मायावती को अब क्या करना चाहिये ?

इस बात की उम्मीद सभी लगाये हुये थे कि मायावती दुबारा मुख्य मन्त्री बनेगी लेकिन यह न हो सका और चुनाव के परिणाम जैसे आये हैं , उनके कारण मै गिना चुका हूं /

जो बीत गया सो बीत गया और जब जागिये तब सवेरा, इस मन्त्र को ध्यान मे रखकर दुबारा पूरे जोर शोर से एक सूत्रीय कार्यक्रम बनाकर सन २०१४ के चुनाव पर लक्ष्य बनायें /

१- मयावती जी आप याद करें , जब आपनें विधान सभा २००७ की तैयारी चुनाव होने के तीन साल पहले से ही यानी सन २००४ और २००५ से ही विधान सभा वार शुरू कर दी थी और उस समय आपने जिस विधान सभा से जो भी condidate लडाना था , उसका चयन करके पूरे विधान सभा क्षेत्र में उसको प्रचार के लिये लगा दिया था, नतीजा बहुत positive मिला था / इसी modus opreandi को अमल में लाइये, अभी से शुरुआत करेन्गी तो लोक सभा के चुनाव में आपको अवश्य सफ़लता मिलेगी /

२- यह तय है कि समाजवादी पार्टी से लोगों का मोह भन्ग अवश्य होगा / अभी तो शुरूआत है, आगे आगे देखिये क्या गुल खिलते है / समाजवादी पार्टी ने इतने वादे कर दिये है, जिन्हे शायद पूरा करना असम्भव है / आप ऐसी स्तिथि का फायदा उठाइये /

३- हवा हवाई बघारने वाले कन्डीडेट को दूर रखिये, जमीन से जुडे़ कन्डीडेट को प्राथमिकता दें / आपके चाटुकारों ने आपको सही बात नही बतायी , इसी कारण से यह स्तिथि पैदा हुयी है / स्वार्थी तत्व सभी जगह है इनसे बचिये /

४- अपने एजेन्डा पर कायम रहें / यह समय ऐसा है कि जो कहें , उसे करें , यही विश्वास लोगों को महसूस होना चाहिये कि मायावती जो कहती है , वह करती भी है /

५- जनता की भावनाओं और जनता की नब्ज टटोलकर बयान बाजी करें / पिछली बार लोकपाल को लेकर आपकी टिप्पणी से जनता नाराज हुयी थी / ऐसे कई मौके आये जब अनर्गल बयान बाजी से आपकी छवि को धक्का पहुचा है /

अभी आपके पास बहुत समय है / काम करने के लिये समय बध्ध और चरण बध्ध कार्य्क्रम तय करें / मेहनत करें , आपको सफ़लता अवश्य मिलेगी /

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उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों पर मेरा त्वरित नजरिया

विधान सभा उत्तर प्रदेश २०१२ के चुनाव परिणामों से सभी का चकित होना स्वाभाविक है / मै इसके लिये निम्न कारणों को जिम्मेदार मानता हूं /

१- अन्य राज्यों यथा पन्जाब और उत्तराखन्ड और मनीपुर और गोवा के चुनाव के लिये चुनाव आयोग ने कही कहीं एक चरण में अथवा दो चरणों में चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न करा दी थी / उत्तर प्रदेश ही केवल ऐसा राज्य बचा , जहा चुनाव सात चरण मे हुये और इसे सम्पन्न कराने में लगभग तीन हफ्ते का समय लगा / नतीजा यह हुआ कि एक जगह के हुये मतदान का सुर्रा कि फलाना जीत रहा है, ऐसी हवा उड़ाने का मौका दूसरी जगहों के लिये बड़े आराम से मिल गया /

