अन्ना हजारे जी, आप बहुत सोच समझ कर अनशन पर बैठें, कहीं ऐसा न हो कि आपकी मुहिम की हवा निकल जाये /


अन्ना हजारे का मै बहुत सम्मान करता हूं / निश्चय ही उनकी चलायी गयी मुहिम से मै सहमत हू जैसा कि इस देश के दूसरे लोग उनका समर्थन कर रहे है /

लेकिन , मुझे शक है कि अन्ना हजारे की इस मुहिम को कहीं तगडा झटका न लग जाये / जिसकी मुझे बहुत बड़ी आशन्का लगती है / इसके बहुत से कारण हैं और वे क्या हैं , यह मै उनको बताना चाहता हू /

१- सबसे पहले इस देश के नागरिकों की मानसिकता को लीजिये / इस देश का हर नागरिक चाहता है कि भ्रष्टाचार खतम हो लेकिन दूसरी तरफ वह खुद ही भ्रष्टाचार में लिप्त है / वह चाहता है कि उसे टैक्स चोरी करने दिया जाय, बिजली की चोरी करने दी जाय / सरकार के जितना चूना लगा सको उतना अधिक से अधिक सरकार के चूना लगाने की स्वतन्त्रता दी जाय / सरकारी योजनाओं का पैसा कैसे हड़पा जाये ऐसी स्कीम सोची जाय /

 
२- इस देश का नागरिक सोचता है कि “भगत सिंह” और “चन्द्रशेखर” जैसे शहीद उनके घर में न पैदा हों / अगर पैदा हों तो उनके पड़ोस में पैदा हों / ऐसे लोग चाहते है कि उनके घर में “हर्षद मेहता” और “सुरेश कल्माड़ी” जैसे पैदा हों /

३- इस देश का युवा तो महा भ्रष्ट है / अन्ना जी आप सम्भल कर और सोच विचार कर भरोसा करियेगा / ये आज की युवा पीढी आपकी फजीहत करा कर दम लेगी / पहले तो ये आपके लिये ऐसा तम्बू तानेन्गे कि आपको लगेगा कि “हां, ये हमारे देश के नवजवान हैं और बड़े ही कर्मठ और sincere यवा पीढी है” / ये आपका तम्बू सातवें आसमान तक ले जायेन्गे और बाद में

यही सब नौजवान, जो आज आपके पीछे चलने के लिये छाती ठोन्ककर और सीना फुलाकर , कदम से कदम मिलाकर चलने का वादा कर रहे है, यही नौजवान आपको सातवें आसमान पर आपका तम्बू तानकर थोड़ा रुकेन्गे  और फिर मौके का फायदा उठाते हुये आपके “तम्बू के चारों बम्बू” उखाड़्कर चारों दिशाओं में लेकर भाग जायेन्गे / आप जब तक सम्भलेन्गे, तब तक आप धड़ाम होकर जमीन पर आ जायेन्गे, फिर कोई भी आपका हाल चाल तक पूछने नहीं आयेगा कि “अब आप कैसे हैं ?

४- इस देश की जनता तो सबसे निराली और अजूबे किस्म की है / आपने “सोडा वाटर” की बोतल जरूर देखी होगी / “सोडा वाटर” की बोतल का ढक्कन जब खुलता है, तो बहुत तेजी के साथ झाग युक्त जोश भरा पानी गैस के साथ बाहर निकलता है / इस देश की जनता का मिजाज बिल्कुल “सोडा वाटरी जोश” जैसा है / यानी खुलासा यह कि इस देश की जनता के सामने जब कोई मुद्दा आता है तो उसका प्रतिक्रिया व्यक्त करने का जोश ठीक सोडावाटर जैसा होता है / बाद में जैसे सोडावाटर की गैस खतम होकर बचा पानी हिलता तक नहीं, ठीक यही हालत इस देश की जनता की मानसिकता की है /
 
५- इस देश की जनता SLOGAN MINDED  है / स्लोगन माइन्डेड यानी नारों के पीछे भागने वाली / कैसे ? इस देश के नेताओं द्वारा दिये गये नारों के पिछले अतीत और इतिहास को देखिये / “गरीबी हटाओ” , “समाजवाद आयेगा , पून्जीवाद जायेगा” , “सब्को देखा बार बार, हमको देखो एक बार”  जैसे नारे आपने भी झेले होन्गे / इस देश की जनता को नारे बहुत लुभाते है / जिस देश की जन्ता नारों में ही बह जाये , उस देश की जन्ता  पर आप किस तरह का और क्या भरोसा करेन्गे ? इस देश की जन्ता अपनी सोच और राय पल पल में  बदलती है / कही ऐसा न हो, आज सभी आपके साथ भ्रष्टाचार मिटाने के लिये कदम ताल के साथ खड़े हो जायें और कल ही आपका साथ छोड़्कर भाग खड़े हों / देश की जन्ता मेरे हिसाब से भरोसे लायक नहीं है /

