी ।

इस देश की जनता को क्या मिलेगा ? मेरे खयाल से कुछ भी नहीं , शून्य मिलेगा । जनता केवल टैक्स भरे, गरीबी के नाम पर मुफ्त का पैसा लेने की होड़ में जुटे । अपनी मुसीबत में और अधिक इजाफा करे । कौन इस देश की सेवा करता है ? सब बकवास है । नेताओं के हलफ़्नामें देख लिजिये, करोड़ों के मालिक है फिर भी गरीब है ।

त्रिशन्कु लोकसभा के आसार

मै रोजाना मजे की तदाद में लोगो से मिलता हुं , उनसे बातें करता हू और अपने मतलब की जो भी बात होती है उसे निकाल लेता हुं । मुझे बाहर भी जाना पड़्ता है और दूर दराज के लोगों से बातें करने का मौका मिल जाता है, जिससे अपने काम की बात निकल आती है ।

मै यह बात तो दावे के साथ कह सकता हूं कि देश में इस चुनाव बाद त्रिशन्कु लोकसभा बनेन्गी ।

अब सवाल यह है कि सरकार कौन बनायेगा ? देश की मुख्य दो पर्टियों, कान्ग्रेस और बीजेपी में इस समय कान्टे की टक्कर है । कौन कितनी सीटें ले जायेगा, फिल्हाल यह कहना मुश्किल तो नहीं है, लेकिन सरकार बिना क्षेत्रीय पार्टियों के सहयोग के नहीं बन पायेगी ।

ऐसा लगता है कि कान्ग्रेस की सरकार बनने के ज्यादा अवसर बन रहे हैं । इसका कारण है NDA के घटक दल बिखर गये हैं । ये घटक दल बाजपेयी जी के जमाने में बहुत स्ट्रान्ग थे । अब इन्हीं दलों की इनके अपने ही राज्यों में मटिया पलीत है ।

एक तरह से यह अच्छा भी है । राजनीति एक “नूरा कुश्ती” का खेल है । एक दूसरे को खरी खोटी सुनाओ और अपनी राज्नीतिक दुकान चलाओ । अखबार वाले थोड़ा सा “Journalistic touch” देकर बेकार की खबरों में जान डाल देते है, जिससे महौल कुछ गरमाने लगता है । क्या कभी आपने देखा या सुना है, कि जो बातें चुनाव से पहले कही जाती हैं , वे कितनी पूरी हो पाती है ? इसे ही राजनीति कहते है ।

फिल्हाल चुनाव बाद भगवान सबकी खैर करे , क्योंकि आर्थिक मन्दी का असर तो अब पड़ेगा ।

जरनैल सिन्घ कि सबसे बड़ी गलती

बन्दे से बहुत बड़ी चूक हो गयी । काम जरूर बड़ी दिलेरी का किया । सही भी है , ऐसा काम तो सरदार के अलावा कोई कर भी नही सकता था । सरदारों के बारे में कहावत भी ठीक है ” सरदार पहले करते हैं और फिर बाद में सोचते हैं कि अच्छा किया या खराब किया” । जरनैल सिन्घ ने पहले कर डाला, जो भी करना था, वह आनन फानन में हुआ । जब समझ में आया तो पता चला कि अच्छा नही किया, इसलिये अपने काम की माफी भी मान्ग ली ।

एक बहुत बड़ी गलती सरदार जरनैल सिन्घ से हो गयी, इसलिये ये थोड़ा पीछे रह गये । ईराकी पत्रकार ने अपने दोनों जूते बुश की तरफ पेंके थे , जरनैल सिन्घ ने इसके मुकाबले आधा ही काम किया । यह बहुत बड़ी गलती सरदार से हो गयी ।

किसी जमाने में नेताओं को जूतों की माला पहनायी जाती थी । मैने अपने बचपन और किशोर अवस्था में बहुत से नेताओं को जूतों की माला पहनाते हुये देखा है । टमाटर, अन्डे, कीचड़, टट्टी, पाखाना, मूत्र आदि गलीज चीजें भी नेताओं पर फेंके जाते हुये देखा है । यह साठ और सत्तर के दशक की बात थी । लगता है, इतिहास अपने को फिर दोहराने जा रहा है ।

जूते चल गये और वोटों की राजनीति भी चल गयी

यह काम मेरे मन का हुआ है । कई बार अपने पत्रकारिता के जीवन में मुझे भी ऐसे अवसर आये जब मेंरी इच्छा होती थी की मै फ्लाने फ्लाने नेता को जूतों जूतों मारुं , जमीन में गिरा गिरा के, पटक पटक कर मारूं । लेकिन पत्रकारिता का धर्म सबसे पहले आ जाता , इसलिये मन में आक्रोष होते हुये भी अपने इस आक्रोष को दबा जाता. धीरे धीरे यह सब सहने की आदत पड़ गयी और मै लतिहड़ पत्रकार बन गया । जिसकी अपनी कोई इच्छा न हो और जो केवल एक मशीन की तरह काम करे ।

यही सभी पत्रकार करते है । एक बेजान मशीन की तरह, उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती । आन्ख के सामने अत्याचार हो रहा है, अनयाय्पूर्ण कार्य हो रहे हैं, लेकिन पत्रकार कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि वह एक आब्जर्वर की तरह है, केवल आब्जर्वर, इसके अलावा और कुछ नहीं ।

सरदार जरनैल सिन्घ पत्रकार ने माननीय चिदम्बरम की तरफ़ जूता फेंका, यह मैने पूरा घटना क्रम टी०वी० फूटेज में देखा । इस घटना की जिस तरह से लीपा पोती की गयी वह भी देखा । कुल मिलाकर मेरा निष्कर्ष यह है कि चिदम्बरम ने बहुत गैर जिम्मेदाराना तरीके से व्यव्हार किया, यह उनके पद के अनुरूप नहीं लगता ।

चिदम्बरम पर जूता फेंकने की घटना ने सिक्खों के अन्दर की बात बहुत गहरायी से कह डाली है ।

UPA ke ghatak dalon ka Honeymoon khatma hone ke kagar par

Abhi tak, MAAL, MALAI, MAKKHAN, MONEY kaat rahe UPA ke ghatak dalon ko dar sataney laga hai, ki chunav hone kistithi mein ve kya aur kahan honge, isi karan PARAMANU KARAR PAR SAATH DE RAHE SABHI UPA  ke ghatak dalon mein , toot phut hona shuru ho gayi hai, jisaka taza udaharan SP aur Congress ke bich mein ho rahi tanatani se jahir ho gya hai, Vam dal to pahaley hi mal chirkar jitana phayada utha sakatey they, maximum phayada uthakar , kinare ho liye, jarurat ke samay Samajvadi aaye, lekin viparit dhruvon mein kabhi nahin bani to ab kya banegi, Samajwadi parti ko ahasaas ho gaya ki use Congress kha jayegi aur yah sach bhi hai, musalman is baar Congress ko vote dega, yah tay hai, meri Miyan bhaiyon se baat hoti rahati hai, usase mujhe laga ki abaki baar unaka rujhan Congress ki taraf hai, jo miyan bhai congreess co vote nahin denge, ve abaki bar BSP ya communiston ko vote dene ki baat soch rahe hain, aise mein samajwadi parti ko vote kuan sa Vote Bank dega ?

Yah hal dekhakar sabhi chchote dalon ko , jo abhi tak malai uda rahe the, inaka bahut bura hashra hone ja raha hai, rahi sahi kasar AMARIKA KI MANDI se padane wale asar se puri ho jayegi