२- नेताओं की बयान बाजी जैसे दिग्विजय सिह का विच्छिप्तों जैसा अनर्गल प्रलाप, बेवजह के “राष्ट्रपति लागू कराने के बयान ” जैसी अनावश्यक जरूरत वाले बयान, प्रदेश की कराह रही जनता के मुद्दों से हटकर आपसी नूराकुश्ती, राहुल गान्धी का नौटन्की करते हुये सार्वजनिक मन्च से एक पार्टी के खिलाफ पर्चा फाड़्ना, यह सब जनता सुन और देख रही थी /

३- मीडिया द्वारा चौथे / पान्चवें चरण के मतदान के बाद शोशे फैला देना कि ” त्रिशन्कु विधान सभा ” बन रही है, बाद के चरणो पर होने वाले चुनाव के लिये जनता का किसी एक दल की तरफ झुकाव हो जाना
ताकि त्रिशन्कु की स्तिथि न आने पाये /

४- राष्ट्रपति शाशन से बचाने के लिये जनता का विचार करना और किसी एक दल को पूर्ण बहुमत देने की मन्शा को जाहिर करने के लिये द्ल विशेष के पक्ष मे न चाहते हुये भी मतदान करना

५- नये परिसीमन के कारण पुराने जिताऊ समीकरण बदल गये /

६- नये मतदाताओं का रूझान एक विशेष दल को चुनने के लिये इस कारण से हुआ , क्योंकि [१] इनके सत्ता में आने से उसे मुफ्त हजारों रुपये का लैप्टाप कम्प्यूटर मिलेगा [२] बेरोजगारी भत्ता मिलेगा, जैसा कि उनको इसी दल की पिछली सरकार में प्रति माह ५०० रुपये या १००० रुपये मिल रहा था, लेकिन मायावती की सरकार नें बन्द कर दिया था, इसलिये इस उम्मीद और लालच से नये नवयुवक मतदाताओं नें मुलायम सिह को चुना /

ऐसा शायद दूसरे राजनीतिक दल न कर पाते /

७- मतदाताओं का यह मानना कि मुलायम जो कहते है , वह करते भी है और यह सही भी है जैसा कि मैने उनके शाशन काल में देखा और समझा है / यह विश्वास मतदाताओं को देने में मुलायम सिह कामयाब रहे / अन्य राजनीतिक दल इसी कारण से फेल हो गये /

एक बात और , जो सबसे महत्व पूर्ण है और वह यह कि , अगर यह चुनाव तीन चरणों मे सम्पन्न हो जाते तो शायद उत्तर प्रदेश का राज नीतिक नक्शा कुछ और होता /

हलांकि अन्य कारण राजनीतिक दलों के अपने अपने नजरिये से अलग अलग हो सकते हैं , जिसे वे ही समझ सकते है /

“कुकिन्ग गैस सब्सीडी” फौरन हटाकर खुले बजार में रसोई गैस बेची जाय…..!

इस साल के बजट में मै वित्त मन्त्री से अनुरोध करून्गा कि रसोई गैस की सब्सीडी खत्म करके जितना वास्तविक मूल्य रसोई गैस का बनता हो, उतने में गैस सिलिन्डर को खुले बाज़ार मे बेचा जाना चाहिये /

हकीकत यह है कि रसोई गैस के सिलिन्डर, हर गैस एजेन्सी वाला, ७० प्रतिशत ब्लैक में बेचता है और केवल ३० प्रतिशत घरों में सप्लाई हो पाती है / ब्लैक में या कालाबाज़ार में गैस सिलिन्डर की कीमत गैस के मिलने या कम मिलने की सूरत में घटती बढती है / एक सिलिन्डर की कालाबाजारी में कीमत ६०० रुपये से लेकर १२०० रुपये तक है / लोग खुसी से पैसा देकर सिलिन्डर खरीद लेते है / देहात और ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरों से सिलिन्डर ६०० रुपये या ७०० रुपये में बहुत प्रसन्न्ता के साथ खरीदकर अपने गावों में शहरों से लाद्कर और अतिरिक्त १०० रुपये खर्च करके अपने गन्तव्य तक ले जाते हैं /