६- आपकी भ्रष्टाचार समाप्त करने की मुहिम आज के वर्तमान में लोगॊं को , इस देश की जनता को बहुत लुभावनी लग रही है और आकर्षक लग रही है / लेकिन जैसे जैसे इस मुहिम के चलने से इस देश की जनता को यह लगने लगेगा कि भ्रष्टाचार के खतम होने से उनको ही खतरा पैदा होवेगा और उन्के लिये मुश्किलें बढा देगा तो जो लोग आज आपका साथ दे रहे है , वे भी पीछे हट जायेन्गे और इस तरह से आपकी मुहिम की हवा निकल जायेगी /

बहुत सी बाते है जिनका मनन दूर दूर तक करना बहुत जरूरी है / मेरि आपको यही सलाह है कि आप अपना १६ अगस्त २०११ से शुरू करने वाले अन्शन का विचार एक्दम त्याग दें /

अब आप क्या करें ?

पहला ; आप सारे देश का दौरा करके इस देश के नागरिकों को समझाइये कि भ्रष्टाचार से उनको और उनकी आने वाली पीढियों को क्या क्या नुकसान है ? भ्रष्टाचार न होने से क्या क्या फायदा है ?

दूसरा ; जनमत बनाइये और इतना मजबूत बनाइये कि कोई भी सरकार हो, वह भ्रष्टाचार को दूर करके ही दम ले / एक बात याद रखियेगा कि भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है, इसे जड़्मूल से खतम नहीं किया जा सकता /

कहने को तो बहुत है , लेकिन मै आखिर में आपसे यही कहून्गा कि १६ अगस्त २०११ को अनशन शुरू करने से पहले अच्छी तरह से हजारों बार दिल दिमाग से सोच विचार कर लें और तब अनशन शुरू करें / 

 

“सर्वोदय जगत” पाक्षिक पत्रिका में श्री अन्ना हजारे के चिन्तन और मनन के लिये प्रकाशित एक पत्र

मै किशन गिरि महाराज के विचारों से बिल्कुल सहमत हूं / उन्होने तो भ्रष्टाचार के लिये ९०% नब्बे प्रतिशत का आंकड़ा दिया है , लेकिन यह बहुत कम है / मेरा मानना है कि इस देश की जनता ९९.९९ % प्रतिशत “मनस:, वाचा, कर्मणा” भ्रष्ट है और भ्रष्टाचार में लिप्त है या भ्रष्टाचार के कामों को बढाने के लिये अपना अमूल्य योगदान दे रही है /
– चाणक्य पन्डित

राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी क्या कह रहे है, कान्ग्रेसी क्या सुन रहे है ?

नीचे की फोटो देखिये और कान्ग्रेसी टॊपी धारी चेलों से महात्मा गान्धी जी क्या गुफ्तगू कर रहे हैं, जरा यह भी पढिये /


शायद हमारे प्रधान मन्त्री और उनके मन्त्रि मन्डल के सदस्य तथा पूरी कान्ग्रेस पार्टी के लोग, जो फायदे का मौका पड़ने पर गान्धी जी की आड़ लेकर, राजघाट तक जाने का मौका नहीं चूकते, लेकिन गान्धी जी ने क्या कहा था और क्या करना है, यह सब बताने के बावजूद अपनी जेबें भरने के चक्कर में वह सब भूल चुके है जो कभी महामानव महात्मा गान्धी ने कहा था /

श्री कपिल सिब्बल जैसे लोगों के लिये गान्धी जी की कही गयी बात , उनको अन्दर से कैसा महसूस कराती है ?

सरकारी दुकानदारी का स्पष्ट नमूना

ऐसा भी कभी इस देश की जनता ने सुना या देखा है, जैसा इस लेख के लेखक ने इस देश के लोगों को बताया है / अब यह लेख पढकर आप तय करें कि क्या यह सच भी हो सकता है ?

मुसल्मान, जो राज्नीतिक दलों के “वोट बैन्क” है, क्या कहते हैं………..?

मुसल्मान, जो राज्नीतिक दलों के “वोट बैन्क” है, क्या कहते हैं………..?

जरा इस पर्चे को पढिये, जो कानपुर में मुस्लिम बिरादरी के बीच बान्टा गया था /

मुसलमानों को “वॊट बैन्क” समझने वाले राजनीतिक दल अब क्या समझेन्गे ?