मै खुद कई बार गैस एजेन्सियों के चक्कर में सिलिन्डर लेकर मरामारा फिरता रहा और गैस गोदाम के कई कई चक्कर लगाने के बाद गैस लाने का खर्चा सिलिन्डर की कीमत के बराबर करना पड़ा / यानी ४०० रुपये की गैस और ४०० रुपये रिक्सा का लाने और लेजाने के लिये किया गया खर्चा, जो कुल मिलाकर ८०० रुपये हो जाता है / यह मेरा हाल नही है, कमी वेशी सभी उपभोक्ताओं का यही हाल और दुर्दशा है / सबसे बड़ी बात यह है कि पैसा तो खर्च होता ही है , सारा दिन गैस के जुगाड़ करने मे ही चला जाता है, इससे आमदनी की आमद भी बाधित होती है /

इस कम्प्य़ूटर के युग में जब कि हर काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसे माहौल में रसोई गैस का समय से न मिलने का व्यवधान मानसिक तनाव के पैदा होने के साथ साथ पारिवारिक क्लेश और रोजाना के कार्य कलापों को अव्यवस्थित करता है , इस कारण से लोग यही सोचते हैं कि थोड़ा ज्यादा ही सही गैस सरलता से और बिना किसी बाधा के मिले चाहे उसकी कितनी भी कीमत क्यों न हो ? ताकि जीवन शान्त मय और तनाव रहित हो , भले ही इसके लिये अतिरिक्त कीमत क्यों न चुकानी पडे़ /

मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह रसोई गैस की सब्सीडी हटाकर फौरी तौर पर खुले बाज़ार मे गैस सिलिन्डर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे और हर घर के लिये सबसे आवश्यक वस्तु को सरलता से और आवश्यकता के समय में या जरूरत के अनुसार तुरन्त मिल जाये ऐसी व्यवस्था का उपाय करे /

क्या मायावती की सरकार उत्तर प्रदेश में फिर बनेगी ?

चुनाव के बाद सुश्री मायावती की पार्टी बहुजन समज पार्टी फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने वाली है /

मै जहां जहां भी गया, वहां ओ०बी०सी० पिछडे़ और दलितों से मेरी बात हुयी है उससे यही निष्कर्ष निकल रहा है / अन्दर खाने सभी यही स्वीकार कर रहे हैं कि मयावती के ऊपर जितने भी राज्नीतिक दल है , उनके द्वारा कीचड़ उछालने का यही मतलब है कि उनको जबरन दबाया जा रहा है / रही सही कसर चुनाव आयोग के फरमान ने पूरी कर दी / यह ठीक उसी तरह से है जैसे कि गुजरात में सोनिया गान्धी ने जब नरेन्द्र मोदी को “मौत का सौदागर ” कह दिया था / इसी एक जुमले से सभी गुजरात के लोग चिढ गये और फिर नतीजा सबके सामने आया / यही कहानी मायावती फिर से उत्तर प्रदेश मे दोहरा रही है / सभी दलित समाज और पिछड़े वर्ग के लोग अपने को चुनाव आयोग के फरमान से अपमानित मह्सूस कर रहे है /

वे यह समझ रहे हैं कि कान्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी और समाज वादी पार्टी के नेताओं ने मिलक्रर सुश्री मायावती जी की शिकायत करके उनके नेता की बेइज्जती कर दी है , अब वे देश और दुनिया को दिखा देन्गे कि उनके नेता की इस बेइज्जती का बदला वे किस तरह से ले सकते हैं / यह अब दलितों के लिये मूछ ऊन्ची और बेइज्जती से नाक कटने से बचने का सवाल हो गया है /

मैने जहां तक नम्बरों का खेल समझा है, इस चुनाव में मुख्य रूप से पहले [१] नम्बर पर बसपा रहेगी दूसरे नम्बर [२] पर समाज वादी पार्टी आयेगी , तीसरे [३] नम्बर पर कान्ग्रेस आयेगी और चौथे [४] नम्बर पर भाजपा रहेगी /

आम जनता और आम लोगों के अपने अपने तर्क है / भाजपा के बारे मे सभी वर्ग के लोगों का मानना है कि ये सब कान्ग्रेस-कल्चर के फालोवर हो गये हैं, इनकी सरकार के मन्त्रियों ने कान्ग्रेस के मन्त्रियों से दो कदम आगे जाकर भ्रस्टाचार किया है और अपनी नैतिकता और ईमान्दारी का कोई उदाहरण तक नहीं छोड़ा है, जब वोट देना है तो इनको ही क्यों ? मुसलमानो का वोट सबसे पहले और सबसे अधिक समाज्वादी पार्टी को और उसके बाद कान्ग्रेस को और उसके बाद बसपा को मिलेगा /

मेरा ख्याल है कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बसपा की ही बनेगी, मायावती जी फिर मुख्य मन्त्री होन्गी / यह जरूर हो सकता है कि इस बार मायावती का सन्ख्या बल कम हो जाये और बहुमत के लिये उनको निर्दलीय या छोटे दलों से सहयोग लेना पड़े /

महात्मा गान्धी के पड़्पोते श्री तुषार गान्धी इस देश के नेताओं से क्या कहते है?

जब तब कभी अचानक ऐसा मौका मिलता है और कान्ग्रेस के नेताओं को अपना उल्लू सीधा करने के लिये और अपना सामूहिक फायदा ऊठाने का त्योहार भांप लेने का बक्त “बाई दा वे” जब मिल जाता है , तो ये सब एक स्वर में “महात्मा गान्धी” की शरण मे जाने से जरा भी नहीं हिचकते / वन्शवादी और “टाईटिल धारी” गान्धी और उनके चेलों ने कभी देश की दुर्दशा पर आन्सू भी नहीं बहाये होन्गे /

लेकिन १०० प्रतिशत असली और १०० टन्च महात्मा गान्धी के परिवार के एक सदस्य और महात्मा गान्धी जी के पड़्पोते – The Great Grandson of Mahatma Gandhi – श्री तुषार गान्धी जी का मन इस महान देश की दुर्दशा देखकर क्या कहत्ता हैं और क्या लिखता है, यह दैनिक जागरण , कानपुर के दिनान्क ०१ दिसम्बर २०११ के सम्पाद्कीय पेज पर छपा है, जरा बानगी इस स्कैन की गयी कापी में देखिये /


एक वह समय था , जब भारत से विदेशी खदे़ड़े जा रहे थे और इस महान देश के लोग इन सबको खदेड़ने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगाये दे रहे थे /

आज हालात यह है कि खुद सरकार ही इन विदेशियों को देश में व्यापार जमाने के लिये अप्नी पूरी ताकत के साथ एड़ी चोटी का जोर लगाये दे रही है /

और देश के लोगों को समझाया जा रहा है कि इन विदेशियों को लाने से महन्गायी कम होगी और किसानों को फायदा होगा / ऐसा तो पिछले ६० सालों से तर्क सुनते चले आ रहे है ? लेकिन हकीकत सभी जानते है / बैन्कों का जब राष्ट्रीय करण किया जा रहा था , तब कहा गया कि लोगों को कर्ज दिया जायेगा, किसानों को खेती के लिये और उद्योंगों को बढाने के लिये कर्ज और पून्जी दी जायेगी / क्या यह सब हुआ ? अभी का उदाहरण ले लीजिये, “न्य़ूक्लीयर डील” मे नेताओं की डील हो गयी और जनता को बताया गया कि इससे फ़लाने फ्लाने फायदे होन्गे / क्या ये सब हुआ ?

कान्ग्रेस पार्टी से लोगों का भरोसा अब उठता जा रहा है / आज तक जितने भी वादे किये गये , वे सब कागजी निकले / श्री मनमोहन सिघ की सरकार के अधिसन्ख्य आश्वासन जो भी दिये गये थे , ये सब के सब कोरे आश्वासन निकले /

लोगों का भरोसा इस सरकार के कार्य कलापों से हिल गया है और मन में अविश्वास बैठ गया है /

आर०टी०आई० सूचना के लिये रुपया २०००/- [ रुपया दो हजार ] मान्गे गये ; नगर पालिका दफ्तर से रुपया दस का IPO और application भी गायब हो गयी

अगस्त २०११ में मैने एक मुकदमे के सिलसिले में R.T.I. की सूचना के तहत जिला: उन्नाव , उत्तर प्रदेश की एक नगर पालिका में application दी थी / कुछ दिन बाद नगर पालिका के दफ्तर में जाने पर पता चला कि मेरी application मय दस रुपये के IPO के गायब है / सम्बन्धित क्लर्क ने कहा कि दुबारा application दीजिये / दुबारा application दी गयी /

आर०टी०आई० की सूचना की मुझे जरूरत इसलिये पड़ी क्योंकि मेरा एक किरायेदार मेरा दो लाख चालिस हजार रुपये का किराया लेकर रफू-चक्कर हो गया / मुकदमा लड़ता रहा और किराया , कचेहरी में जमा नहीं किया और कानून की कमजोरी का फायदा उठाकर भाग गया / किरायेदार से पैसा वसूली के लिये जिला उन्नाव की अदालत में मुकदमा चल रहा है / मेरे वकील नें कहा कि
इस किरायेदार के मकान और जायदाद के लिये पन्चशाला कागज की जरूरत है, जो नगर पालिका के दफ्तर में ही मिलेगा /

मैने सम्बन्धित क्लर्क से बात की तो उसने बताया कि जिस व्यक्ति के मकान का पन्चसाला चाहते है , उसने अपना टैक्स जमा नहीं किया है, इसलिये मिलेगा नहीं / अब आपके पास यही आर०टि०आई० का रास्ता बचा है / इसके लिये आपको रुपया २०००/- खर्च करने पड़ेन्गे, तभी यह सूचना आपको मिल पायेगी /

यह वही समय था “अन्ना हजारे” के दिल्ली के रामलीला ग्राउन्ड में चल रहे “भ्रष्टाचार हटाओ” आन्दोलन का, जिसमें अन्नाजी, भूख हड़्ताल कर रहे थे / मैने उनाव जाकर अपने वकील से पूरी बात बतायी और यह भी बताया कि रुपया २०००/- सूचना देने के लिये मान्गे जा रहे है /

वकील साहब ने कहा, ” पन्चशाला नहीं मिल रहा है तो रहने दीजिये, आर०टी०आई० लेने में इतना अन्धेर खाता मचा है, आप एक भी पैसा मत दीजिये, आप यह सब रहने दीजिये, किरायेदार की मकान की स्तिथि का पता कर लीजिये, और अगली तारीख में मुझे बता दीजियेगा” /

यह उदाहरण यही बताता है कि lower beurocracy मे जिस तरह का भ्रष्टाचार घुस गया है, उससे कैसे निपटा जाय ? यहां तो हाल यह है कि जिस सरकारी द्फ्तर मे काम के लिये जाता हूं , वहीं दफ्तर का हरेक सरकारी मुलाजिम मुंह खोले बैठा है कि जो आया है उसकी जेब कैसे साफ करी जाय?

चाहे वह केन्द्र की सरकार हो या राज्य की सरकारें, चाहे वह कोई भी राज्नीतिक दल हो, कोई भी नहीं चाहता कि इस देश से भ्रष्टाचार दूर हो / मुझे अविश्वास जैसा लगता है कि जिस तरह का सरकार जन लोक्पाल बिल ला रही है , उससे देश के लोगों का कोई भला होगा, बल्कि मुझे ऐसा लगता है कि इस बिल के पास हो जाने के बाद भ्रष्टाचार और ज्यादा बढ जायेगा / क्योंकि “बोफोर्स कान्ड” के उजागर होने के बाद सरकारी दफ्तरों में जिस तेजी से सुविधा शुल्क और घूस देने कि रकम में इजाफा हुआ है, यह मै तब से आज तक देख रहा हू और देखता चला आ रहा हूं / इसलिये मेरे अनुभव में यही है कि सरकारी कर्मचारियों के दिल घूस लेने के मामले में और अधिक खुल जायेन्गे, क्यों कि हर कानून में बहुत से ऐसे छेद होते है जो लोगों को साफ बच जाने का मौका देते है /

सुखराम को लीजिये पन्द्रह साल से अधिक हो गये अभी तक सजा नहीं मिली, क्यों ? पुलिस अधिकारी राठौड का क्या हुआ ? ऐसे ही हजारों हजार नेता और अधिकारी मौजूद हैं, जिनके ऊपर अभी तक वर्षों से कोई कार्यवाही नही हुयी है और सभी फाइलें धूल चाट रही हैं / दर असल इन सबके दिल भ्रष्टाचार से खुल गये है और ऐसे लोग बे-खौफ हो गये हैं / क्या आप समझते है कि कनीमोरी और राजा जैसे नेता सुधर जायन्गे और फिर कभी आगे भ्रष्टाचार नहीं करेन्गे या भरष्टाचार से तौबा कर लेन्गे ? जी नही, यह सोच बिल्कुल गलत है ? अब इन सभी का भ्रष्टाचार करने का तौर तरीका बदल जायेगा, ये और दुगनी तिगनी ताकत लगाकर अधिक से अधिक से भ्रषटाचार करेन्गे, क्योन्कि इनके दिल खुल गये है, ये बे-खौफ हो जायेन्गे / ये समझ गये है कि भ्रश्टाचार करने के बाद ज्यादा से ज्यादा क्या हो सकता है ? इन्हे भ्रष्टाचार से बचाव के सब रास्ते और भ्र्ष्ट कार्यों की सजा से बचने के सभी महीन से महीन बातें पता हो गयी है / सजा काट लेने के बाद सालों मुकदमा लड़ लेन्गे , और पैसा हजम कर जायेन्गे / चार महीने की जेल काटकर अगर बीस हजार करोड़ बचते है तो ऐसा सौदा बुरा कहा जायेगा ?

कुकिन्ग गैस ब्लैक करने मे सबसे अव्वल ; कानपुर शहर का बदनाम इन्डेन गैस डीलर “सुमीता गैस एजेन्सी”

कानपुर शहर की जिस इन्डेन कुकिन्ग गैस डीलर के बारे मे देख रहे है  और पढ रहे है आप , वह इस शहर का नम्बर एक कुकिन्ग गैस यानी रसोई गैस को ब्लैक में बेचने वाला कारोबारी है / इस रसोई गैस यानी कुकिन्ग गैस कम्पनी की अनियमितताओं और गैस को ब्लैक में बेचने के बारे मे पचासों बार कानपुर शहर के दैनिक अखबारों मे समाचार छप चुका है / शहर के किसी भी इस गैस आपूर्ति कम्पनी के मेरे जैसे उपभोक्ताओं से पूछ लीजिये और जानकारी करिये कि इस एजेन्सी की गैस , जो उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जानी चाहिये वह जाती कहां है ?  घर में गैस की आपूर्ति नहीं होती और न इसके करमचारी घरों में गैस सिलिन्डर लगाने आते है, तो बुक की गयी गैस जाती कहां है ?

पिछले दो द्शकों से मै इस गैस एजेन्सी का उपभोक्ता हूं / इस गैस एजेन्सी का रिकार्ड है कि इसने शायद  ही एक साल में मुझे तीन या चार गैस सिलिन्डर कायदे से भेजे हों / मैने २३ अक्टूबर २०११ को इस गैस एजेन्सी में खुद जाकर अपनी गैस की बुकिन्ग कराई थी, लेकिन एक महीना हो गया अभी तक गैस नहीं आई / यह पहली बार नही हुआ है / ऐसा हर बार होता है और जब भी मै गैस बुक कराता हू, डेढ महीने से लेकर चार महीने में गैस की आपूर्ति हो पाती है / 

अब इनके गैस न भेजने के तर्क भी पढ लीजिये जो इस एजेन्सी के मालिकों और करमचारियों ने गढ रखे हैं /
पहला तर्क-१ ; आपके यहां हमारा कर्मचारी गैस लेकर गया था, लेकिन आपके घर में कोई नहीं था इसलिये गैस वापस आ गयी, इसलिये आपकी गैस कैन्सिल कर दी गयी है / आपको दुबारा गैस बुक करानी पडेगी /

दूसरा तर्क -२ ; आपकी गैस की पर्ची भेज दी गयी है / जब तक आप घर पहुचेन्गे आपकी गैस लग गयी होगी / घर आने पर पता चला कि गैस एजेन्सी से कोई भी बन्दा गैस लगाने नहीं आया / मुझसे इस गैस एजेन्सी के करमचारियों ने झूठ बोला /

तीसरा तर्क-३ ; आपके घर जो सिलिन्डर भेजा गया था उसमें गैस की लीकेज निकल आई, गैस लगाने वाले ने देख लिया था इसलिये आपके घर गैस नहीं लग पायी / पब्द्रह दिन बाद जब सिलिन्डर आयेगा अब तो तभी आपके घर गैस लग पायेगी /

और भी इसके जवाब देखिये………

 तर्क ४-  गैस लगाने वाला आपके घर गया तो था, लेकिन आपके घर में गैस का सिलिन्डर खाली नहीं था, इसलिये आपकी गैस वापस आ गयी है / अब आपकी गैस कैन्सिल हो गयी है / आपको गैस चाहिये तो आपको गैस की बुकिन्ग दुबारा करानी पडे़गी और फिर डेढ से महीने में गैस भेजी  जायगी 

 तर्क ५- इन्डेन गैस का प्लान्ट बन्द है , इसलिये गैस नही आ रही है / कभी बताते है हड़्ताल हो गयी है / कभी बताते है गैस की सप्लाई नही मिल रही है इसलिये प्लान्ट का काम बन्द है , कभी बताते है , अधिकारियों ने माल नहीं भेजा, कभी बताते है दो हफ्ते की मसक्कत के बाद २० सिलिन्डर भेजे है जो आपके आने से पहले ही लोगों को बान्ट दिये गये / कभी बताते है एक हफ्ते से कोई गैस सिलिन्डर की खेप नहीं आयी है /

 तर्क ६- गैस लगाने वाले आदमी ही पिछले १० दिनों से नहीं आ रहे है / आपकी पर्ची उनके पास है / पता कर रहे हैं कि आपकी गैस का क्या हुआ ?

 यानी गैस न देने के लिये तरह  तरह के यानी एक के बाद दूसरे बहाने इनके पास मौजूद हैं /

 अब सवाल यह है कि जब इस गैस कम्पनी के उपभोक्ताओं के पास गैस नहीं भेजी जाती या गैस नहीं दी जाती या गैस उप्भोक्ताओं को गैस नहीं मिलती , तो यह जाती कहां है और consume  कहां की जाती है ?

 सुमीता गैस एजेन्सी जहां पर स्तिथि है , इसे यदि केन्द्र बिन्दु मान लें तो सारी बात समझ में आ जायगी / इस गैस कम्पनी के २ या तीन किलोमीटर के वृत्ताकार दायरे में खाने की चीजें बनाने वालों के कारखाने है / ये कारखाने बहुत सी खाने पीने की चीजें बनाते है /  ऐसे  कारखानों की भरमार है जहां पेठा, दालमोठ, नमकीन, गजक, शक्कर से बनाये जाने वाले व्यन्जन, टाफी और खाने के लिये बहुत से आईटम हैं /

 ऊपर बताये गये दायरे में बहुत से रेस्टारेन्ट, खाने पीने के स्टाल, होटल और कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन के नजदीक की खान पान की दुकानें स्तिथि हैं /

 जहां यह गैस कम्पनी है , यह इलाका बहुत congested और highly populated है / ऐसे हजारों की सन्ख्या में उपभोक्ता है जिनके पास किसी भी गैस कम्पनी की कनेक्सन नहीं है /  यह सब लोग गैस ब्लैक में खरीदते है /

 बहुत से car owner अपनी अपनी कारें और वेहिकिल कुकिन्ग गैस से चला रहे है / इनके पास कोई अधिकृत गैस कनेक्सन नहीं है / इसके अलावा ४ किलो वाले छोटे सिलिन्डर जिन्हे “बच्चा सिलिन्डर”  कहा जाता हैऐसे सिलिन्डरों को भरने के लिये बड़ी सन्ख्या में गली मुहल्लों में दुकाने हैं /

यही कुकिन्ग गैस “गैस से पानी गरम करने” के लिये उपयोग किये जाते है तथा गैस से चलने वाले “जेनेरेटर” भी चलाये जाते है /

इस कम्पनी से गैस आपुर्ति न मिलने पर मै दो बार जिला पूर्ति अधिकारी के दफ्तर भी गया / इसके अलावा मैने इन्डियन आयल के अधिकारियों को लखनऊ तथा कानपुर दोनों जगह सम्पर्क किया / इससे इतना हुआ कि  मेरी शिकायत तो नहीं दर्ज की गयी , उल्टे वहां के क्लर्कों ने फोन करके मेरी गैस जरूर लगवा दी, लेकिन कार्यवाही के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ  और सब वैसा ही चलता रहा , जैसा आज तक चल रहा है / इसमें तनिक भी बदलाव नहीं आया है /

इन्डेन गैस के अधिकारियों से कई बार कहा कि मेरी गैस का कनेक्सन किसी दूसरी गैस एजेन्सी में ट्रान्स्फर कर दे, लेकिन यह भी नही हो पाया / 

मैने इस कम्पनी के मालिकों से गैस न मिलने की शिकायत को बताने के लिये जब सम्पर्क करना चाहा  तो पता चला कि वे यहां रहते नहीं हैं और इसीलिये कम्पनी में क्या हो रहा है, यह देखते तक आते नहीं है, क्योन्कि इस कम्पनी के मालिक लखनऊ में रहते है / कुछ दिल्ली में रहते है और कुछ विदेशों मे रहते है / इनके परिवार की राजनीतिक पहुन्च बड़े ऊन्चे स्तर की है तथा कई नौकर शाह इनके रिश्तेदारों मे हैं /

गैस कम्पनी में देख्र रेख के लिये मुझे दो लोग मिले , एक हैं “हसीन मियां” और दूसरे हैं “शर्मा जी”  / ये दोनों सज्जन एक तो मिलते नहीं हैं क्योंकि इनके मिलने का समय बहुत अनिश्चित है /

The Cooking Gas Cylinder supply cost is Rs 400/- [Rupees FOUR HUNDRED] per cylinder, but in Black, it costs Rs 600/-  [Rupees SIX HUNDRED]  to Rs 1000/-  [Rupees ONE THOUSAND] per cylinder. In case of Gas unavailability due to any reason or in Gas crisis situation , the cost of culinder raises high accordingly. Many Hotels, Restaurants, Food Industries, private persons etc etc are not using COMMERCIAL GAS CYLINDER , beacause they are more costly , comparative to cooking gas, which is much cheaper in rates and more in gas quantity. 

हलान्कि पास में ही और कुछ गैस एजेन्सियां है, इसमें दो इन्डेन की और एक भारत गैस की है , लेकिन इन गैस कमपनियों के  कन्ज्य़ूमर बताते है कि उनके यहां गैस कम्पनी में गैस बुक कराने के दिन से एक सप्ताह के अन्दर गैस मिल जाती है / किन्ही विशेष अड़चनों में दस  पन्द्रह दिनों के अन्दर गैस की आपूर्ति घरॊ में कर दी जाती है /

इस गैस की कम्पनी की अन्य शिकायतें निम्न वेब-साईट पर भी देखें /

www.client-complain.com
www.consumercomplaints.in
www.india-complaints.com
www.worstscams.com